दिमागी नक्सल विवाद चिदंबरम बीजेपी-कांग्रेस में घमासान: सुधांशु त्रिवेदी बोले
दिमागी नक्सल विवाद चिदंबरम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण के दौरान दिए गए ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर देश की राजनीति गरमा गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने खुद को “दिमागी नक्सल होने पर गर्व” जताया था, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखा पलटवार किया है।
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि चिदंबरम के इस बयान के बाद कांग्रेस का असली चेहरा बेनकाब हो गया है और यह साबित हो गया है कि पार्टी अब ‘दिमागी नक्सल कांग्रेस’ बन चुकी है।
बीजेपी का तीखा हमला: ‘कोई शक-शुब्हा नहीं रहा’
पार्टी मुख्यालय में मीडिया को संबोधित करते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि जब कांग्रेस के इतने वरिष्ठ नेता खुद आगे आकर ऐसी विचारधारा पर गर्व जता रहे हैं, तो इसमें किसी संदेह की गुंजाइश नहीं बचती।
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सुधांशु त्रिवेदी का बयान:
“चिदंबरम जी ने खुद स्वीकार कर लिया है कि वे सिर्फ ‘मुस्लिम लीग माओवादी कांग्रेस’ ही नहीं हैं, बल्कि ‘दिमागी नक्सल कांग्रेस’ भी बन चुके हैं। प्रधानमंत्री के सचेत करने के तुरंत बाद आई इस प्रतिक्रिया से साफ हो गया है कि किसके मन में नक्सलवाद बसता है।”
क्या था पीएम मोदी का मूल बयान?
15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने देश को चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि सशस्त्र और जंगलों में फैले नक्सलवाद को तो सुरक्षा बलों ने काफी हद तक खत्म कर दिया है, लेकिन अब सिस्टम और वैचारिक स्तर पर ‘दिमागी नक्सल’ सक्रिय हैं। पीएम मोदी ने नागरिकों से अपील की थी कि ऐसे तत्वों को पहचानकर समाज से अलग-थलग किया जाए जो युवाओं का ब्रेनवाश कर रहे हैं।
इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी सफाई दी कि पीएम मोदी ने पूरे विपक्ष को नहीं, बल्कि केवल उन तत्वों को ‘दिमागी नक्सल’ कहा था जो संविधान को नकारते हैं, माओवादियों और अलगाववादियों का समर्थन करते हैं।
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सोशल मीडिया पर उभरी ‘दिमागी नक्सल पार्टी’
पीएम मोदी के इस बयान के बाद इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर व्यंग्यात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
2 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स: इंस्टाग्राम और ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ नाम से एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन पेज/ग्रुप तेजी से वायरल हो गया। इसके इंस्टाग्राम हैंडल पर 24 घंटे के भीतर ही 1 लाख से अधिक और कुछ ही दिनों में 2,26,000 से ज्यादा फॉलोअर्स जुड़ गए।
क्या है इस ग्रुप का मोटो? इस डिजिटल आंदोलन का स्लोगन “सोचें | रिसर्च करें | विरोध करें” है। यह पेज खुद को शहीद भगत सिंह की विचारधारा का अनुयायी बताता है और स्वतंत्र सोच व सरकारी नीतियों पर सवाल उठाने के अधिकार का समर्थन करता है।
CJP के बाद नया ट्रेंड: हाल ही में जंतर-मंतर पर युवाओं के प्रदर्शन से जुड़ी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बाद यह दूसरा ऐसा सैटायरिकल (व्यंग्यात्मक) ग्रुप है जो सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हुआ है।
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विपक्ष की प्रतिक्रियाएं
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पीएम मोदी की शब्दावली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले ‘अर्बन नक्सल’ और अब ‘दिमागी नक्सल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर सरकार से सवाल पूछने वाले नागरिकों और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘दिमागी नक्सल’ शब्द अब आगामी विधानसभा चुनावों और संसद के सत्रों में एक प्रमुख वैचारिक बहस का केंद्र बनने जा रहा है। पूर्व गृहमंत्री के बयान और राजनीतिक गलियारों में उठते सवालों के बीच गरमाया दिमागी नक्सल विवाद चिदंबरम
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