शिवसेना MNS गठबंधन: 20 साल बाद उद्धव और राज ठाकरे एक साथ हुए
महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत करते हुए, चचेरे भाई उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने बुधवार को आधिकारिक तौर पर शिवसेना MNS गठबंधन की घोषणा कर दी। यह ऐलान 15 जनवरी को होने वाले बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के बेहद अहम चुनावों से ठीक पहले किया गया है। लगभग 20 साल की राजनीतिक दूरी और कड़वाहट के बाद, दोनों भाइयों ने “मुंबई को बचाने के लिए” एक मंच साझा किया और हमेशा साथ रहने का वादा किया। मुंबई में आयोजित एक संयुक्त सभा को संबोधित करते हुए, दोनों नेताओं ने मराठी मानुष की एकता पर जोर दिया। यह मिलन जुलाई में उनके सार्वजनिक तौर पर साथ आने के बाद हुआ है, जब उन्होंने दो दशकों में पहली बार मंच साझा किया था। इस नए समीकरण से महाराष्ट्र की राजनीति, खासकर मुंबई नगर निगम चुनावों में बड़े बदलाव की उम्मीद की जा रही है।
मराठी अस्मिता और मुंबई के मेयर का वादा
राज ठाकरे ने गठबंधन की घोषणा करते हुए साफ कर दिया कि भले ही अभी सीट बंटवारे का पूरा विवरण साझा नहीं किया गया है, लेकिन एक बात तय है कि मुंबई का अगला मेयर इसी गठबंधन से होगा और वह एक मराठी व्यक्ति होगा। उन्होंने कहा, “मैं भरोसे के साथ कह सकता हूं कि मुंबई का अगला मेयर मराठी होगा, और वह हमारे गठबंधन से ही होगा।” उद्धव ठाकरे ने भी इस सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि मुंबई की सुरक्षा के लिए मराठी लोगों की एकता बहुत ज़रूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि कुछ लोग मुंबई पर कब्ज़ा करना चाहते हैं और ठाकरे परिवार इसका विरोध करने के लिए यहाँ है। उद्धव ने कहा, “हम एक साथ रहने के लिए एक साथ आए हैं। अगर कोई मुंबई पर हमला करता है, तो हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
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20 साल पुरानी कड़वाहट को भुलाकर नई शुरुआत
यह शिवसेना MNS गठबंधन दोनों नेताओं के लिए एक भावुक और रणनीतिक कदम है। राज ठाकरे ने जनवरी 2006 में अविभाजित शिवसेना छोड़ दी थी और अपनी पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) बनाई थी। तब से दोनों चचेरे भाई एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे हैं। लेकिन हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और अस्तित्व की लड़ाई ने उन्हें फिर से एक कर दिया है। राज ठाकरे ने कहा, “महाराष्ट्र किसी भी झगड़े से बड़ा है; हम घोषणा कर रहे हैं कि हमारा गठबंधन बन गया है।” उन्होंने कहा कि वह हमेशा महाराष्ट्र के हितों को सबसे ऊपर रखेंगे और राज्य के बड़े हित में एक साथ आने के लिए तैयार थे। उद्धव ठाकरे ने भी पुरानी यादों को ताजा करते हुए संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के बलिदानों का जिक्र किया और कहा कि शिवसेना का जन्म मुंबई में मराठी मानुष के अधिकारों के लिए हुआ था।
सीट बंटवारे और चुनावी रणनीति पर सस्पेंस
हालांकि गठबंधन का ऐलान हो गया है, लेकिन मुंबई की 227 सीटों के बंटवारे पर अभी सस्पेंस बना हुआ है। खबरों के मुताबिक, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) 150 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है, जबकि राज ठाकरे की MNS बाकी 77 सीटों पर उम्मीदवार उतार सकती है। राज ठाकरे ने कहा कि उन्होंने सावधानी के तौर पर अभी उम्मीदवारों के नाम अनाउंस नहीं करने का फैसला किया है। हालांकि, नासिक नगर निगम के लिए सीट बंटवारे की बातचीत पूरी हो चुकी है। उद्धव ठाकरे ने यह भी संकेत दिया कि एनसीपी (SP) के साथ भी बातचीत चल रही है और गठबंधन का विस्तार राज्य के अन्य नागरिक निकायों तक किया जा सकता है। दादर, माहिम, बोरीवली, विक्रोली, भांडुप और सेवरी जैसे इलाकों में सीटों को लेकर कुछ मतभेद थे, जिन्हें सुलझाने की कोशिश जारी है।
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बीजेपी का तीखा हमला: ‘हताश कोशिश और ऐतिहासिक हार’
इस शिवसेना MNS गठबंधन पर बीजेपी ने तीखा हमला बोला है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तंज कसते हुए कहा कि यह ऐसा है जैसे रूस और यूक्रेन, जो संघर्ष में उलझे हुए हैं, आखिरकार एक साथ आ गए हों। उन्होंने कहा, “दो पार्टियां जो अस्तित्व के संकट का सामना कर रही हैं… वे अपने अस्तित्व को बचाने के लिए एक साथ आई हैं।” बीजेपी विधायक राम कदम ने इसे “हताश कोशिश” बताया और कहा कि इसका महायुति पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने याद दिलाया कि 20 साल पहले उद्धव ने राज के साथ बुरा बर्ताव किया था और आज भीख का कटोरा लेकर उनके पास गए हैं। बीजेपी का कहना है कि यह गठबंधन ‘ऐतिहासिक हार की शुरुआत’ साबित होगा। आशीष शेलार ने आरोप लगाया कि दोनों भाई बीएमसी का खजाना लूटने के लिए साथ आए हैं।
मराठी वोट बैंक और बीजेपी का ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ नारा
उद्धव ठाकरे ने बीजेपी पर मराठी समुदाय को बांटने का आरोप लगाया। उन्होंने विधानसभा चुनावों के दौरान बीजेपी के “बंटेंगे तो कटेंगे” नारे का जिक्र करते हुए कहा कि यह एक नकली प्रोपेगेंडा था। उद्धव ने चेतावनी दी, “अगर आप बंट गए, तो मराठी मानुष मुंबई पर अपना अधिकार खो देगा। इसलिए, हमें किसी भी कीमत पर एकजुट रहना होगा।” राज ठाकरे ने भी बीजेपी और उसकी मशीनरी द्वारा चलाए जाने वाले नेगेटिव और फेक कैंपेन की चेतावनी दी और कहा कि उनके पास बहुत सारे वीडियो हैं जिन्हें वे जवाब में रिलीज करेंगे। उन्होंने सीएम देवेंद्र फडणवीस पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें हमें हिंदुत्व के बारे में नहीं सिखाना चाहिए। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस गठबंधन का मकसद राज ठाकरे के मराठी वोटरों के प्रभाव को उद्धव ठाकरे के मुस्लिम और अन्य वोटरों के साथ जोड़ना है।
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ठाकरे ब्रांड और परिवारवाद के आरोप
बीजेपी नेताओं ने ‘ठाकरे ब्रांड’ पर भी सवाल उठाए हैं। राम कदम ने कहा कि ठाकरे ब्रांड अब मौजूद नहीं है, यह सिर्फ बालासाहेब ठाकरे के समय में था। अब यह सिर्फ एक सरनेम रह गया है। नवनीत राणा ने कहा कि यह गठबंधन परिवार के लिए नहीं बल्कि “अपने फायदे” के लिए है। प्रदीप भंडारी ने कहा कि हार के डर से दो वंशवादी एक साथ आए हैं। दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे ने जोर देकर कहा कि “केवल एक ठाकरे ही महाराष्ट्र का नेतृत्व कर सकता है।” शिवसेना (UBT) नेता आनंद दुबे ने इस पल को ऐतिहासिक बताया और कहा कि दोनों भाई मुंबई को बचाने के लिए एकजुट हुए हैं।
चुनावों की तारीख और भविष्य की राह
महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग ने बीएमसी, पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ सहित 29 नगर पालिकाओं के लिए चुनावों की घोषणा की है। वोटिंग 15 जनवरी को होगी और वोटों की गिनती 16 जनवरी को होगी। यह चुनाव दोनों पार्टियों के लिए “करो या मरो” की स्थिति है। पंचायत चुनावों में मिली हार के बाद, उद्धव और राज दोनों को उम्मीद है कि यह शिवसेना MNS गठबंधन उनकी किस्मत बदल देगा। मुंबई के अलावा ठाणे, कल्याण-डोंबिवली और नासिक पर भी फोकस रहेगा। अब देखना यह होगा कि क्या 20 साल बाद एक साथ आए ये दोनों भाई मुंबई की जनता का दिल जीत पाते हैं या बीजेपी का दावा सच साबित होता है कि “पूरे मुंबई में सिर्फ महायुति का झंडा लहराएगा।”
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