Loading Now

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: पीयूष गोयल बोले- किसानों के हित सर्वोपरि

किसानों के हित सर्वोपरि

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक अंतरिम व्यापार ढांचे (BTA) की सराहना करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि किसानों के हित सर्वोपरि हैं और सभी व्यापार वार्ताओं में इन्हें सबसे ऊपर रखा गया है। सरकार ने छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका का हवाला देते हुए कड़ा रुख अपनाया है कि अमेरिका को कई संवेदनशील कृषि और डेयरी उत्पादों पर कोई शुल्क रियायत नहीं दी जाएगी।

शनिवार को घोषित इस ढांचे के तहत, अमेरिका भारतीय सामानों पर टैरिफ को पहले के 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा, जो हमारे सभी पड़ोसी देशों और अन्य प्रतिस्पर्धियों की तुलना में सबसे कम है। बदले में, भारत ने केवल चुनिंदा अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क कम करने पर सहमति जताई है, लेकिन मुख्य खाद्य पदार्थ रियायतों के दायरे से पूरी तरह बाहर रहेंगे।

संवेदनशील कृषि और डेयरी उत्पादों को मिली पूरी सुरक्षा

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पर साझा किया कि यह समझौता मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री, दूध, पनीर, इथेनॉल (ईंधन), तंबाकू, कुछ सब्जियों और मांस सहित संवेदनशील उत्पादों की पूरी तरह से रक्षा करता है। भारत में कृषि केवल मशीनीकरण वाली गतिविधि नहीं बल्कि 700 मिलियन लोगों की आजीविका का मुद्दा है। गोयल ने दोहराया कि किसानों के हित सर्वोपरि रखते हुए ग्रामीण आजीविका को सुरक्षित करना मोदी सरकार की प्राथमिकता है।

यही कारण है कि अनाज, फल, सब्जियां, मसाले, तिलहन, डेयरी, पोल्ट्री और मांस जैसे क्षेत्रों को किसी भी प्रकार की रियायत नहीं दी गई है। यह स्थिति भारत की अन्य व्यापार वार्ताओं जैसे यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के साथ समझौतों के अनुरूप ही है।

इसे भी पढ़े:- ओमान में ईरान-अमेरिका परमाणु कूटनीति: मस्कट वार्ता से क्या युद्ध टलेगा?

अमेरिकी टैरिफ में भारी कटौती और भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर

इस व्यापार समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाले 50 प्रतिशत के पारस्परिक टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। यह दर चीन (35%), बांग्लादेश (25%), वियतनाम (25%), ब्राजील (50%) और दक्षिण अफ्रीका (30%) जैसे देशों के मुकाबले काफी कम है, जिससे भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में जबरदस्त बढ़त मिलेगी। पीयूष गोयल ने इसे भारत की विकास गाथा में ‘सुनहरे अक्षरों वाला दिन’ बताया।

उन्होंने कहा कि इससे भारतीय निर्यातकों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर की अमेरिकी अर्थव्यवस्था के दरवाजे खुल गए हैं। इस समझौते का मुख्य लक्ष्य दोनों देशों के बीच सालाना 500 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हासिल करना है, जिससे हर सेक्टर में उत्साह की लहर है।

इन भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में लगेगा ‘ज़ीरो टैरिफ’

व्यापार समझौते की बड़ी उपलब्धि यह है कि अब कई भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में शून्य ड्यूटी लगेगी। गोयल ने बताया कि रत्न, हीरे और फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट्स (लगभग 13 बिलियन डॉलर का निर्यात) अब ड्यूटी-फ्री होंगे। स्मार्टफोन पर भी ज़ीरो ड्यूटी जारी रहेगी। कृषि क्षेत्र में भी भारत ने बाजी पलट दी है; अब मसाले, चाय, कॉफी, नारियल तेल, वनस्पति मोम, सुपारी, ब्राजील नट, काजू और शाहबलूत जैसे उत्पादों पर अमेरिका में शून्य पारस्परिक टैरिफ लगेगा।

इसके अलावा ताजे और प्रोसेस्ड फल जैसे आम, केला, अमरूद, कीवी, पपीता, अनानास, एवोकाडो और मशरूम के साथ-साथ बेकरी उत्पाद, तिलहन और खसखस भी बिना किसी अतिरिक्त ड्यूटी के अमेरिकी बाजार में प्रवेश करेंगे।

इसे भी पढ़े:- किसानों के साथ विश्वासघात: भारत-अमेरिका व्यापार डील का सच

आत्मनिर्भर भारत की रेड लाइन: डेयरी और मुख्य फसलों पर कोई छूट नहीं

वाणिज्य मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जनता को आश्वस्त किया कि जिन उत्पादों में भारत “आत्मनिर्भर” है, उन्हें इस डील से पूरी तरह बाहर रखा गया है। उन्होंने साफ किया कि भारत ने अमेरिका को किसी भी डेयरी उत्पाद, चीनी, या बाजरा पर कोई ड्यूटी में छूट नहीं दी है। इसके साथ ही भारत में किसी भी जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) उत्पादों के आयात की अनुमति नहीं दी जाएगी।

भारत आने वाले गेहूं, मक्का, चावल, बाजरा, रागी, काबुली चना, मांस और पोल्ट्री पर कोई राहत नहीं दी गई है। बहुतायत में उगाए जाने वाले फल जैसे केले और खट्टे फलों को भी सुरक्षित रखा गया है ताकि घरेलू कीमतों और किसानों की आय पर कोई बुरा प्रभाव न पड़े।

अमेरिकी उत्पादों के लिए चुनिंदा बाज़ार पहुंच और कोटा-आधारित रियायतें

संयुक्त बयान के अनुसार, भारत कुछ विशिष्ट अमेरिकी कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम करेगा, जिनमें सूखे डिस्टिलर ग्रेन (DDGS), पशु चारे के लिए लाल ज्वार, ट्री नट्स, सोयाबीन तेल, और चुनिंदा वाइन व स्पिरिट शामिल हैं। अमेरिका से आने वाले सेब पर कोटा-आधारित ड्यूटी में छूट दी गई है, लेकिन इसके लिए न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) 80 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया गया है ताकि स्थानीय उत्पादक सुरक्षित रहें।

अमेरिका ने 2024 में भारत को 1.6 बिलियन डॉलर का कृषि निर्यात किया था, जिसमें मुख्य रूप से बादाम, पिस्ता और सेब शामिल थे। भारत ने बहुत ही सावधानी से इन क्षेत्रों को खोला है ताकि किसानों के हित सर्वोपरि बने रहें और घरेलू बाजार में संतुलन बना रहे।

इसे भी पढ़े:- “किसानों के साथ विश्वासघात”क्या भारत-अमेरिका डील है जानिए कड़वा सच

हाई-टेक सेक्टर और एडवांस टेक्नोलॉजी में भारत की छलांग

इस समझौते का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू एडवांस्ड टेक्नोलॉजी सेक्टर है। भारत को अब अमेरिका से ज़रूरी ICT प्रोडक्ट्स, जिनमें NVIDIA चिप्स, AI इक्विपमेंट और डेटा सेंटर कंपोनेंट्स शामिल हैं, आसानी से उपलब्ध होंगे। इससे भारत को वैश्विक स्तर पर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी सेक्टर में मुकाबला करने में मदद मिलेगी।

साथ ही, भारतीय निर्यातकों को कुछ ऑटो और विमान के पुर्जों में अमेरिका के भीतर ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा। जेनेरिक दवाओं और मशीनरी के पुर्जों को भी इस रियायत का लाभ मिलेगा। पीयूष गोयल ने कहा कि यह डील भारत की अर्थव्यवस्था को तेज़ी से आगे बढ़ाने और 2047 तक विकसित भारत की यात्रा में एक मील का पत्थर साबित होगी।

निर्यात लक्ष्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दूरगामी प्रभाव

भारत सरकार ने अगले चार सालों में कृषि, समुद्री और खाद्य उत्पादों के कुल निर्यात को 100 बिलियन डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है। वित्त वर्ष 2025 में कृषि निर्यात पहले ही 51 बिलियन डॉलर को पार कर चुका है। रेशम उत्पादों, हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्रों को भी ज़ीरो ड्यूटी का लाभ मिलेगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और युवाओं के लिए लाखों नए रोज़गार पैदा होंगे।

पीयूष गोयल ने दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच शुरू हुई यह बातचीत एक बड़ी सफलता है। अंततः, यह स्पष्ट है कि इस पूरे समझौते में भारत ने अपनी व्यापारिक मजबूती दिखाई है और यह सुनिश्चित किया है कि वैश्विक व्यापार की होड़ में भारतीय किसानों के हित सर्वोपरि रहें।

इसे भी पढ़े:- टैरिफ का मायाजाल: क्या भारत-अमेरिका डील बड़ा धोखा है?

Spread the love

Post Comment

You May Have Missed