पीएम मोदी और पुतिन के बीच डिफेंस और ट्रेड डील पर अहम चर्चा
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दो दिवसीय भारत दौरे का आज दूसरा और सबसे अहम दिन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन आज 23वीं भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, जहां दोनों नेताओं के बीच डिफेंस और ट्रेड डील पर विशेष फोकस रहने की उम्मीद है। यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और भारत-अमेरिका के रिश्तों में व्यापारिक तनाव देखने को मिल रहा है। गुरुवार शाम को पीएम मोदी ने एक दुर्लभ और गर्मजोशी भरे अंदाज में प्रोटोकॉल तोड़ते हुए एयरपोर्ट पर खुद जाकर पुतिन का स्वागत किया, गले लगाया और हाथ मिलाया। इसके बाद दोनों नेता एक ही कार में पीएम आवास के लिए रवाना हुए, जो उनकी गहरी दोस्ती का प्रमाण है।
इस शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य रक्षा संबंधों को और मजबूत करना, बाहरी दबावों से भारत-रूस व्यापार को सुरक्षित रखना और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों पर सहयोग की संभावनाओं को तलाशना है। पीएम मोदी ने पुतिन को रूसी भाषा में अनुवादित भगवद गीता भेंट की और कहा कि यह ग्रंथ दुनिया भर के लाखों लोगों को प्रेरणा देता है।
एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत और पीएम आवास पर निजी डिनर
गुरुवार शाम को दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर एक अद्भुत नजारा देखने को मिला जब पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को रिसीव किया। यह एक ‘रेयर डिप्लोमैटिक जेस्चर’ था। दोनों नेताओं ने गले मिलकर एक-दूसरे का अभिवादन किया और एक साथ व्हाइट टोयोटा फॉर्च्यूनर में पीएम के आधिकारिक आवास, 7 लोक कल्याण मार्ग तक सफर किया। वहां पीएम मोदी ने पुतिन के सम्मान में एक निजी रात्रिभोज (प्राइवेट डिनर) का आयोजन किया।
पीएम आवास को भारत और रूस के झंडों और विशेष लाइटिंग से सजाया गया था। पीएम मोदी ने एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, “अपने दोस्त, प्रेसिडेंट पुतिन का भारत में स्वागत करते हुए बहुत खुशी हो रही है। आज शाम और कल हमारी बातचीत का इंतजार रहेगा। भारत-रूस की दोस्ती समय की कसौटी पर खरी उतरी है।”
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डिफेंस और ट्रेड डील: शिखर सम्मेलन का मुख्य एजेंडा
आज होने वाली शिखर वार्ता में डिफेंस और ट्रेड डील सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा रहेगा। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, बातचीत का मुख्य फोकस रक्षा संबंधों को गहरा करने और बाहरी प्रतिबंधों के बावजूद व्यापार को सुचारू रूप से चलाने पर होगा। भारत और रूस एक वार्षिक शिखर सम्मेलन तंत्र का पालन करते हैं जिसके तहत दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करते हैं। अब तक ऐसे 22 शिखर सम्मेलन हो चुके हैं।
पुतिन ने इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि भारत हमारा भरोसेमंद साझेदार है। उन्होंने कहा, “हम भारत को सिर्फ डिफेंस टेक्नोलॉजी बेच नहीं रहे हैं, बल्कि उसे शेयर भी कर रहे हैं। हमारे पास नेवल कंस्ट्रक्शन, रॉकेट और मिसाइल इंजीनियरिंग और एयरक्राफ्ट इंजीनियरिंग का बड़ा पोर्टफोलियो है।” एस-400 मिसाइल सिस्टम की और खरीद पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि यह रिश्ता खरीद-फरोख्त से कहीं ऊपर है।
ऊर्जा सहयोग और अमेरिकी प्रतिबंधों का साया
ऊर्जा सहयोग पर भी विशेष चर्चा होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि रूस ने भारत को कच्चे तेल की खरीद पर और डिस्काउंट देने का ऑफर दिया है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल ही में अमेरिका ने रूस के दो बड़े तेल उत्पादकों पर नए प्रतिबंध लगाए थे, जिससे भारत का आयात कम हो गया था। पुतिन का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका ने मॉस्को से तेल खरीदने पर भारत पर भारी टैरिफ लगाया है, जिससे वाशिंगटन के साथ रिश्तों में तनाव है।
बातचीत के दौरान, नई दिल्ली बढ़ते व्यापार घाटे (Trade Deficit) पर चिंता जता सकती है, जो मुख्य रूप से रूस से कच्चे तेल के भारी आयात की वजह से है। पुतिन ने कहा कि अगर अमेरिका को रूसी ईंधन खरीदने का अधिकार है, तो भारत को वही अधिकार क्यों नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि 90% से ज्यादा द्विपक्षीय व्यापार पहले ही राष्ट्रीय मुद्राओं (National Currencies) में हो रहा है, जिससे पश्चिमी बैंकिंग सिस्टम की निर्भरता कम हुई है।
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यूक्रेन युद्ध और शांति का रास्ता
शिखर सम्मेलन में यूक्रेन युद्ध पर भी चर्चा होने की पूरी संभावना है। उम्मीद है कि पुतिन पीएम मोदी को युद्ध से जुड़ी अमेरिका की नई पहलों के बारे में जानकारी देंगे। भारत का रुख हमेशा से स्पष्ट रहा है कि युद्ध खत्म करने का एकमात्र रास्ता कूटनीति और बातचीत है।
पुतिन ने कहा कि उन्हें यकीन है कि नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वास्तव में शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच टकराव को खत्म करने के पीछे राजनीतिक या आर्थिक मकसद भी हो सकते हैं।
पुतिन का बयान: भारत के साथ रिश्ता किसी के खिलाफ नहीं
अपने इंटरव्यू में पुतिन ने स्पष्ट किया कि भारत और रूस की साझेदारी किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा, “न तो मैंने और न ही प्रधानमंत्री मोदी ने कभी किसी के खिलाफ काम करने के लिए अपने सहयोग को आगे बढ़ाया है।” उन्होंने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि वे ऐसे नेता नहीं हैं जो आसानी से दबाव में आ जाएं। भारतीय लोग अपने नेता पर गर्व कर सकते हैं।
पुतिन ने यह भी कहा कि कुछ वैश्विक खिलाड़ी भारत की बढ़ती भूमिका से नाखुश हैं और आर्टिफिशियल रुकावटें पैदा कर रहे हैं। लेकिन डिफेंस और ट्रेड डील जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हमारा सहयोग जारी रहेगा और कोई बाहरी दबाव इसे रोक नहीं सकता।
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भगवद गीता का उपहार: सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जुड़ाव
डिप्लोमेसी के साथ-साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी इस दौरे का हिस्सा रहा। पीएम मोदी ने पुतिन को रूसी भाषा में भगवद गीता की एक कॉपी गिफ्ट की। उन्होंने कहा कि गीता की शिक्षाएं अनुशासन, मजबूती और प्रेरणा देती हैं। यह उपहार भारत की सॉफ्ट पावर और पारंपरिक मूल्यों का प्रतीक है। पुतिन ने भी इसे स्वीकार करते हुए दोनों देशों की आध्यात्मिक परंपराओं के जुड़ाव को रेखांकित किया।
भविष्य की राह और वैश्विक संदेश
इस शिखर सम्मेलन से दुनिया को एक कड़ा संदेश गया है कि भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम है। चाहे वह ऊर्जा सुरक्षा हो या डिफेंस और ट्रेड डील, भारत अपने हितों से समझौता नहीं करेगा। पुतिन के इस दौरे ने न केवल दोनों देशों के बीच पुराने भरोसे को और मजबूत किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि बदलती दुनिया में भी भारत-रूस की दोस्ती अटल है। आज की बातचीत से रक्षा, व्यापार और ऊर्जा के क्षेत्र में नए समझौतों की उम्मीद है जो आने वाले समय में दोनों देशों के लिए लाभकारी सिद्ध होंगे।
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