RSS के शताब्दी कार्यक्रम में पहुंचे सलमान खान, मोहन भागवत का भाषण सुना
RSS के शताब्दी कार्यक्रम में शनिवार, 7 फरवरी को मुंबई के नेहरू सेंटर में एक अलग ही नजारा देखने को मिला, जब बॉलीवुड स्टार सलमान खान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के भाषण को बेहद ध्यान से सुनते हुए नजर आए। यह भव्य आयोजन संगठन के शताब्दी समारोह को मनाने के लिए ‘संघ यात्रा के 100 साल: नए क्षितिज’ शीर्षक वाली दो दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला के रूप में आयोजित किया गया था।
जाने-माने फिल्म निर्माता सुभाष घई और मशहूर गीतकार, कवि व लेखक प्रसून जोशी के साथ बैठे सलमान खान ने भागवत के उन विचारों को आत्मसात किया जिसमें उन्होंने जोर दिया कि संघ बिना किसी का विरोध किए देश के लिए काम करता है। भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ का ध्यान राष्ट्रीय एकता पर है और यह बिना किसी सत्ता की चाह के निस्वार्थ भाव से सेवा करता है। जैसे ही सलमान खान वर्ली इलाके के नेहरू सेंटर पहुंचे, भीड़ में मौजूद लोगों ने अपने स्मार्टफोन से उनकी तस्वीरें खींचने की कोशिश की, जिससे कार्यक्रम की दृश्यता और सार्वजनिक रुचि और भी बढ़ गई।
शताब्दी समारोह: संवाद, चिंतन और भविष्य के नए क्षितिज
यह दो दिवसीय कार्यक्रम विशेष रूप से RSS की 100 साल की यात्रा, समाज में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका और उसके भविष्य को आकार देने वाले दृष्टिकोणों पर विचार करने के लिए डिजाइन किया गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर घोषित यह आयोजन केवल संगठनात्मक सदस्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे एक खुले मंच के रूप में पेश किया गया है।
यहाँ जनता वरिष्ठ RSS नेताओं और आमंत्रित वक्ताओं के साथ सीधे संवाद कर सकती है, उनसे सवाल पूछ सकती है और उनके विचारों को समझ सकती है। यह पहल संघ के व्यापक शताब्दी आउटरीच का एक अहम हिस्सा है, जो समाज के हर वर्ग को जोड़ने का प्रयास कर रही है। शनिवार को इस श्रृंखला का पहला दिन था, जिसकी शुरुआत शाम 4:00 बजे मोहन भागवत के संबोधन से हुई और दूसरा सत्र शाम 6:15 बजे आयोजित किया गया।
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दुनिया भर में संघ की अद्वितीय पहचान और वैश्विक प्रासंगिकता
सभा को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने गर्व के साथ बताया कि कैसे संगठन के काम को अब भारत की सीमाओं के पार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। उन्होंने कहा कि संघ का काम वास्तव में अद्वितीय है और अब वे इसे प्रत्यक्ष रूप से अनुभव कर रहे हैं क्योंकि दुनिया के पांचों महाद्वीपों से लोग इसकी गतिविधियों का अध्ययन करने भारत आते हैं।
चाहे वे अफ्रीका, यूरोप, अमेरिका, दक्षिण पूर्व एशिया या मध्य पूर्व से हों, हर किसी का एक ही सवाल होता है कि यह तरीका युवा पीढ़ी के लिए इतना प्रासंगिक कैसे है। भागवत ने रेखांकित किया कि अखिल भारतीय स्तर पर ऐसा विशाल प्रयास शायद गौतम बुद्ध के बाद पहली बार देखा जा रहा है। दुनिया भर के लोग संघ के चरित्र को देख रहे हैं और उससे सीख रहे हैं।
प्रतिस्पर्धा नहीं, राष्ट्र निर्माण का संकल्प है आधार
मोहन भागवत ने संघ के इरादे और आत्म-धारणा को स्पष्ट करते हुए कहा कि RSS के शताब्दी कार्यक्रम के माध्यम से वे एक बार फिर दुनिया को बता रहे हैं कि संघ क्या है। उन्होंने जोर दिया कि संघ का गठन किसी अन्य संगठन के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए नहीं हुआ था, और न ही इसे किसी खास राजनीतिक स्थिति की प्रतिक्रिया के रूप में बनाया गया था।
संघ का काम किसी का विरोध किए बिना निरंतर चलता रहता है क्योंकि इसका मुख्य उद्देश्य स्वयं के लिए नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र और भारत के उत्थान के लिए है। भागवत के अनुसार, संघ न तो लोकप्रियता की आकांक्षा रखता है और न ही उसे सत्ता की कोई भूख है। यह केवल सही काम और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की शक्ति को सक्रिय करने में विश्वास रखता है।
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‘हिंदू’ संज्ञा नहीं बल्कि एक विशेषण है: भागवत का नया विमर्श
व्याख्यानमाला के दौरान एक महत्वपूर्ण वैचारिक बिंदु साझा करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि ‘हिंदू’ कोई संज्ञा नहीं बल्कि एक विशेषण है। उन्होंने बाइबिल की एक आयत का हवाला देते हुए शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर जोर दिया और कहा कि संगठन किसी को “नष्ट करने नहीं, बल्कि पूरा करने” आया है।
उनके अनुसार, हिंदू दुनिया के ‘अग्रज’ यानी बड़े भाई हैं और भारतीय परंपरा दूसरों से दबंगई करने या दादागिरी दिखाने में नहीं, बल्कि अपने आचरण और चरित्र से दुनिया को सिखाने में निहित है। उन्होंने सामाजिक सद्भाव और एकता पर संघ के फोकस को दोहराते हुए कहा कि हमें एक-दूसरे का साथ देकर सकारात्मक शक्ति को सक्रिय करने की जरूरत है।
कला और मनोरंजन जगत के साथ संघ का बढ़ता जुड़ाव
इस कार्यक्रम में सलमान खान, सुभाष घई और प्रसून जोशी की उपस्थिति ने संघ के उस प्रयास को उजागर किया, जिसके तहत वह कला और मनोरंजन क्षेत्र की हस्तियों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहा है। RSS के शताब्दी कार्यक्रम के मंच पर इन सितारों की मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि संघ का शताब्दी आउटरीच अब केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं है।
सलमान खान का भागवत के भाषण को गहराई से सुनना और कला जगत के दिग्गजों का वहां मौजूद होना यह दर्शाता है कि संघ के भविष्य के विचारों में समाज के हर रचनात्मक पहलू को शामिल किया जा रहा है। रविवार को भी यह लेक्चर सीरीज जारी रहेगी, जिसमें और अधिक चर्चाएं और जनता के साथ संवाद होने की उम्मीद है।
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सेवा की भावना ही भारत का वास्तविक धर्म और स्वभाव
अपने संबोधन के दौरान भागवत ने भारत की परिभाषा को भौगोलिक सीमाओं से ऊपर बताया। उन्होंने कहा कि भारत केवल एक जमीन का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह सेवा, कर्म और सामूहिक कल्याण की भावना का जीवंत प्रतीक है। दूसरों की सेवा करना ही भारत का असली धर्म है और यह हमारे स्वभाव में निहित है।
उन्होंने लेपा गांव के एक कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि सेवा इंसान के मन को शुद्ध करती है और सच्ची खुशी बाहर की वस्तुओं में नहीं बल्कि इंसान के अंदर होती है। दूसरों के दुख को नजरअंदाज करके सुख भोगना मानवीय संवेदनाओं के खिलाफ है, और समाज के दर्द को कम करना ही भारत का वह स्वाभाविक गुण है जिसके आधार पर उसने दुनिया को धर्म का संदेश दिया।
शताब्दी वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक मंच
जैसे-जैसे RSS के शताब्दी कार्यक्रम का दूसरा दिन आगे बढ़ रहा है, यह मुंबई व्याख्यानमाला संघ के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित सबसे प्रभावशाली सार्वजनिक कार्यक्रमों में से एक बन गई है। संवाद और चिंतन पर आधारित यह श्रृंखला संगठन के भविष्य के दृष्टिकोण को आम जनता के सामने रख रही है।
मोहन भागवत का यह स्पष्ट संदेश कि संघ किसी के विरोध में नहीं बल्कि भारत के लिए है, उन सभी आशंकाओं को दूर करने का प्रयास है जो अक्सर संगठन के प्रति व्यक्त की जाती हैं। संवाद की यह खुली संस्कृति और गणमान्य हस्तियों की भागीदारी इस शताब्दी वर्ष को ऐतिहासिक बना रही है।
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