भारत के पहले बौद्ध मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गवई का ऐतिहासिक शपथग्रहण
पहले बौद्ध मुख्य न्यायाधीश बनने वाले भूषण रामकृष्ण गवई ने भारत के 52वें CJI के रूप में शपथ लेंगे। वे अनुसूचित जाति से शीर्ष न्यायिक पद तक पहुंचने वाले दूसरे व्यक्ति भी हैं। उनका कार्यकाल 23 नवंबर, 2025 तक रहेगा। उनकी पदोन्नति न्यायपालिका में समावेशिता और संवैधानिक नैतिकता की जीत मानी जा रही है। भारत के पहले बौद्ध मुख्य न्यायाधीश बने जस्टिस गवई, अनुच्छेद 370 और चुनावी बॉन्ड जैसे फैसलों के लिए जाने जाते हैं।
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिलायेगी शपथ
- 6 महीने का कार्यकाल रहेगा
- गवई महाराष्ट्र के अमरावती से हैं
- उनके पिता RPI नेता और पूर्व राज्यपाल थे
गवई की संवैधानिक विरासत: ऐतिहासिक फैसलों की सूची
न्यायमूर्ति गवई कई संविधान पीठों में शामिल रहे, जिन्होंने कई ऐतिहासिक निर्णय दिए। इनमें अनुच्छेद 370 की समाप्ति को वैध ठहराना, चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द करना, और विमुद्रीकरण पर मुहर लगाना शामिल है।
- अनुच्छेद 370 पर केंद्र के फैसले को समर्थन
- चुनावी बॉन्ड योजना रद्द करने वाला फैसला
- 2016 के विमुद्रीकरण को वैध ठहराया
- SC/ST आरक्षण में उपवर्गीकरण को मंजूरी
उन्होंने मनीष सिसोदिया को मनी लॉन्ड्रिंग केस में जमानत दी और तीस्ता सीतलवाड़ को नियमित ज़मानत दी।
न्यायिक करियर: वकालत से सर्वोच्च पद तक
जस्टिस गवई ने 1985 में वकालत शुरू की। 1992 में सरकारी वकील बने और 2003 में बॉम्बे हाई कोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त हुए। 2005 में स्थायी न्यायाधीश और 2019 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने।
- नागपुर, अमरावती नगर निगमों के वकील रहे
- 700 से अधिक बेंचों का हिस्सा रहे
- 300 से अधिक फैसले लिखे
- संवैधानिक, प्रशासनिक, पर्यावरण जैसे मामलों में विशेषज्ञता
कांग्रेस से संबंध और पारदर्शिता
राहुल गांधी मानहानि केस की सुनवाई के दौरान गवई ने अपने पारिवारिक संबंध स्पष्ट किए थे। उन्होंने कहा था कि उनके पिता कांग्रेस से करीबी जुड़े रहे और उनके भाई आज भी राजनीति में हैं। सरकार की असहमति के बावजूद उन्होंने बेंच में रहकर गांधी की सजा पर रोक लगाई।
माँ की प्रतिक्रिया: संघर्ष और सेवा का परिणाम
उनकी मां कमलताई गवई ने कहा कि उनके बेटे की यह सफलता कड़ी मेहनत और सेवा का परिणाम है।
उन्होंने गरीबों की मदद की और कठिन परिस्थितियों में संघर्ष कर यह पद पाया।
- “बचपन से ही संघर्षों का सामना किया”
- “समाज की सेवा और सम्मान उनकी प्राथमिकता”
- “यह क्षण पूरे परिवार के लिए गर्व का है”
CJI संजीव खन्ना ने दी विदाई, कहा- संस्थागत हित सर्वोपरि :
मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने अपने विदाई भाषण में न्यायपालिका की चुनौतियों, उपलब्धियों और मूल्यों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में जिम्मेदारी का बोझ और निरंतर सार्वजनिक निगरानी एक बड़ी चुनौती थी, परंतु न्यायिक और प्रशासनिक दोनों मोर्चों पर ध्यान केंद्रित करके इस भूमिका को प्रभावी ढंग से निभाया। खन्ना ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की असली ताकत बाहरी मान्यता नहीं, बल्कि संस्था के हितों को प्राथमिकता देना है। उन्होंने इस बात पर संतोष जताया कि सुप्रीम कोर्ट ने उनकी कार्यावधि में ऐतिहासिक केस निपटान दर हासिल की।
- सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से हुआ विदाई समारोह
- जिम्मेदारी और सुर्खियों को एक साथ संतुलित करने की बात
- संस्था की प्रतिष्ठा को प्राथमिकता देने पर ज़ोर
- प्रशासनिक सुधारों और डिजिटल प्रक्रियाओं की प्रशंसा
न्यायिक दक्षता में ऐतिहासिक उपलब्धि, सुप्रीम कोर्ट ने छुआ 106% केस निपटान :
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने अपने कार्यकाल के दौरान मामलों की पेंडेंसी घटाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2024 से अप्रैल 2025 तक 10,000 से अधिक मामलों की समीक्षा की, जिनमें से हज़ारों मामलों को सूचीबद्ध और तेजी से निपटाया गया। केस क्लीयरेंस रेट 106 प्रतिशत तक पहुंची — यानी दाखिल मामलों से ज्यादा केसों का निपटारा हुआ। यह ऐतिहासिक दर दर्शाती है कि सुप्रीम कोर्ट ने न केवल बैकलॉग कम किया, बल्कि समयबद्ध न्याय को प्राथमिकता दी।
- कुल 3,374 मुख्य व 901 संबंधित मामलों की पहचान
- दो ही सुनवाई में 1,342 मुख्य और 189 संबंधित मामले निपटे
- डेटा-संचालित रणनीति और पारदर्शिता को मिली प्राथमिकता
- केस लिस्टिंग और फाइलिंग प्रणाली में बड़ा सुधार
मुकदमेबाज़ी नहीं, मध्यस्थता बने विवाद समाधान का भविष्य: खन्ना
CJI खन्ना ने अपने विदाई भाषण में उम्मीद जताई कि भविष्य में मध्यस्थता मुकदमेबाजी की जगह लेगी। उन्होंने कहा कि लोगों को अदालत से बाहर विवाद निपटाने के विकल्प अपनाने चाहिए, जिससे न्याय प्रक्रिया तेज और प्रभावी हो सके। इसके अलावा, उन्होंने कानूनी पेशे में आ रहे बदलावों की ओर भी ध्यान दिलाया और कहा कि अब वक्तृत्व कौशल से ज़्यादा विषय-वस्तु विशेषज्ञता की आवश्यकता है।
- भविष्य में मध्यस्थता को मिलेगी प्राथमिकता
- अदालती कार्यशैली में आ रहे बदलाव
- बार में डोमेन विशेषज्ञता की बढ़ती आवश्यकता
- गहराई से केस की तैयारी पर ज़ोर
न्यायमूर्ति बी.आर. गवई लेंगे कमान, खन्ना के संतुलित नेतृत्व की सराहना :
भारत के नए मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति बी.आर. गवई 14 मई को शपथ लेंगे। उन्होंने भी अपने संबोधन में संजीव खन्ना की न्यायिक दृष्टि और विनम्र नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि खन्ना का कार्यकाल सिर्फ न्यायिक निर्णयों के लिए नहीं, बल्कि पद की गरिमा को सहजता से निभाने के लिए याद किया जाएगा। यह नेतृत्व न केवल सुप्रीम कोर्ट में बल्कि पूरे न्यायिक तंत्र में प्रेरणा का कारण बना रहेगा।
- बी.आर. गवई होंगे 51वें मुख्य न्यायाधीश
- खन्ना की स्पष्टता और विनम्रता की सराहना
- पद की गरिमा को बनाए रखने पर प्रशंसा
- न्यायिक नैतिकता का उदाहरण बने खन्ना
- न्यायपालिका में सामाजिक प्रतिनिधित्व का नया अध्याय
पहले बौद्ध मुख्य न्यायाधीश बनने के साथ ही जस्टिस गवई भारत की न्यायपालिका में सामाजिक प्रतिनिधित्व का नया अध्याय लिख रहे हैं। उनकी नियुक्ति न केवल ऐतिहासिक है, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए न्यायिक दृष्टिकोण और विरासत को भी परिभाषित करेगी।



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