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स्मार्ट सिटी मॉडल फेल: इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों पर राहुल का हमला

स्मार्ट सिटी मॉडल फेल

विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शनिवार को इंदौर के भागीरथपुरा इलाके का दौरा किया, जहां उन्होंने दूषित पानी से फैले डायरिया के प्रकोप के बाद स्मार्ट सिटी मॉडल फेल होने का आरोप लगाते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर कड़ा प्रहार किया। राहुल गांधी ने कहा कि यह एक ऐसा “नया मॉडल स्मार्ट सिटी” है जहां नागरिकों को साफ पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं है। इंदौर पहुंचे गांधी ने बॉम्बे अस्पताल में भर्ती मरीजों और मृतकों के परिजनों से मुलाकात की।

उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “वादा किया गया था कि देश को स्मार्ट सिटी दी जाएंगी, लेकिन यहां पीने का पानी नहीं है और लोगों को डराया जा रहा है। पूरे परिवार बीमार पड़ गए हैं, जो दर्शाता है कि इंदौर में साफ पानी उपलब्ध नहीं है। लोग दूषित पानी पीकर मर रहे हैं और सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह विफल रही है।”

मौतों के आंकड़ों पर गहराया विवाद और विरोधाभासी दावे

इंदौर में जल प्रदूषण से हुई मौतों की संख्या को लेकर प्रशासन और स्थानीय निवासियों के बीच विरोधाभासी दावे किए जा रहे हैं। जहां राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने भागीरथपुरा में अब तक छह मौतों की पुष्टि की है, वहीं निवासियों का दावा है कि मरने वालों की संख्या 24 तक पहुंच चुकी है, जिसमें पांच महीने का मासूम अव्यान भी शामिल है। सरकारी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के एक पैनल ने हाल ही में कम से कम 15 मौतों का कारण डायरिया फैलने को बताया है।

मध्य प्रदेश सरकार ने हाई कोर्ट को सौंपी स्टेटस रिपोर्ट में केवल सात मौतों की जानकारी दी है। गांधी ने इन आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार अपनी लापरवाही को छुपाने के लिए मौतों की संख्या कम बता रही है, जबकि 450 से ज्यादा लोग अस्पतालों में भर्ती हुए और अभी भी कई मरीज आईसीयू में जीवन की जंग लड़ रहे हैं।

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पर्यावरणीय संकट और देशव्यापी शहरी शासन की विफलता

राहुल गांधी ने इस मुद्दे को केवल इंदौर तक सीमित न बताते हुए इसे एक गंभीर पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता करार दिया। उन्होंने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में पीने के पानी में सीवेज प्रदूषण की हालिया रिपोर्टों का जिक्र करते हुए कहा कि स्मार्ट सिटी मॉडल फेल होने की यह कहानी पूरे देश के शहरों में दोहराई जा रही है। उन्होंने कहा, “सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी साफ पानी देना और प्रदूषण कम करना है। सरकार में किसी की जवाबदेही तय होनी चाहिए। मरीजों के इलाज का खर्च और लापरवाही से हुई मौतों के लिए पर्याप्त मुआवजा दिया जाना चाहिए।” गांधी ने आरोप लगाया कि बुनियादी शहरी शासन में गहरी कमियां हैं और ‘साफ पानी’ एक सार्वजनिक अधिकार है, जिसे सुरक्षित करने में भाजपा सरकार नाकाम रही है।

भागीरथपुरा का दौरा और प्रतीकात्मक पानी की टंकी का सच

भागीरथपुरा इलाके का दौरा करते हुए राहुल गांधी ने एक विशाल सरकारी पानी की टंकी की ओर इशारा किया और इसे ‘प्रतीकात्मक’ बताया। उन्होंने दावा किया कि स्मार्ट सिटी मॉडल फेल होने का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि आज भी वहां साफ पानी नहीं है। गांधी ने कहा, “चूंकि मीडिया और देश का ध्यान इस मुद्दे पर है, इसलिए एक अस्थायी पट्टी लगा दी गई है। जैसे ही मीडिया का ध्यान हटेगा, स्थिति वैसी ही हो जाएगी और फिर से दूषित पानी की आपूर्ति शुरू हो जाएगी।” उन्होंने मांग की कि सरकार को साफ पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक व्यवस्थित और स्थायी सिस्टम विकसित करना चाहिए, न कि केवल मीडिया के दबाव में दिखावा करना चाहिए।

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भाजपा का पलटवार: ‘राहुल गांधी राजनीति करने आए हैं’

सत्ताधारी भाजपा ने राहुल गांधी के इस दौरे को पूरी तरह राजनीतिक बताया है। जल संसाधन विभाग मंत्री तुलसीराम सिलावट ने गांधी के “20 दिन बाद” आने पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब हालात सामान्य हो रहे हैं, तब वह क्यों आ रहे हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जमीन पर रहकर लोगों की मदद कर रही थी और गांधी केवल राजनीति करने आए हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी कहा कि राहुल गांधी इंसानों की मौत पर राजनीति कर रहे हैं। इस पर गांधी ने पलटवार करते हुए कहा, “विपक्ष के नेता के तौर पर लोगों की समस्याओं को उठाना मेरा फर्ज है। अगर कोई इसे राजनीति कहता है, तो कहे—मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन लोगों को साफ पानी मिलना चाहिए।”

पीड़ितों की आपबीती: ‘हमें पैसे नहीं, साफ पानी चाहिए’

राहुल गांधी ने भागीरथपुरा में गीता बाई और जीवनलाल जैसे मृतकों के परिवारों से मुलाकात की। पीड़ितों ने गांधी के प्रति आभार व्यक्त किया लेकिन अपनी मूलभूत समस्या पर अडिग रहे। पीड़ित किशोर धुबकर ने बताया कि राहुल गांधी ने उन्हें 1 लाख रुपये का चेक दिया और सरकारी नौकरी में मदद का वादा किया। वहीं, शानू प्रजापत ने एक कड़वी हकीकत बयां करते हुए कहा, “राहुल गांधी और सरकार ने पैसे दिए, लेकिन पैसे से क्या होगा? इंसान की जिंदगी की कोई कीमत नहीं होती। हमें 2 लाख या 1 लाख के चेक नहीं, बल्कि साफ पानी चाहिए। हम कब तक पानी खरीदकर पीते रहेंगे?” पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें स्थानीय स्तर पर अन्य राजनीतिक दलों से वह सहयोग नहीं मिला जो अपेक्षित था।

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कांग्रेस नेताओं द्वारा आर्थिक सहायता और जवाबदेही की मांग

दौरे के दौरान राहुल गांधी के साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और विपक्ष के नेता उमंग सिंघार भी मौजूद थे। कांग्रेस पार्टी ने त्रासदी से प्रभावित 24 परिवारों में से प्रत्येक को 1 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी। इसके अतिरिक्त, उमंग सिंघार ने हर परिवार को अपनी ओर से 50,000 रुपये के चेक सौंपे। गांधी ने सरकार से मांग की कि वह अपनी लापरवाही की जिम्मेदारी ले और सभी प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा दे। भूपेश बघेल ने भी भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि इंदौर को कई बार “सबसे स्वच्छ शहर” का पुरस्कार मिला, लेकिन यहां के स्मार्ट सिटी मॉडल फेल होने के कारण सबसे गंदा पानी सप्लाई करने का रिकॉर्ड भी इंदौर के नाम हो गया है। उन्होंने इसे ‘दिए तले अंधेरा’ करार दिया।

प्रशासनिक रुख और मानवीय आधार पर सहायता

राज्य प्रशासन ने अपनी ओर से 21 प्रभावित परिवारों को 2-2 लाख रुपये का मुआवजा वितरित किया है। अधिकारियों का कहना है कि हालांकि कुछ मौतें अन्य बीमारियों के कारण हुई थीं, लेकिन मानवीय आधार पर सभी पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद दी गई है। इंदौर के भागीरथपुरा में भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुए इस दौरे ने शहर के ‘स्वच्छता’ के दावों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने अब स्थिति सामान्य होने का दावा किया है, लेकिन स्थानीय निवासियों में अभी भी भविष्य को लेकर डर बना हुआ है। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि वह इन परिवारों के साथ खड़े रहेंगे और सरकार से जवाबदेही तय करने के लिए दबाव बनाना जारी रखेंगे।

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