अफ़ग़ान किशोर की जानलेवा व्हील वेल यात्रा: 1996 के दुखद हादसे की यादें
अफ़ग़ानिस्तान के कुंदुज़ शहर का रहने वाला एक 13 साल का लड़का रविवार सुबह काबुल हवाई अड्डे में घुस गया और नई दिल्ली जाने वाली KAM एयर (RQ-4401) की उड़ान के पिछले व्हील वेल में छिपने में कामयाब रहा। इस साहसिक स्टंट ने हॉलीवुड की फ़िल्मों, खासकर ‘मिशन: इम्पॉसिबल – रोग नेशन’ में टॉम क्रूज़ के स्टंट की याद दिला दी, लेकिन असल ज़िंदगी में यह जानलेवा व्हील वेल यात्रा थी।
90 मिनट की इस उड़ान के दौरान, विमान 10 किलोमीटर की ऊँचाई तक गया, जहाँ तापमान शून्य से 60 डिग्री सेल्सियस नीचे चला गया और हवा का दबाव भी लगभग नहीं था। इन जानलेवा परिस्थितियों को झेलने के बाद, विमान सुबह लगभग 10.20 बजे दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरा।
लैंडिंग के तुरंत बाद, हवाई अड्डे के कर्मचारियों ने लड़के को देखा और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को इसकी सूचना दी। CISF ने अपनी जाँच में पाया कि वह विमान के पिछले केंद्रीय लैंडिंग गियर डिब्बे में छिपा था और उसने सुरक्षा अधिकारियों को बताया कि उसने यह सब “जिज्ञासा” के कारण किया।
वह अपने साथ एक छोटा लाल रंग का ऑडियो स्पीकर भी ले गया था। विस्तृत पूछताछ के बाद, उसे शाम 4 बजे उसी विमान से वापस भेज दिया गया क्योंकि उसे कोई ख़तरा नहीं माना गया। द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, उसका इच्छित गंतव्य ईरान था, लेकिन गलती से वह दिल्ली की उड़ान में चढ़ गया। यह घटना 21 सितंबर 2025 को हुई।
जब पंजाब के दो भाइयों ने ऐसी ही कोशिश की: 1996 का दुखद अध्याय
अफ़ग़ान किशोर की यह जानलेवा व्हील वेल यात्रा 1996 की एक दुखद घटना की याद दिलाती है, जब पंजाब के दो भाइयों, प्रदीप (23) और विजय सैनी (19) ने दिल्ली से लंदन जाने वाली ब्रिटिश एयरवेज़ की उड़ान के व्हील वेल में छिपकर यूके जाने का प्रयास किया था।
वे कार मैकेनिक के रूप में अपनी ज़िंदगी से बचना चाहते थे और लंदन में अपने रिश्तेदारों के पास बेहतर जीवन की तलाश में थे। उन्हें डर था कि उन पर सिख अलगाववादियों से संबंध होने का आरोप लगाया जाएगा।
उन्होंने एक एजेंट को 150 पाउंड दिए, जिसने उन्हें यह “आसान तरीका” सुझाया और बताया कि वे व्हील वेल से लगेज कंपार्टमेंट में जा सकते हैं, जो कि एक ग़लत जानकारी थी। अक्टूबर 1996 में, अँधेरे में वे दिल्ली के रनवे पर रेंगते हुए पहुँचे और एक बोइंग 747 जंबो जेट के अंडरकैरिज में छिप गए।
10 घंटे की इस उड़ान के दौरान, उन्होंने भयावह शोर और अत्यधिक ठंड का सामना किया। प्रदीप ने द मिरर को बताया कि पहिए ऊपर आने पर बहुत गर्म हो रहे थे, लेकिन उसके तुरंत बाद तापमान -60°C तक गिर गया। वे दोनों बेहोश हो गए। विजय का शव हीथ्रो के पास 2,000 फीट नीचे ज़मीन पर गिरा, जबकि प्रदीप चमत्कारी रूप से बच गए। पायलट कैप्टन माइकल पोस्ट ने बाद में प्रदीप को बधाई दी। डॉक्टरों ने कहा कि वे शायद सस्पेंडेड एनिमिया की स्थिति में चले गए थे।
आंकड़े बताते हैं भयावह सच
अमेरिकी संघीय उड्डयन प्रशासन (FAA) के आंकड़ों के अनुसार, 1947 और 2021 के बीच 132 छिपकर यात्रा करने के प्रयास दर्ज किए गए हैं, जिनमें से ज़्यादातर मौतें हुई हैं। 1947 और 2015 के बीच 113 प्रयासों में 86 मौतें हुईं। मौत का मुख्य कारण अत्यधिक ठंड, ऑक्सीजन की कमी, गिरने या कुचले जाने से होता है। प्रदीप सैनी की तरह, बहुत कम लोग इस तरह के सफर से बच पाते हैं।
प्रदीप सैनी की कहानी: आघात और त्रासदी का मिला-जुला रूप
प्रदीप को अपने भाई की मौत का गहरा सदमा लगा। उन्होंने 1997 में मीडिया को बताया कि वे कई सालों तक बुरे सपने देखते रहे और अपने भाई का नाम पुकारते थे। उनके चाचा तरसेम सिंह बोला ने कहा, “कुछ लोग कहते हैं कि वह दुनिया का सबसे भाग्यशाली व्यक्ति है, लेकिन उसे उस पीड़ा का भी एहसास होता है जो भाग्य ने उसे दी है। फिर उसे लगता है कि काश वह भी मर गया होता।”
शरण के लिए उनकी पहली याचिका खारिज होने के बाद, ब्रिटिश नेताओं और भारतीय मूल के लोगों ने उन्हें मानवीय आधार पर निवास देने की मांग की। रिपोर्टों के अनुसार, लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, प्रदीप ब्रिटेन में बस गए और हीथ्रो हवाई अड्डे पर काम किया। अब उनकी उम्र 50 के आसपास होगी और उनका वर्तमान ठिकाना अज्ञात है।
ये दोनों घटनाएं दिखाती हैं कि कैसे हताशा और जिज्ञासा लोगों को ऐसे जानलेवा कदम उठाने के लिए मजबूर कर सकती है। अफ़ग़ान किशोर का बच जाना किसी चमत्कार से कम नहीं है, खासकर जब जानलेवा व्हील वेल यात्रा के इतिहास को देखते हैं।



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