ट्रंप की नई चेतावनी: क्या भारत-रूस तेल व्यापार पर टैरिफ की गाज गिरेगी?
भारत रूस तेल व्यापार को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के खिलाफ टैरिफ बढ़ाने की धमकी दी है। उन्होंने भारत पर रियायती दरों पर तेल खरीदकर उसे मुनाफे पर बेचने का आरोप लगाया है। भारत ने ट्रंप की इस चेतावनी को ‘अनुचित और अविवेकपूर्ण’ बताया है। भारत का कहना है कि यह अमेरिका के कहने पर ही रूस से तेल खरीद रहा है, ताकि वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में स्थिरता बनी रहे। भारत अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।
- ट्रंप का कहना है कि भारत यूक्रेन में हो रहे नरसंहार की परवाह नहीं करता है।
- भारत वर्तमान में रूस से तेल खरीदने वाले सबसे बड़े देशों में से एक है।
- मोदी सरकार ने अभी तक रूसी तेल की खरीद को रोकने का कोई आदेश नहीं दिया है।
मुख्य बिंदु :
- ट्रंप ने ब्रिक्स समूह को अमेरिका विरोधी बताते हुए भारत की भागीदारी पर भी तीखी टिप्पणी की है।
- डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर सस्ते रूसी तेल को मुनाफे पर बेचने का आरोप लगाते हुए टैरिफ की धमकी दी।
- भारत ने ट्रंप की धमकी को अनुचित बताते हुए राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाने की बात कही।
- भारत ने रूस से तेल आयात अमेरिका के कहने पर शुरू किया, ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर रह सके।
- ट्रंप ने रूसी सेना को ‘युद्ध मशीन’ कहकर 8 अगस्त तक युद्धविराम नहीं होने पर कार्रवाई की चेतावनी दी।
- भारत ने रूसी तेल आयात जारी रखने की घोषणा की, क्योंकि यह आर्थिक और सामरिक हितों से जुड़ा है।
- अमेरिका और भारत के बीच 43 अरब डॉलर के व्यापार घाटे को लेकर तनावपूर्ण संबंध बने हुए हैं।
तेल व्यापार के पीछे का तर्क
भारत का कहना है कि उसने यह कदम अमेरिका के कहने पर उठाया था। भारत ने भारत रूस तेल व्यापार को इसलिए शुरू किया था, क्योंकि संघर्ष के बाद पारंपरिक आपूर्ति यूरोप की ओर मोड़ दी गई थी। भारत ने यह भी बताया कि अमेरिका खुद भी अभी भी रूस के साथ व्यापार कर रहा है। भारत का कहना है कि वह ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बाजार की स्थिति का मूल्यांकन करता है। किसी भी देश के साथ उसके संबंध को तीसरे पक्ष के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
- भारत ने अमेरिका के कहने पर रूस से तेल आयात शुरू किया था।
- अमेरिका खुद भी रूस से व्यापार कर रहा है।
- भारत की रिफाइनरियां सरकार से स्वतंत्र होकर काम करती हैं।
ट्रंप का यूक्रेन और रूस पर रुख
जनवरी में व्हाइट हाउस लौटने के बाद से ट्रंप ने रूस के खिलाफ अपनी बयानबाजी और कड़ी कर दी है। उन्होंने रूसी सेना को “रूसी युद्ध मशीन” कहा है। ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर 8 अगस्त तक यूक्रेन के साथ युद्धविराम नहीं होता है।
- ट्रंप ने रूसी सेना को ‘रूसी युद्ध मशीन’ कहा है।
- पुतिन शांति के लिए कुछ शर्तों को पूरा करने की बात कह रहे हैं।
- एक अमेरिकी दूत आगे की बातचीत के लिए मॉस्को जा रहा है।
रूसी नेता ने कहा है कि वह शांति के लिए तैयार हैं, लेकिन केवल तभी जब कीव कुछ शर्तों को पूरा करे, जैसे कि रूस द्वारा कब्ज़ा किए गए यूक्रेनी क्षेत्रों को मान्यता देना।
मोदी सरकार का सख्त रुख
बढ़ते दबाव के बावजूद, भारत रूसी तेल आयात पर अपने रुख पर अडिग रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खरीद रोकने का कोई निर्देश नहीं दिया है। भारतीय अधिकारियों ने भी ऊर्जा रणनीति में संशोधन से इनकार किया है। भारत रूस तेल व्यापार आर्थिक और सामरिक दोनों हितों से प्रेरित है।
- मोदी सरकार ने रूसी तेल की खरीद पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है।
- भारतीय अधिकारियों ने ऊर्जा रणनीति में बदलाव से इनकार किया है।
- ब्लूमबर्ग के अनुसार, भारत ने इस साल 17 लाख बैरल रूसी तेल खरीदा है।
भारत का कहना है कि वह अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल का आयात जारी रखेगा, क्योंकि यह राष्ट्रीय हित में है।
भारत रूस तेल व्यापार के भू-राजनीतिक आयाम
अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक संबंध लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। ट्रंप ने भारत की उसके टैरिफ, नियामक बाधाओं और ब्रिक्स समूह में भागीदारी को लेकर आलोचना की है। भारत ने व्यापार वार्ता जारी रखने में रुचि दिखाई है, लेकिन कई बड़ी बाधाएँ बनी हुई हैं। ये भारत रूस तेल व्यापार से जुड़े भू-राजनीतिक मुद्दे हैं, जो दोनों देशों के संबंधों में जटिलताएँ बढ़ा रहे हैं और जिन्हें समझना आवश्यक है।
- ट्रंप ने ब्रिक्स समूह को अमेरिका के प्रति शत्रुतापूर्ण बताया है।
- अमेरिका और भारत के बीच लगभग 43 अरब डॉलर का व्यापार घाटा है।
- मोदी सरकार संवेदनशील क्षेत्रों को खोलने से बच रही है।



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