गुवाहाटी-कोलकाता रूट पर पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन: किराया और सुविधाएं
भारतीय रेल के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। रेल मंत्रालय के अथक प्रयासों, नवाचार और स्वदेशीकरण के संकल्प के साथ जल्द ही देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन गुवाहाटी और कोलकाता (हावड़ा) के बीच अपनी रफ्तार भरेगी।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार, 1 जनवरी 2026 को पत्रकारों से रूबरू होते हुए इस ऐतिहासिक घोषणा की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि इस बहुप्रतीक्षित ट्रेन का ट्रायल, टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है और अब सरकार इसे पटरी पर उतारने के लिए पूरी तरह तैयार है।
यह ट्रेन न केवल उत्तर-पूर्व भारत और पश्चिम बंगाल के बीच कनेक्टिविटी को एक नई मजबूती देगी, बल्कि यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा में हवाई जहाज जैसा अनुभव भी प्रदान करेगी।
पीएम मोदी जल्द दिखाएंगे हरी झंडी: जानें उद्घाटन की संभावित तारीख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बहुत जल्द इस आधुनिक रेल सेवा का शुभारंभ करेंगे। रेल मंत्री के अनुसार, अगले 17-18 दिनों के भीतर, यानी लगभग 17 या 18 जनवरी को इस ट्रेन का भव्य उद्घाटन किया जा सकता है। वंदे भारत चेयर कार की अपार सफलता के बाद अब वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के जरिए रात भर की यात्रा को और भी सुगम बनाने की तैयारी है।
देश के कोने-कोने से नई पीढ़ी की इन ट्रेनों की मांग उठ रही थी, जिसे देखते हुए इस साल के अंत तक लगभग 12 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें तैयार होकर रेल नेटवर्क का हिस्सा बन जाएंगी। अगले साल से इन ट्रेनों के उत्पादन और डिप्लॉयमेंट को और भी बड़े पैमाने पर बढ़ाने की योजना बनाई गई है।
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हवाई किराए से आधी कीमत: मध्यम वर्ग के लिए किफायती सफर
किराये के मोर्चे पर यह ट्रेन हवाई यात्रा को कड़ी टक्कर देने वाली है। गुवाहाटी-हावड़ा रूट पर हवाई किराया आमतौर पर ₹6,000 से ₹8,000 के बीच रहता है, जो पीक सीजन में ₹10,000 तक पहुंच जाता है। इसके विपरीत, रेल मंत्री ने बताया कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में 3AC का किराया लगभग ₹2,300 तय किया गया है, जो आम यात्रियों के लिए काफी सस्ता है।
वहीं, 2AC के लिए यात्रियों को लगभग ₹3,000 और लग्जरी अनुभव चाहने वाले मध्यम वर्ग के लिए फर्स्ट AC का किराया लगभग ₹3,600 प्रस्तावित किया गया है। 1,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करने वाली इस ट्रेन का टाइमटेबल इस तरह बनाया जाएगा कि यह शाम को प्रस्थान कर अगली सुबह अपने गंतव्य पर पहुंच जाए।
हाई-स्पीड ट्रायल में रचा इतिहास: 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार
इस ट्रेन ने कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) की देखरेख में कोटा-नागदा सेक्शन पर अपना अंतिम हाई-स्पीड ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया है। ट्रायल के दौरान ट्रेन ने 180 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति हासिल की, जो भारत की आत्मनिर्भर रेल तकनीक की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।
रेल मंत्री द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में ट्रेन की स्थिरता का अनूठा प्रदर्शन देखा गया, जहाँ 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पर भी पानी से भरा गिलास पूरी तरह स्थिर रहा। इस तकनीकी मूल्यांकन में राइड स्टेबिलिटी, ब्रेकिंग एफिशिएंसी, ऑसिलेशन और इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम जैसे महत्वपूर्ण मानकों पर ट्रेन का प्रदर्शन संतोषजनक पाया गया है।
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आधुनिक सुविधाओं और 16 कोच का लग्जरी सेटअप
हावड़ा-गुवाहाटी रूट पर चलने वाले इस 16-कोच वाले रैक को विशेष रूप से लंबी दूरी के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी कुल क्षमता 823 यात्रियों की होगी, जिसमें 11 थ्री-टियर एसी कोच, 4 टू-टियर एसी कोच और 1 फर्स्ट-क्लास एसी कोच शामिल होगा। ट्रेन के भीतर एर्गोनॉमिक रूप से डिजाइन की गई सीढ़ियाँ, ऊपरी बर्थ पर चढ़ने में आसानी प्रदान करेंगी।
साथ ही, ट्रेन में ऑटोमैटिक प्लग दरवाजे, पूरी तरह से सील किए गए चौड़े गैंगवे, आधुनिक शौचालय और डिजिटल यात्री सूचना डिस्प्ले जैसी विश्व स्तरीय सुविधाएं दी गई हैं। रात भर की यात्रा को थकान मुक्त बनाने के लिए इसमें एक विशेष सस्पेंशन सिस्टम और आरामदायक स्लीपर बर्थ विकसित किए गए हैं।
सुरक्षा के बेजोड़ इंतजाम: कवच और एंटी-क्लाइंबर टेक्नोलॉजी
यात्रियों की सुरक्षा रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता है, और वंदे भारत स्लीपर ट्रेन इसका बेहतरीन उदाहरण है। यह ट्रेन स्वदेशी ‘कवच’ (KAVACH) ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम से लैस है। इसके अलावा, इसमें क्रैशप्रूफ और बिना झटके वाले सेमी-परमानेंट कपलर लगाए गए हैं, जिनमें एंटी-क्लाइंबर डिवाइस मौजूद हैं।
हर कोच के अंत में फायर बैरियर दरवाजे, एयरोसोल-आधारित आग का पता लगाने और उसे बुझाने की प्रणाली, तथा सीसीटीवी आधारित निगरानी जैसे फीचर्स शामिल हैं। बिजली की बचत के लिए इसमें रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम दिया गया है और एयर-कंडीशनिंग यूनिट में कीटाणुशोधन के लिए UV-C लैंप आधारित तकनीक का उपयोग किया गया है।
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रूट और स्टॉपेज: उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ता विकास
यह ट्रेन गुवाहाटी और कोलकाता के बीच कई प्रमुख जिलों और स्टेशनों को कवर करेगी। असम में कामरूप मेट्रोपॉलिटन और बोंगाईगांव के यात्रियों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, मालदा, मुर्शिदाबाद, पुरबा बर्धमान, हुगली और हावड़ा जिलों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
अपनी यात्रा के दौरान यह ट्रेन बंदेल, कथा, मालदा, न्यू फरक्का, न्यू जलपाईगुड़ी, न्यू कूचबिहार और न्यू बोंगाईगांव जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों पर रुकेगी।
इसके साथ ही, भारतीय रेलवे की अन्य उपलब्धियों जैसे उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) और मिजोरम की बैराबी-सैरंग लाइन का जिक्र करते हुए मंत्रालय ने बताया कि आइजोल भी अब भारत के रेल मैप पर आ चुका है।
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रेल नेटवर्क का कायाकल्प और भविष्य की योजनाएं
भारतीय रेलवे केवल नई ट्रेनें ही नहीं चला रहा, बल्कि पूरे इकोसिस्टम को पारदर्शी बना रहा है। ई-टिकटिंग सिस्टम का दुरुपयोग रोकने के लिए इस साल 5.73 करोड़ संदिग्ध और इनएक्टिव यूज़र्स को डीएक्टिवेट किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस वर्ष 25 हजार करोड़ रुपये से अधिक की 42 परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया है।
रेलवे का लक्ष्य पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के जरिए नेटवर्क को भीड़भाड़ से मुक्त करना है। अमृत भारत ट्रेनों के माध्यम से नॉन-एसी यात्रियों को सुविधा देने के बाद, अब वंदे भारत स्लीपर के जरिए एसी क्लास के यात्रियों के लिए एक नए युग की शुरुआत हो रही है।
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