“सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार पीएम मोदी का विरोधियों को कड़ा संदेश
सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार पर गुजरात के प्रभास पाटन में आयोजित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए एक कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार का विरोध करने वाली ताकतें आज भी सक्रिय हैं और हमें उन्हें हराना होगा।
प्रधानमंत्री ने उन ऐतिहासिक कहानियों को सीधे तौर पर चुनौती दी, जो मुगल काल के हमलों को केवल लूटपाट के रूप में दिखाती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि तत्कालीन अधिकारियों ने धार्मिक कट्टरता को जानबूझकर नजरअंदाज किया।
रविवार को गुजरात में जगमगाते सोमनाथ मंदिर के सानिध्य में मोदी ने यह टिप्पणी की, जिसे जवाहरलाल नेहरू पर एक परोक्ष हमले के रूप में देखा जा रहा है।
इतिहास की गलत व्याख्या को चुनौती और गजनवी के आक्रमण का सच
गुजरात के इस ऐतिहासिक मंदिर शहर में महमूद गजनवी के आक्रमण के 1,000 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में मोदी ने अपने हिंदू पुनरुत्थानवादी विचार पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि जहां अतीत में हमलावरों ने “तलवारों” का इस्तेमाल किया था, वहीं आज वे देश को बांटने की “साजिशों” के जरिए सक्रिय हैं।
उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि आज भी सोमनाथ के पुनर्निर्माण का विरोध करने वाली ताकतें हमारे देश में मौजूद हैं। आज तलवारों के बजाय भारत के खिलाफ साजिशें दूसरे दुर्भावनापूर्ण रूप ले रही हैं, इसीलिए हमें हर उस ताकत को हराने के लिए ज्यादा सतर्क, मजबूत और एकजुट होना होगा जो हमें बांटना चाहती है।
प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि गजनवी से लेकर औरंगजेब तक, सभी धार्मिक कट्टरपंथियों ने सोचा कि उन्होंने तलवार से सोमनाथ को जीत लिया है, लेकिन समय का चक्र देखिए कि वे आक्रमणकारी इतिहास के पन्नों में सिमट गए और सोमनाथ आज भी शान से खड़ा है।
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नेहरू पर परोक्ष प्रहार और तुष्टीकरण की राजनीति की आलोचना
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में किसी का नाम लिए बिना पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर निशाना साधा। उन्होंने हाल ही में एक ब्लॉग पोस्ट में लिखा था कि 1951 में मंदिर के जीर्णोद्धार के समय नेहरू “बहुत उत्साहित नहीं थे।” भाजपा ने भी पिछले हफ्ते नेहरू पर आरोप लगाया था कि उन्होंने ‘द डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ में महमूद गजनवी का महिमामंडन किया था।
मोदी ने आरोप लगाया कि ऐतिहासिक कहानियों ने मुगल आक्रमणकारियों की “कट्टरता” को “सिर्फ लूटपाट” के रूप में छिपाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ की पवित्र मूर्ति को अपवित्र किया गया और मंदिर का रूप बार-बार बदला गया, फिर भी हमें गलत इतिहास सिखाया गया।
मोदी ने कहा कि तुष्टीकरण के ठेकेदार हमेशा ऐसी कट्टरपंथी मानसिकता के आगे झुकते रहे और आजादी के बाद भी सरदार वल्लभभाई पटेल के संकल्प में रुकावट डालने की कोशिशें की गईं।
सभ्यतागत इच्छाशक्ति और सनातन संस्कृति का अटूट प्रतीक
प्रधानमंत्री ने सोमनाथ को केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि अगर लूट ही एकमात्र मकसद होता, तो 1,000 साल पहले पहले आक्रमण के बाद हमले रुक जाते। मंदिर पर बार-बार हमले और मूर्तियों का तोड़ा जाना नफरत और आतंक का असली इतिहास था जिसे छिपाया गया।
मोदी ने कहा कि भारत की सभ्यता का संदेश कभी किसी को हराना नहीं रहा, बल्कि संतुलन बनाए रखना रहा है। जो सभ्यताएं दूसरों को मिटाने की कोशिश करती हैं, वे खुद समय के साथ खो जाती हैं।
उन्होंने 12वीं सदी में राजा कुमारपाल, 13वीं सदी में अलाउद्दीन खिलजी के खिलाफ प्रतिरोध और बाद में अहिल्याबाई होल्कर द्वारा किए गए पुनर्निर्माण का जिक्र करते हुए कहा कि सोमनाथ का इतिहास विनाश का नहीं, बल्कि जीत और नवीनीकरण का है।
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अमित शाह और गजेंद्र शेखावत ने रेखांकित किया पर्व का महत्व
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, जो सोमनाथ मंदिर के ट्रस्टी भी हैं, ने देश भर के लोगों से 8 से 11 जनवरी तक चलने वाले इस यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री मोदी के फैसले पर पहले हमले के 1,000 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है।
उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा कि सोमनाथ का इतिहास उस सभ्यतागत इच्छाशक्ति को दर्शाता है जो हार मानने से इनकार करती है। वहीं, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने घोषणा की कि यह पर्व पूरे साल देश भर में मनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह उत्सव दुनिया को यह बताने का मौका है कि भारत न तो झुकेगा और न ही गिरेगा। इस उत्सव में 72 घंटे का ओंकार नाद, विशाल ड्रोन शो और भव्य शौर्य यात्रा जैसे आकर्षण शामिल हैं।
शौर्य यात्रा और जन-गण का उत्साह
प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को अपने गृह राज्य के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे थे। उन्होंने सोमनाथ में आयोजित ‘शौर्य यात्रा’ में हिस्सा लिया, जहां शंख सर्कल से हमीरसिंह सर्कल तक हजारों लोगों ने “हर हर महादेव” और “जय सोमनाथ” के नारों के साथ उनका स्वागत किया। इस दौरान उनके साथ मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी मौजूद थे।
मोदी ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के पहले चेयरमैन नवानगर के जाम साहब दिग्विजयसिंहजी के योगदान को भी याद किया, जिन्होंने कठिन समय में इस प्रोजेक्ट को सपोर्ट किया था। उन्होंने कहा कि आज का भारत अपनी विरासत को याद रखते हुए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी के जरिए भविष्य के लिए तैयार हो रहा है।
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वाइब्रेंट गुजरात: विकास और विरासत का अद्भुत संगम
धार्मिक आयोजनों के बाद, प्रधानमंत्री ने राजकोट में ‘वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस’ (VGRC) का उद्घाटन किया। यहाँ उन्होंने निवेश और विकास पर जोर देते हुए कहा कि गुजरात का मतलब “विकास और विरासत” दोनों है। इस अवसर पर मुकेश अंबानी ने रिलायंस ग्रुप की ओर से अगले पांच सालों में ₹7 लाख करोड़ और अडानी ग्रुप ने ₹1.5 लाख करोड़ के निवेश का वादा किया।
मोदी ने कहा कि दुनिया में अनिश्चितता के बीच भारत में राजनीतिक स्थिरता और नीतियों में निरंतरता है। उन्होंने जोर दिया कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है और जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है।
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भारत की वैश्विक शक्ति और भविष्य का संकल्प
अपने संबोधन के समापन में प्रधानमंत्री ने भारत की तकनीकी और आर्थिक उपलब्धियों को गिनाया। उन्होंने कहा कि भारत आज मोबाइल डेटा का सबसे बड़ा उपभोक्ता है और UPI दुनिया का नंबर वन रियल-टाइम डिजिटल ट्रांजैक्शन प्लेटफॉर्म बन गया है। सोलर पावर और मेट्रो नेटवर्क के मामले में भी भारत शीर्ष देशों में शामिल है।
सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार उन्होंने निवेशकों और नागरिकों से आह्वान किया कि यह भारत के लिए सही समय है। उन्होंने कहा कि सुधार, प्रदर्शन और बदलाव के मंत्र के साथ भारत का नया मिडिल क्लास देश को अपार संभावनाओं वाला राष्ट्र बना रहा है।
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