पीएम मोदी-शाह की रणनीति: नक्सलवाद का खात्मा और रेड कॉरिडोर का अंत
नक्सलवाद का खात्मा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के आक्रामक सुरक्षा अभियानों और परिवर्तनकारी विकास पहलों की दोहरी रणनीति ने देश के आंतरिक सुरक्षा के लिए दशकों से बड़ा खतरा रहे ‘रेड कॉरिडोर’ के अंत की पटकथा लिख दी है।
सरकार ने न केवल उग्रवाद को कमजोर किया है, बल्कि उन सामाजिक-आर्थिक कारकों का भी समाधान किया है जो इसे बढ़ावा देते थे।
आत्मसमर्पण की लहर: नक्सली नेतृत्व पर प्रहार
हालिया घटनाक्रम इस रणनीति की सफलता का प्रमाण हैं। 15 अक्टूबर, 2025 को, नक्सली एम वेणुगोपाल राव, जिन्हें भूपति के नाम से भी जाना जाता है और जिन पर 6 करोड़ रुपये का इनाम था, उन्होंने गढ़चिरौली जिले में 60 अन्य नक्सलियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। इसके ठीक एक दिन बाद, 16 अक्टूबर को, 170 और नक्सलियों ने अपने हथियार डाल दिए।
कुल मिलाकर, अक्टूबर 2025 में, भारत के सुरक्षा बलों ने मुख्य रूप से छत्तीसगढ़, झारखंड और महाराष्ट्र में नक्सल-माओवादी विद्रोहियों के खिलाफ एक आक्रामक अभियान जारी रखा।
‘ब्लैक फॉरेस्ट’ (Black Forest), उर्फ **”कागर”** जैसे अभियान तेज हो गए हैं, जो खुफिया जानकारी से प्रेरित हमलों, आत्मसमर्पण और पुनर्वास पर केंद्रित हैं। अकेले 2025 में, अब तक, 290 से अधिक नक्सलियों को निष्प्रभावी किया गया है, 1,090 से अधिक गिरफ्तार किए गए हैं और देश भर में 900 से अधिक ने आत्मसमर्पण किया है।
संदर्भ के लिए, मई 2025 के ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट ने कर्रेगुट्टालु पहाड़ियों में 31 नक्सलियों को मार गिराया, जिसमें नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू भी शामिल था, जिन पर 1.5 करोड़ रुपये का इनाम था।
नक्सली एम वेणुगोपाल राव और 60 अन्य नक्सलियों के आत्मसमर्पण करने के ठीक दो दिनों में, कुल 258 युद्ध-प्रशिक्षित वामपंथी उग्रवादियों ने हिंसा का त्याग किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि पिछले साल छत्तीसगढ़ में भाजपा के सत्ता में आने के बाद से, राज्य में दो हज़ार से ज़्यादा नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, लगभग 1800 गिरफ्तार हुए हैं और 450 से ज़्यादा का सफाया किया गया है।
आत्मसमर्पण करने वालों की सूची में 10 वरिष्ठ नक्सली शामिल हैं, जिनमें सतीश उर्फ टी वासुदेव राव (सीसीएम), जिस पर ₹1 करोड़ का इनाम था, और अन्य एसजेडसीएम (₹25 लाख इनाम), डीवीसीएम (₹10-15 लाख इनाम) और एसीएम (₹5 लाख इनाम) रैंक के गुर्गे शामिल थे।
उनके आत्मसमर्पण के साथ ही सुरक्षा बलों को एके-47, इंसास राइफलें, एसएलआर और .303 राइफलें जैसे हथियारों का एक बड़ा जखीरा भी सौंप दिया गया।
सिकुड़ता ‘लाल गलियारा’ और निर्णायक नेतृत्व
माओवादी विचारधारा से प्रेरित नक्सलवाद 1960 के दशक के अंत में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी में एक हिंसक आंदोलन के रूप में उभरा। यह दशकों में एक खतरनाक उग्रवाद में बदल गया, जिसे अक्सर ‘लाल गलियारा’ कहा जाता है। 2014 में पदभार ग्रहण करने के बाद से, प्रधानमंत्री मोदी ने नक्सल आतंकवाद की दीर्घकालिक चुनौती से निपटने को प्राथमिकता दी है।
उनके कुशल नेतृत्व में, वामपंथी उग्रवाद (LWE) से निपटने के एक ठोस प्रयास के तहत, नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 2013 में 126 से घटकर 2024 तक सात राज्यों में मुट्ठी भर रह गई है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्र 2014 के 18,000 वर्ग किलोमीटर से घटकर 2025 तक 8500 वर्ग किलोमीटर रह गया है। 2004-2014 और 2014-2024 के बीच, नक्सली हिंसा की घटनाओं में 53 प्रतिशत की कमी आई (16,463 से घटकर 7744), और सुरक्षाकर्मियों व नागरिकों की मौतों में 70 प्रतिशत की कमी आई।
‘लाल गलियारा’ 12 प्रभावित जिलों से कम तक सिकुड़ गया है, जिसमें बस्तर और अबूझमाड़ क्षेत्रों में गतिविधि केंद्रित है। अप्रैल 2025 तक, “सबसे अधिक प्रभावित जिलों” (जो वामपंथी उग्रवाद की 90 प्रतिशत हिंसा के लिए ज़िम्मेदार हैं) की संख्या 12 से घटकर एकल अंकों में रह गई है। ये जिले छत्तीसगढ़ में बीजापुर, कांकेर, नारायणपुर और सुकमा, झारखंड में पश्चिमी सिंहभूम और महाराष्ट्र में गढ़चिरौली हैं।
‘समाधान’ रणनीति: सुरक्षा, विकास और विश्वास
नक्सलवाद का मुकाबला करने में पीएम मोदी का दृष्टिकोण नया और सूक्ष्म रहा है, जो कभी भी बड़ी तस्वीर को नजरअंदाज नहीं करता है। गृह मंत्री अमित शाह द्वारा किए गए वादे के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक भारत को नक्सलवाद से मुक्त करने का नरेंद्र मोदी सरकार का फैसला दर्शाता है कि व्यापक ध्यान स्पष्ट रूप से विकास को बनाए रखने, विश्वास का निर्माण करने और यह सुनिश्चित करने पर है कि भारत के हृदय स्थल को सुरक्षित किया जाए। यह नक्सलवाद का खात्मा सुनिश्चित करने के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण है।
पीएम मोदी की रणनीति को ‘समाधान’ (SAMADHAN) के संक्षिप्त नाम से जाना जाता है, जिसका अर्थ है: Smart leadership, Aggressive strategy, Motivation and training, Actionable information, Dashboard-based KPI, Harnessing technology, Action plan for each theatre, और No access to financing.
सुरक्षा को सुदृढ़ बनाना:
सुरक्षा बलों को उन्नत हथियार, निगरानी ड्रोन और उपग्रह इमेजरी, जीपीएस-सक्षम ट्रैकिंग और नाइट-विज़न उपकरण जैसी तकनीक से लैस किया गया।मोदी सरकार ने दूरदराज के इलाकों में अग्रिम संचालन अड्डे (FOB) स्थापित किए, नक्सल आपूर्ति लाइनों और सुरक्षित ठिकानों को बाधित किया।
पिछले पांच वर्षों में 302 नए शिविर स्थापित किए गए हैं।शाह ने सीआरपीएफ, राज्य पुलिस बलों और कोबरा जैसी विशेष इकाइयों की क्षमताओं को बढ़ाया।मल्टी-एजेंसी सेंटर्स (एमएसी) और स्टेट मल्टी-एजेंसी सेंटर्स (एसएमएसी) की स्थापना ने वास्तविक समय में खुफिया जानकारी साझा करने की सुविधा प्रदान की।
विकास और शासन:
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत दूरदराज के गांवों को जोड़ने के लिए बारहमासी सड़कों का निर्माण तेज किया गया। 2023 तक, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में 12,000 किलोमीटर से अधिक सड़कें बनाई जा चुकी थीं।दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना और सौभाग्य योजना के तहत लगभग सार्वभौमिक विद्युतीकरण हासिल किया गया।
भारतनेट परियोजना ने दूरदराज के इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट का विस्तार किया।मोदी सरकार ने आदिवासी बच्चों के लिए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) स्थापित किए। 2024 तक, 400 से ज़्यादा ईएमआरएस चालू हो चुके थे।”कौशल भारत मिशन” के तहत कौशल विकास कार्यक्रमों ने वैकल्पिक आजीविका का सृजन किया।
मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं को रोज़गार और आवास सुरक्षा के लिए प्राथमिकता दी गई।वन धन योजना के माध्यम से लघु वनोपज के संग्रहण और विपणन को बढ़ावा दिया गया।आयुष्मान भारत योजना ने मुफ्त स्वास्थ्य सेवा प्रदान की।
विश्वास का निर्माण और जन-सम्पर्क:
सरकार ने आकर्षक आत्मसमर्पण नीतियाँ शुरू कीं, जिनमें हथियार डालने वाले नक्सलियों को वित्तीय प्रोत्साहन, व्यावसायिक प्रशिक्षण और सुरक्षा प्रदान की गई। 2015 से 10,000 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।सुरक्षा बलों को आदिवासी क्षेत्रों में खेल आयोजनों, चिकित्सा शिविरों और सांस्कृतिक उत्सवों जैसे नागरिक कार्रवाई कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
जन जागरूकता अभियानों ने हिंसा की निरर्थकता पर प्रकाश डाला।स्वतंत्र निगरानी तंत्र मानवाधिकारों के हनन के आरोपों को दूर करने में मदद कर रहे हैं, जो पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान बड़े पैमाने पर होते थे।नक्सलवाद का खात्मा करने के लिए, छत्तीसगढ़ में भाजपा के सत्ता में आने के बाद से अभियानों में तेज़ी आई है।
ऐतिहासिक उपलब्धि की ओर अग्रसर भारत
अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि जो लोग आत्मसमर्पण करना चाहते हैं, उनका स्वागत है, और जो लोग बंदूक चलाना जारी रखेंगे, उन्हें भारतीय सेना के प्रकोप का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ और उत्तरी बस्तर, जो कभी आतंकवादियों के गढ़ थे, अब नक्सली आतंक से मुक्त घोषित कर दिए गए हैं।
नक्सलवाद का खात्मा करने के लिए, लक्षित अभियानों ने प्रमुख नक्सली नेताओं को मार गिराया है या गिरफ्तार कर लिया है, जिससे कमान संरचनाएँ बाधित हुई हैं।
उदाहरण के लिए, गढ़चिरौली में 2021 में वरिष्ठ माओवादी नेता मिलिंद तेलतुम्बड़े की हत्या आंदोलन के लिए एक बड़ा झटका थी। मोदी सरकार का बहुआयामी दृष्टिकोण, जिसे अक्सर “विकास और विश्वास” के रूप में परिभाषित किया जाता है, नक्सल नेटवर्क को तेज़ी से ध्वस्त कर रहा है और प्रभावित समुदायों को मुख्यधारा में शामिल कर रहा है।
सरकार ने हाल के वर्षों में नक्सलवाद का खात्मा को प्राथमिकता दी है। गृहमंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, प्रभावित जिलों की संख्या लगातार घट रही है। सुरक्षा बलों की सटीक कार्रवाई और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से नक्सल नेटवर्क कमजोर हुआ है।



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