तंबाकू पर नया टैक्स: पान मसाला और सिगरेट पर अब भारी मार
तंबाकू पर नया टैक्स और पान मसाले पर GST-सेस का नया कॉम्बिनेशन 1 फरवरी से प्रभावी होने जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य डुअल वैल्यू-कैपेसिटी ट्रैकिंग के जरिए टैक्स चोरी पर लगाम लगाना है। नई व्यवस्था के तहत पान मसाले की खुदरा बिक्री कीमत पर 40% GST लगेगा, साथ ही मशीन की उत्पादन क्षमता के आधार पर हेल्थ और नेशनल सिक्योरिटी सेस भी लागू किया जाएगा।
वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह डुअल सिस्टम—GST के जरिए वैल्यू ट्रेल और सेस के जरिए उत्पादन क्षमता की निगरानी सुनिश्चित करेगा। इसमें CCTV, रिस्क-आधारित एनालिटिक्स और चार्टर्ड इंजीनियर-सर्टिफाइड मशीन पैरामीटर्स के साथ क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जाएगा ताकि अंडर-रिपोर्टिंग और चोरी-छिपे मैन्युफैक्चरिंग का तुरंत पता चल सके।
टैक्स चोरी रोकने के लिए वैल्यू और क्षमता का ट्रायंगुलेशन
सरकार द्वारा तंबाकू पर नया टैक्स ढांचे के साथ लागू किया गया यह कॉम्बिनेशन एक व्यापक फ्रेमवर्क तैयार करेगा। सूत्रों का कहना है कि पान मसाला और स्मोकलेस तंबाकू सेक्टर ऐतिहासिक रूप से कम रिपोर्टिंग और वैल्यूएशन विवादों के लिए प्रोन रहे हैं।
अब रिटेल बिक्री कीमत पर आधारित GST यह डेटा देगा कि कितना माल किस कीमत पर बेचा गया, जबकि सेस डेटा यह बताएगा कि मशीन की स्थापित क्षमता के अनुसार कितना उत्पादन संभव था।
जब इन दोनों डेटासेट्स का मिलान किया जाएगा, तो टैक्स लीकेज की संभावना काफी कम हो जाएगी। यदि मशीन की रेटेड स्पीड के मुकाबले रिपोर्ट किया गया वॉल्यूम कम पाया गया, तो सिस्टम तुरंत रिस्क फ्लैग जेनरेट करेगा।
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मैन्युफैक्चरर्स के लिए CCTV और 24 महीने का बैकअप अनिवार्य
नए नियमों के तहत चबाने वाले तंबाकू, गुटखा और संबंधित उत्पादों के मैन्युफैक्चरर्स को 1 फरवरी से अपनी सभी पैकिंग मशीनों को कवर करने वाला एक चालू CCTV सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस फुटेज को कम से कम 24 महीने तक सुरक्षित रखना होगा।
वित्त मंत्रालय द्वारा नोटिफाई किए गए पैकिंग मशीन (क्षमता निर्धारण और शुल्क संग्रह) नियमों के अनुसार, उत्पादकों को मशीनों की संख्या, उनके तकनीकी स्पेसिफिकेशन्स जैसे गियरबॉक्स अनुपात और अधिकतम उत्पादन क्षमता का विवरण एक्साइज अधिकारियों को देना होगा। यह पारदर्शिता बढ़ाने और राजस्व की रक्षा करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
मशीनों की सीलिंग और एक्साइज ड्यूटी में छूट के प्रावधान
सरकार ने मैन्युफैक्चरर्स के लिए कुछ रियायतें भी रखी हैं। यदि कोई मशीन लगातार कम से कम 15 दिनों तक खराब रहती है, तो मैन्युफैक्चरर उस अवधि के लिए ड्यूटी में छूट का दावा कर सकता है। इसके लिए उसे कम से कम तीन कार्य दिवस पहले विभाग को सूचित करना होगा, जिसके बाद एक्साइज विभाग मशीन को सील कर देगा।
ऑपरेशन फिर से शुरू करने के लिए भी तीन दिन पहले सूचना देनी होगी और मशीन को सुपरिटेंडेंट की उपस्थिति में ही डी-सील किया जाएगा। वार्षिक उत्पादन क्षमता का निर्धारण केंद्रीय एक्साइज के डिप्टी या असिस्टेंट कमिश्नर द्वारा फिजिकल इंस्पेक्शन के बाद किया जाएगा, जो महीने के उत्पादन को 12 से गुणा करके निकाला जाएगा।
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हेल्थ सिक्योरिटी से नेशनल सिक्योरिटी सेस की ओर बदलाव
तंबाकू और पान मसाले पर टैक्स संरचना में एक बड़ा बदलाव यह है कि अब ‘हेल्थ सिक्योरिटी सेस’ को ‘नेशनल सिक्योरिटी सेस’ बिल 2025 के तहत मशीन-आधारित सेस में बदला जा रहा है। तंबाकू पर नया टैक्स लागू करने की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि मार्च 2026 में GST कंपनसेशन सेस खत्म होने वाला है।
पान मसाले पर फिलहाल 28% GST और 60% सेस (कुल 88%) लगता है, लेकिन 1 फरवरी से यह 40% GST और 48% सेस के मेल के साथ कुल 88% ही रहेगा। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि जो लोग टिन या अन्य रूपों में मैन्युफैक्चरिंग करते हैं, उन्हें मूल्यांकन योग्य मूल्य पर लागू ड्यूटी देनी होगी।
सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर भारी ड्यूटी का बोझ
सिगरेट उद्योग के लिए नई दरें काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रही हैं। सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति 1,000 स्टिक पर 2,050 रुपये से लेकर 8,500 रुपये के बीच एक्साइज ड्यूटी लगाई जाएगी, जो 40% GST के अतिरिक्त होगी। अन्य उत्पादों की बात करें तो हुक्के पर 33% एक्साइज ड्यूटी, चबाने वाले तंबाकू और नसवार पर 60.5%, जबकि पाइप और सिगरेट के लिए स्मोकिंग मिक्सचर पर भारी-भरकम 279% ड्यूटी तय की गई है।
बीड़ी पर फिलहाल 18% GST लगेगा, जबकि चेरूट्स और सिगारिलोस पर 40% GST की दर प्रभावी होगी। इंडस्ट्री विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रभावी ड्यूटी बढ़ोतरी से बाजार पर गहरा असर पड़ेगा।
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शेयर बाजार में कोहराम और तंबाकू कंपनियों के गिरे भाव
जैसे ही सरकार ने तंबाकू पर नया टैक्स और अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी नोटिफाई की, गुरुवार को प्रमुख सिगरेट कंपनियों के शेयरों में सुनामी आ गई। मार्केट लीडर ITC का शेयर 9.69% गिरकर 363.95 रुपये पर बंद हुआ, जो पिछले कई वर्षों की सबसे बड़ी एकदिनीय गिरावट है।
इसी तरह गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया के शेयर में 17.17% की भारी गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों में इस बात को लेकर चिंता है कि कीमतों में 15-20% की बढ़ोतरी के बिना कंपनियां इस टैक्स बोझ को नहीं सह पाएंगी, जिससे वॉल्यूम पर नकारात्मक असर पड़ेगा और अवैध तंबाकू व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है।
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विशेषज्ञों की राय और भविष्य की चुनौतियां
बाजार विश्लेषकों और जेफ़रीज़ जैसी संस्थाओं का मानना है कि नई टैक्स व्यवस्था से कंपनियों के मार्जिन और मांग पर दबाव बढ़ेगा। ITC के लिए चुनौती और भी बड़ी है क्योंकि उसके अन्य सेगमेंट जैसे पेपर और IT भी वर्तमान में धीमी गति से बढ़ रहे हैं।
विश्लेषक जी चोक्कलिंगम के अनुसार, ब्रिटिश अमेरिकन टोबैको (BAT) द्वारा ITC में अपनी हिस्सेदारी कम करने की संभावना से स्टॉक पर और दबाव बन सकता है।
चूंकि यह टैक्स व्यवस्था 1 फरवरी 2026 से लागू होगी, इसका वास्तविक असर मार्च तिमाही के नतीजों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। निवेशकों को फिलहाल इन शेयरों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
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