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भारत पर ट्रंप की टैरिफ धमकी, निक्की हेली ने किया भारत का समर्थन

भारत पर टैरिफ धमकी

भारत पर टैरिफ धमकी देने के डोनाल्ड ट्रंप के बयानों के बाद अमेरिका-भारत संबंधों में तनाव की आशंका गहराने लगी है। इस पर अमेरिका की पूर्व राजनयिक निक्की हेली ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ट्रंप की नीतियों पर सवाल खड़े किए, खासकर चीन को मिली टैरिफ छूट और भारत जैसे सहयोगी पर आर्थिक दबाव डालने को लेकर।

हेली का दो टूक बयान

  • निक्की हेली ने ट्रंप प्रशासन की “दोहरी नीतियों” की आलोचना की।
  • उन्होंने कहा कि भारत पर टैरिफ की धमकी देना और चीन को 90 दिन की छूट देना गलत है।
  • भारत को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताते हुए हेली ने कहा कि उसे अलग-थलग नहीं किया जाना चाहिए।

हेली के अनुसार, चीन रूसी और ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, फिर भी उसे राहत दी जा रही है, जबकि भारत जो पश्चिमी देशों के विकल्प खोज रहा है, उस पर टैरिफ लगाने की धमकी दी जा रही है।

मुख्य बिंदु

  1. डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी देकर रणनीतिक साझेदारी को चुनौती दी।
  2. भारत पर टैरिफ धमकी के कारण द्विपक्षीय संबंधों में तनाव की आशंका जताई जा रही है।
  3. निक्की हेली ने ट्रंप की नीति को भारत विरोधी और दोहरे मापदंड वाला बताया।
  4. हेली ने चीन को टैरिफ छूट दिए जाने पर गंभीर आपत्ति जताई और भारत का समर्थन किया।
  5. भारत ने रूसी तेल खरीद को ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हित से जुड़ा कदम बताया।
  6. ट्रंप का आरोप था कि भारत यूक्रेन युद्ध में अप्रत्यक्ष रूप से रूस की मदद कर रहा है।
  7. हेली ने चेताया कि भारत जैसे सहयोगी को अलग-थलग करना अमेरिका के लिए नुकसानदायक होगा।

ट्रंप का भारत पर हमला: व्यापार और तेल को लेकर सख्त रुख

डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया पर भारत को “अच्छा व्यापारिक साझेदार नहीं” बताया। उन्होंने भारत पर टैरिफ धमकी देते हुए कहा कि भारत रूसी तेल खरीदकर अमेरिका की नीति को चुनौती दे रहा है। ट्रंप ने 24 घंटे के भीतर 25% से अधिक टैरिफ लगाने की बात कही थी।

“भारत युद्ध क्षेत्र को ईंधन दे रहा है और उसे यूक्रेन की परवाह नहीं,” – ट्रंप ने अपने बयान में कहा।

भारत की प्रतिक्रिया: रणनीतिक हित में तेल खरीद

विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के बयानों को “राजनीतिक” और “अनुचित” बताया। भारत ने स्पष्ट किया कि रूसी तेल खरीद वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम है। मंत्रालय ने कुछ बिंदुओं को रेखांकित किया:

  • अमेरिका और यूरोपीय संघ खुद भी रूस से व्यापार करते रहे हैं।
  • भारत ने रियायती दरों पर तेल खरीदा क्योंकि पारंपरिक सप्लायर यूरोप चले गए।
  • अमेरिका ने ही कभी भारत को ऊर्जा स्रोत विविधता के लिए प्रेरित किया था।

भारत ने यह भी दोहराया कि वह अपने रणनीतिक हितों से समझौता नहीं करेगा।

🇨🇳 चीन को मिली छूट: निक्की हेली की नाराज़गी

निक्की हेली ने ट्रंप प्रशासन द्वारा चीन को टैरिफ में छूट देने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह भारत जैसे मित्र राष्ट्र के साथ “भेदभावपूर्ण व्यवहार” है। हेली के अनुसार, अमेरिका को यह स्पष्ट करना होगा कि वह किसके साथ खड़ा है—एक लोकतांत्रिक साझेदार या रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी?

  • चीन को दी गई 90 दिनों की छूट 12 अगस्त को समाप्त होनी है।
  • चीन पर फिलहाल 30% तक टैरिफ लागू हैं।
  • ट्रंप इस संघर्ष विराम को बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं।

हेली का समर्थन और ट्रंप को चेतावनी

हेली ने भारत पर टैरिफ धमकी को वापस लेने का आग्रह किया और ट्रंप को रिश्तों को और नुकसान न पहुंचाने की सलाह दी।

“भारत को अलग-थलग करना अमेरिका की रणनीतिक भूल होगी,” – निक्की हेली

  • उन्होंने याद दिलाया कि वे ट्रंप प्रशासन में संयुक्त राष्ट्र में भारत की समर्थक रही हैं।
  • ट्रुथ सोशल पर ट्रंप की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, “टैरिफ की धमकी रिश्तों को कमजोर करती है।”

सहयोगी या विरोधी?

यह घटना दर्शाती है कि अमेरिका की विदेश नीति में “स्थायित्व” और “सहयोगियों के प्रति सम्मान की कमी चिंता का विषय है। भारत, जो वैश्विक दक्षिण में एक सशक्त आवाज़ है, अपने हितों को प्राथमिकता देना जारी रखेगा। भारत पर टैरिफ धमकी ने जहां दोनों देशों के संबंधों को पुनः परिभाषित करने की चुनौती खड़ी की है, वहीं निक्की हेली का बयान अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी मतभेदों की ओर इशारा करता है।

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