यमुना एक्सप्रेसवे हादसा: कोहरे में 10 वाहनों की टक्कर, 4 की मौत
यमुना एक्सप्रेसवे हादसा मंगलवार सुबह उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में दिल्ली-आगरा एक्सप्रेसवे पर एक भयानक मंजर लेकर आया, जहाँ कई बसों और कारों की टक्कर के बाद भीषण आग लग गई। यह दुखद घटना यमुना एक्सप्रेसवे के माइलस्टोन 127 पर हुई।
अधिकारियों ने बताया कि इलाके में घने कोहरे के कारण विजिबिलिटी बहुत कम थी, जिसके चलते यह भयावह दुर्घटना हुई। कम विजिबिलिटी के कारण पहले तीन कारों की टक्कर हुई, जिसके बाद सात बसें उनसे टकरा गईं, जिनमें से एक रोडवेज बस और बाकी छह स्लीपर बसें थीं।
इस बड़े हादसे में अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 25 लोग घायल हुए हैं। आग की भयावहता ऐसी थी कि टकराने वाले सभी वाहनों में आग लग गई।
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दुर्घटना का कारण और बचाव अभियान
यह दुर्घटना एक्सप्रेसवे के आगरा-नोएडा लेन पर माइलस्टोन 127 पर हुई। मथुरा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) श्लोक कुमार ने पत्रकारों को बताया, “यमुना एक्सप्रेसवे माइलस्टोन 127 पर एक दुर्घटना हुई। इसका कारण कम विजिबिलिटी थी। सात बसों और तीन कारों की टक्कर हुई, और इसके परिणामस्वरूप, सभी वाहनों में आग लग गई।
” सूचना मिलते ही अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और बचाव अभियान शुरू किया गया। आग बुझाने और फंसे यात्रियों को बचाने के लिए तत्काल 11 फायर टेंडर लगाए गए।
मरने वालों की संख्या और घायलों की स्थिति
दुर्घटना की गंभीरता को देखते हुए, एसएसपी श्लोक कुमार ने पुष्टि की कि अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है। एसपी मथुरा ग्रामीण, सुरेश चंद्र रावत ने भी यह जानकारी देते हुए बताया कि अब तक चार शव बरामद किए गए हैं। मरने वालों में से तीन बसों में थे, जबकि एक व्यक्ति कार में था। इस घटना में 25 लोग घायल हुए हैं।
घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। राहत की बात यह है कि एसएसपी श्लोक कुमार के अनुसार, भर्ती कराए गए 25 लोगों में से किसी की भी हालत गंभीर नहीं बताई गई है।
दमकल और पुलिस की त्वरित कार्रवाई
मथुरा के एसपी ग्रामीण, सुरेश चंद्र रावत के अनुसार, मौके पर 11 फायर टेंडर मौजूद थे। सभी बसों में आग लग गई थी, और दमकलकर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद अब आग पर काबू पा लिया है। अधिकारियों ने बताया कि वहां ऑपरेशन पूरा होने वाला है।
घायलों को बलदेव के पास के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ले जाने के लिए एक दर्जन फायर ब्रिगेड की गाड़ियाँ और 14 एम्बुलेंस मौके पर पहुंची थीं। एसपी रावत ने बताया, “बचाव कार्य जारी है।” यमुना एक्सप्रेसवे हादसा इतना बड़ा था कि दमकल की गाड़ियों को आग बुझाने में काफी समय लगा।
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चश्मदीदों का दर्दनाक बयान
इस भीषण यमुना एक्सप्रेसवे हादसा के एक चश्मदीद ने घटना के बारे में बताते हुए कहा कि वह उस समय सो रहा था जब यह हादसा हुआ। उसने बताया, “एक हादसा हुआ और करीब 3-4 बसों में आग लग गई। जब हादसा हुआ, मैं सो रहा था। बस पूरी तरह भरी हुई थी। सभी सीटें भरी हुई थीं। हादसा सुबह करीब 4 बजे हुआ।
” बस में आग लगने के बाद यात्रियों में दहशत फैल गई थी, और खबरों के मुताबिक, कई लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए बसों से भागने की कोशिश की।
एक्सप्रेसवे पर यातायात का हाल
यह दुर्घटना एक्सप्रेसवे के आगरा-नोएडा लेन पर हुई। दुर्घटनास्थल पर क्षतिग्रस्त गाड़ियां नष्ट हो गईं। अधिकारियों ने बताया कि सात बसों और तीन कारों की टक्कर हुई, और सभी वाहनों में आग लग गई, जिसके चलते एक्सप्रेसवे पर यातायात भी प्रभावित हुआ होगा। हालांकि, बचाव अभियान पूरा होने के करीब है।
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मौसम विभाग की चेतावनी और पिछले हादसे
यह दुर्घटना तब हुई है जब भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी इलाकों में घने कोहरे की स्थिति का अनुमान लगाया है। IMD ने सोमवार को अपने मौसम बुलेटिन में कहा था कि 16 और 17 दिसंबर को उत्तर प्रदेश में सुबह के शुरुआती घंटों/सुबह के समय घने कोहरे की स्थिति रहने की बहुत संभावना है, जिसमें 16 दिसंबर को उत्तर प्रदेश में बहुत घना कोहरा छाए रहने की संभावना है।
इससे पहले, सोमवार को, नूंह में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर भी एक बड़ा हादसा हुआ था, जिसमें 18 गाड़ियाँ शामिल थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, घने कोहरे की वजह से विजिबिलिटी कम हो गई थी, जिससे पहले दो ट्रकों की टक्कर हुई जो बढ़कर 20-25 गाड़ियों तक पहुंच गई।
रानियाला पाटकपुर गांव के पास दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर गाड़ियों के बड़े ढेर में कम से कम चार लोगों, जिनमें दो पुलिस अधिकारी भी शामिल थे, की मौत के एक दिन बाद यह यमुना एक्सप्रेसवे हादसा हुआ है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का निर्देश और मुआवज़ा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दुखद घटना का संज्ञान लिया है और बचाव अधिकारियों को मौके पर भेजा है। उन्होंने जान गंवाने वालों के परिवारों को 2 लाख रुपये प्रत्येक की अनुग्रह राशि देने की भी घोषणा की है, और घायलों को सर्वोत्तम संभव इलाज देने का निर्देश दिया है। जिला मजिस्ट्रेट चंद्र प्रकाश सिंह और SSP श्लोक कुमार मौके पर मौजूद थे और बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे थे।



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