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पत्रकारिता में निडर आवाज़: संकर्षण ठाकुर को श्रद्धांजलि

पत्रकारिता में निडर आवाज़

भारतीय पत्रकारिता को गहरी चोट पहुंचाते हुए वरिष्ठ पत्रकार और द टेलीग्राफ के संपादक संकर्षण ठाकुर का 63 वर्ष की आयु में निधन हो गया। सोमवार, 8 सितंबर को गुरुग्राम के एक अस्पताल में लंबी बीमारी से जूझने के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली। पत्रकारिता में निडर आवाज़ के रूप में पहचाने जाने वाले ठाकुर का जाना भारतीय मीडिया जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।

शुरुआती जीवन और शिक्षा

पटना में 1962 में जन्मे संकर्षण ठाकुर वरिष्ठ पत्रकार जनार्दन ठाकुर के बेटे थे। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सेंट जेवियर्स स्कूल, पटना से पूरी की और बाद में दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की। 1984 में ‘संडे’ पत्रिका से उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की।

चार दशक का शानदार करियर

चार दशकों से अधिक लंबे करियर में ठाकुर ने द इंडियन एक्सप्रेस, तहलका और द टेलीग्राफ जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम किया। 2004 में उन्होंने तहलका के कार्यकारी संपादक के रूप में भी भूमिका निभाई। अंततः वे द टेलीग्राफ में संपादक बने। उन्हें हमेशा मैदान में उतरकर खबरें तलाशने वाला पत्रकार माना गया।

संघर्ष और राजनीति पर गहन रिपोर्टिंग

उनका पत्रकारिता कैनवास बेहद व्यापक था। उन्होंने बिहार, कश्मीर और राष्ट्रीय राजनीति पर गहन रिपोर्टिंग की। 1999 के कारगिल युद्ध को उन्होंने नजदीक से कवर किया। जातिगत ऑनर किलिंग, पाकिस्तान और राष्ट्रीय सुरक्षा पर उनकी रिपोर्टिंग हमेशा स्पष्ट और सहानुभूतिपूर्ण रही। उनकी पत्रकारिता में निडर आवाज़ सच के साथ खड़ी रहती थी और सत्ता से बेखौफ सवाल करती थी।

पुरस्कार और सम्मान

उनके योगदान को सम्मानित करते हुए 2001 में उन्हें राजनीतिक पत्रकारिता में उत्कृष्टता के लिए प्रेम भाटिया पुरस्कार और 2003 में अप्पन मेनन फ़ेलोशिप से नवाज़ा गया। अक्टूबर 2024 तक भी वे येल विश्वविद्यालय में पॉइंटर फ़ेलो के रूप में अधिनायकवाद, लोकलुभावनवाद और लोकतंत्र पर अध्ययन कर रहे थे।

साहित्यिक योगदान

पत्रकारिता से इतर उन्होंने राजनीति और समाज पर गहन अध्ययन आधारित पुस्तकें भी लिखीं। उनकी प्रमुख रचनाओं में सबाल्टर्न साहब (लालू प्रसाद यादव की जीवनी), सिंगल मैन (नीतीश कुमार की जीवनी) और द ब्रदर्स बिहारी शामिल हैं। इन पुस्तकों ने समकालीन भारतीय राजनीति को समझने में पाठकों को नई दृष्टि दी।

कला और व्यक्तित्व

ठाकुर को चित्रकला से भी गहरा लगाव था। उनका मानना था कि लेखन और चित्रकला दोनों ही साक्षी भाव से जुड़ी विधाएं हैं। सहकर्मियों के लिए वे गर्मजोशी से भरे और युवा पत्रकारों के लिए मार्गदर्शक रहे। उनकी बेदाग ईमानदारी और संवेदनशीलता हर किसी को प्रभावित करती थी।

श्रद्धांजलि और प्रतिक्रियाएं

  • कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने उन्हें “प्रतिभाशाली लेखक और उदार भारत के मजबूत रक्षक” कहा।
  • जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उनकी निष्पक्षता और गहन पत्रकारिता की प्रशंसा की।
  • बीआरएस नेता केटी रामाराव ने उन्हें “निडर आवाज़ और प्रखर टिप्पणीकार” बताया।
  • कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने उन्हें “भारतीय राजनीति की गहरी समझ रखने वाला लेखक” कहा।
  • एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने भी उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया।

अंतिम विदाई

उनका अंतिम संस्कार लोधी रोड श्मशान घाट पर हुआ। परिवार में पत्नी सोना, बेटी जहान और बेटा आयुष्मान हैं। जीवन की अनिश्चितताओं पर उनका आखिरी लेखन आज और भी प्रासंगिक लगता है, क्योंकि सच में अब पत्रकारिता में निडर आवाज़ थम चुकी है।

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