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 “नेपाल बाढ़ राहत”  सद्गुरु ने 80 श्रद्धालुओं की मौत पर जताया दुख,

नेपाल बाढ़ राहत

नेपाल में भीषण बारिश और अचानक आई भयानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में कैलाश मानसरोवर और अन्य धार्मिक यात्राओं पर गए 80 श्रद्धालुओं की जान जाने की दुखद खबर सामने आई है। इस त्रासदी पर आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने गहरा शोक प्रकट किया है। पीड़ित परिवारों की मदद और राहत कार्यों में तेजी लाने के लिए ईशा फाउंडेशन और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बड़ी आर्थिक सहायता की घोषणा की है।

सद्गुरु ने जताया दुख: ‘नेपाल मेरे दिल के बहुत करीब’

ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु ने एक विशेष वीडियो संदेश जारी कर नेपाल में आई बाढ़ और श्रद्धालुओं की मृत्यु पर गहरा संताप व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नेपाल और वहाँ की सांस्कृतिक धरोहर उनके दिल के बेहद करीब है।

कैलाश यात्रा की ऐतिहासिक महत्ता: सद्गुरु ने रेखांकित किया कि कैलाश यात्रा लगभग 12,000 वर्षों से भी अधिक पुरानी एक महान ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपरा है। यह यात्रा न केवल आध्यात्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि नेपाल की अर्थव्यवस्था के लिए भी एक रीढ़ की हड्डी की तरह कार्य करती है।

राहत सहायता का ऐलान: ईशा नेपाल की ओर से राहत और बचाव कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए नेपाल के ‘प्रधानमंत्री राहत कोष’ में ₹1 करोड़ रुपये का योगदान देने की घोषणा की गई है।

विशेष अनुष्ठान ‘कालभैरव कर्म’: दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए सद्गुरु ने घोषणा की कि भारत स्थित ईशा योग केंद्र में 3 सितंबर को विशेष ‘कालभैरव कर्म’ अनुष्ठान का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पीड़ित परिवार संपर्क कर जानकारी साझा करते हैं, तो इस आपदा में जान गंवाने वाले अन्य लोगों को भी इस अनुष्ठान में शामिल किया जाएगा।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने जारी किया इमरजेंसी फंड

नेपाल में आई इस आपदा के बाद स्वास्थ्य सुविधाओं और बीमारियों के खतरे को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी तुरंत मदद का हाथ बढ़ाया है।

$1,50,000 का आपातकालीन फंड: WHO ने अपने ‘साउथ-ईस्ट एशिया रीजनल हेल्थ इमरजेंसी फंड’ से 1,50,000 अमेरिकी डॉलर (लगभग 1.25 करोड़ रुपये) की तत्काल वित्तीय सहायता जारी की है।

स्वास्थ्य सेवाओं का समन्वय: WHO के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय के प्रभारी अधिकारी डॉ. नीलेश बुद्ध ने कहा कि यह इमरजेंसी फंड बाढ़ से प्रभावित समुदायों की तत्काल स्वास्थ्य और बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा।

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स्वास्थ्य संबंधी नई चुनौतियों से निपटने की तैयारी

नेपाल सरकार और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर डब्ल्यूएचओ जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में जुटा है। बाढ़ के बाद पैदा होने वाली बीमारियों और चोटों से बचाव के लिए कई स्तरों पर काम किया जा रहा है:

संक्रामक रोगों की निगरानी: बाढ़ के पानी के कारण फैलने वाले जलजनित (Water-borne) और भोजन जनित रोगों की रोकथाम के लिए त्वरित निगरानी प्रणाली सक्रिय की गई है।

महामारी का खतरा: दूषित जल से होने वाले दस्त, हैजा, सांस की बीमारियों और मच्छरों से फैलने वाले वेक्टर-जनित रोगों (डेंगू, मलेरिया) के प्रसार को रोकने के लिए मेडिकल टीमें तैनात की जा रही हैं।

आपातकालीन उपचार: डूबने की घटनाओं में घायल हुए लोगों और शारीरिक चोटों से ग्रस्त मरीजों को तत्काल प्राथमिक और उन्नत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

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नेपाल में प्राकृतिक आपदा के इस संकट काल में अंतरराष्ट्रीय संगठनों और आध्यात्मिक संस्थानों की ओर से दी जा रही मदद राहत कार्यों में अहम भूमिका निभाएगी। एक तरफ जहाँ ईशा फाउंडेशन की ₹1 करोड़ की मदद और आध्यात्मिक पहल से पीड़ितों को संबल मिलेगा, वहीं दूसरी ओर WHO का हेल्थ इमरजेंसी फंड महामारी के खतरे को टालने और प्रभावितों को त्वरित चिकित्सा पहुँचाने में कारगर साबित होगा।

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