बंदी भगीरथ POCSO केस केंद्रीय मंत्री बंदी संजय के बेटे सरेंडर
बंदी भगीरथ POCSO केस तेलंगाना की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार के बेटे बंदी भगीरथ ने एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न से जुड़े गंभीर POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) मामले में आखिरकार साइबराबाद पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया है।
यह कदम तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा भगीरथ को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा देने से साफ इनकार करने और पुलिस द्वारा देश छोड़ने से रोकने के लिए जारी ‘लुक-आउट सर्कुलर’ (LOC) के बाद उठाया गया।
इस मामले ने उस वक्त बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया जब तेलंगाना रक्षा सेना (TRS) की प्रमुख के. कविता ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बंदी संजय कुमार को उनके केंद्रीय मंत्री पद से तुरंत बर्खास्त करने की मांग कर दी।
क्या है पूरा मामला और FIR के गंभीर आरोप?
यह पूरा विवाद पेटबशीराबाद पुलिस स्टेशन में दर्ज एक FIR से जुड़ा है, जो 8 मई को पीड़िता की मां की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी। शिकायत के अनुसार, बंदी भगीरथ ने जून 2025 में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (इंस्टाग्राम और स्नैपचैट) के जरिए नाबालिग लड़की से दोस्ती की और बाद में शादी का झांसा देकर उसके साथ संबंध बनाए।
आरोप है कि अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच आरोपी ने लड़की के साथ अनुचित शारीरिक हरकतें कीं और उस पर शराब पीने का दबाव भी बनाया।
7 जनवरी को रिश्ता टूटने के बाद, मानसिक तनाव में आकर पीड़िता ने दो बार खुद को नुकसान पहुँचाने (आत्महत्या) की कोशिश की। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74 और 75 (यौन उत्पीड़न और मानहानि) के साथ-साथ POCSO अधिनियम की सख्त धारा 11 और 12 के तहत मामला दर्ज किया है।
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पलटवार: बंदी भगीरथ का 5 करोड़ रुपये की ब्लैकमेलिंग का दावा
इस मामले में एक नया मोड़ तब आया जब बंदी भगीरथ की ओर से भी लड़की के परिवार के खिलाफ एक जवाबी आपराधिक शिकायत दर्ज कराई गई।
करीमनगर-II टाउन पुलिस स्टेशन में दर्ज इस FIR में भगीरथ ने आरोप लगाया है कि लड़की का परिवार पूरी तरह भरोसेमंद बनकर उन्हें पारिवारिक कार्यक्रमों में बुलाता था। बाद में उन्होंने शादी का दबाव बनाया और इनकार करने पर झूठे केस में फंसाने की धमकी दी।
भगीरथ का दावा है कि उन्होंने डर के मारे पहले लड़की के पिता को ₹50,000 दिए थे, लेकिन बाद में परिवार ने अपनी मांग बढ़ाकर सीधे ₹5 करोड़ कर दी। भगीरथ के अनुसार, लड़की के माता-पिता ने धमकी दी थी कि अगर पैसे नहीं दिए गए, तो उसकी मां आत्महत्या कर लेगी और इसका इल्जाम मंत्री के बेटे पर लगा दिया जाएगा।
के. कविता की PM को चिट्ठी: ‘हितों के टकराव’ का मुद्दा
जैसे ही केंद्रीय मंत्री के बेटे पर पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई तेज हुई, विपक्ष हमलावर हो गया। TRS प्रमुख के. कविता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखी अपनी चिट्ठी में सीधे तौर पर ‘हितों के टकराव’ (Conflict of Interest) का संवैधानिक मुद्दा उठाया।
उन्होंने लिखा कि बंदी संजय देश के गृह राज्य मंत्री हैं, और गृह मंत्रालय ही देश की तमाम कानून प्रवर्तन एजेंसियों और पुलिस व्यवस्था पर प्रशासनिक प्रभाव रखता है।
कविता ने मीडिया से बात करते हुए कहा:
“जब तक आरोपी का पिता इतने शक्तिशाली और प्रभावसाली पद पर रहेगा, तब तक तेलंगाना की महिलाओं और जनता को यह विश्वास नहीं होगा कि इस मामले की कोई निष्पक्ष, स्वतंत्र या पारदर्शी जांच हो पाएगी। पुलिस प्रक्रियाओं, सबूतों को जुटाने और गवाहों की सुरक्षा पर किसी भी तरह का प्रशासनिक दबाव न पड़े, इसके लिए बंदी संजय को उनके पद से तुरंत हटाया जाना चाहिए।”
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“कानून की नज़र में सब बराबर”: केंद्रीय मंत्री बंदी संजय
बेटे के आत्मसमर्पण के बाद केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर एक विस्तृत बयान जारी कर अपना पक्ष रखा। उन्होंने ‘सत्यमेव जयते’ लिखते हुए कहा कि वह देश की न्यायपालिका और कानून का पूरा सम्मान करते हैं।
मंत्री ने कहा, “चाहे मेरा अपना बेटा हो या कोई आम नागरिक, कानून की नज़र में हर कोई बराबर है। मेरे बेटे ने शुरू से यही कहा है कि वह बेगुनाह है। हमारे कानूनी विशेषज्ञों की राय थी कि यह झूठा मामला रद्द हो जाएगा और अग्रिम जमानत मिल जाएगी, जिसके कारण पुलिस के सामने पेश होने में थोड़ी देरी हुई।
हालांकि, मैं चाहता हूं कि जांच में पूरा सहयोग मिले, इसलिए मैंने खुद पहल कर वकीलों के माध्यम से उसे पुलिस को सौंपा है। हमें देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है।”
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राजनीतिक और कानूनी विश्लेषकों का नजरिया
एक वरिष्ठ पत्रकार के दृष्टिकोण से देखें, तो यह मामला केवल एक पारिवारिक विवाद या आपराधिक शिकायत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह तेलंगाना में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच एक बड़ा राजनीतिक हथियार बन चुका है। पॉक्सो एक्ट जैसे संवेदनशील मामलों में कानून बेहद कड़ा है, जहाँ आरोपी को खुद को बेगुनाह साबित करना होता है।
दूसरी तरफ, 5 करोड़ की रंगदारी के दावों ने इस मामले को और अधिक पेचीदा बना दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रधानमंत्री कार्यालय विपक्ष के इस प्रशासनिक दबाव पर कोई संज्ञान लेता है या पुलिस जांच के नतीजों का इंतजार करता है।बड़ा खुलासा: बंदी भगीरथ POCSO केस, बंदी भगीरथ POCSO केस में सख्त कार्रवाई
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