“महाराष्ट्र वोटर लिस्ट संशोधन”साफ करने की तैयारी:कट सकते हैं 1 करोड़ नाम,
महाराष्ट्र वोटर लिस्ट संशोधन महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले दिनों में एक बड़ा प्रशासनिक और गणितीय भूचाल आने वाला है। भारत निर्वाचन आयोग (EC) द्वारा आगामी 30 जून से राज्य में शुरू किए जा रहे ‘विशेष गहन संशोधन’ (SIR) के कारण चुनावी सूचियों से लगभग 8% से 12% मतदाताओं के नाम काटे जाने की संभावना है।
सरकारी आंकड़ों और अनुमानों के मुताबिक, राज्य के कुल 9.88 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से करीब 90 लाख से 1 करोड़ नाम हटाए जा सकते हैं।
इस प्रशासनिक कदम ने राज्य के राजनीतिक दलों, विशेषकर विपक्ष के कान खड़े कर दिए हैं, जो इसे समाज के कमजोर और अल्पसंख्यक वर्गों को चुनावी प्रक्रिया से बाहर करने के संभावित खतरे के रूप में देख रहे हैं।
शहरीकरण और ‘फ्लोटिंग आबादी’ बनी मुख्य वजह
चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, आखिरी बार इस तरह का गहन और व्यापक संशोधन साल 2002 में किया गया था। पिछले 24 सालों में मुंबई, मुंबई उपनगरीय, ठाणे, नवी मुंबई, पुणे और नासिक जैसे बड़े महानगरीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर शहरीकरण, पुरानी इमारतों का पुनर्विकास और रोजगार के लिए आंतरिक पलायन हुआ है।
इस वजह से एक बहुत बड़ी ‘फ्लोटिंग आबादी’ (अस्थायी रूप से रहने वाले लोग) पैदा हुई है, जिन्होंने अपने पैतृक गाँव (जैसे कोंकण या पश्चिमी महाराष्ट्र) और अपनी कार्यस्थल (मुंबई या ठाणे) दोनों ही जगहों पर वोटर आईडी कार्ड बनवा रखे हैं।
इसके अतिरिक्त, पिछले साल स्थानीय निकाय चुनावों में व्यस्तता के कारण वार्षिक ‘स्पेशल समरी रिवीजन’ (SSR) न हो पाने की वजह से मृत और स्थायी रूप से पलायन कर चुके लोगों के नाम सूची से हटाए नहीं जा सके, जिससे यह संख्या जरूरत से ज्यादा बढ़ गई है।
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आंकड़ों का गणित: क्यों जरूरी है यह सफाई?
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जनसांख्यिकीय आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि महाराष्ट्र की कुल अनुमानित आबादी लगभग 12.9 करोड़ है। सामान्य नियमों के अनुसार, किसी भी क्षेत्र में वयस्क (18+) आबादी कुल जनसंख्या का लगभग 70% होती है। इस लिहाज से राज्य में वास्तविक मतदाताओं की संख्या 9.1 करोड़ से अधिक नहीं होनी चाहिए।
लेकिन वर्तमान में यह आंकड़ा 9.88 करोड़ को पार कर चुका है, जो साफ तौर पर लाखों डुप्लीकेट और मृत मतदाताओं की मौजूदगी की ओर इशारा करता है। अकेले मुंबई शहर के भीतर ही लगभग 11% डुप्लीकेट वोटरों के होने का अनुमान है।
विपक्ष की चिंता: “बिहार और बंगाल जैसे हालात न हों”
इस बीच, चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी और रणनीति बनाने का दौर शुरू हो गया है। समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख ने महा विकास अघाड़ी (MVA) के शीर्ष नेताओं—हर्षवर्धन सपकाल (कांग्रेस), संजय राउत (शिवसेना-UBT) और शशिकांत शिंदे (NCP-SP) को पत्र लिखकर तुरंत एक ‘राज्य-स्तरीय टास्क फोर्स’ बनाने की मांग की है।
शेख ने गंभीर आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि इससे पहले बिहार और पश्चिम बंगाल में भी इसी तरह की सूचियों के संशोधन के नाम पर क्रमशः 68 लाख और 91 लाख मतदाताओं के नाम काट दिए गए थे, जिनमें सबसे बड़ी संख्या आदिवासियों, दलितों और अल्पसंख्यकों की थी।
विपक्ष का मानना है कि अगर इस प्रक्रिया की बारीकी से निगरानी नहीं की गई, तो झुग्गियों और चालों में रहने वाले गरीब मतदाता अपने लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित हो सकते हैं।
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30 जून से शुरू होगा घर-घर सर्वे: क्या हैं चुनौतियां?
इस विशेष अभियान के तहत 30 जून से 29 जुलाई के बीच बूथ स्तर के अधिकारी (BLOs) घर-घर जाकर भौतिक रूप से मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। यह एक बेहद जटिल और समय-सीमा के भीतर पूरी होने वाली प्रक्रिया है।
मुंबादेवी से कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने भी मतदाताओं को आगाह किया है कि वे इस अवधि के दौरान सतर्क रहें और यह सुनिश्चित करें कि किसी तकनीकी या प्रशासनिक चूक के कारण उनका नाम सूची से न गायब हो जाए।
हालाँकि, इस प्रक्रिया का एक सकारात्मक पहलू यह भी है कि पिछले साल पंजीकरण न करा पाने वाले लाखों युवा और नए मतदाता इस बार बड़े पैमाने पर चुनावी सूची में शामिल हो सकेंगे।
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संपादकीय दृष्टिकोण: चुनावी पारदर्शिता और नागरिक जिम्मेदारी का संतुलन
एक वरिष्ठ पत्रकार के नाते हमारा मानना है कि लोकतंत्र की शुचिता के लिए मतदाता सूची का पारदर्शी और त्रुटिहीन होना अनिवार्य है। फर्जी या डुप्लीकेट वोटिंग किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र के लिए दीमक की तरह है।
लेकिन, इस ‘महा-सफाई’ के दौरान चुनाव आयोग और जिला प्रशासनों को यह सुनिश्चित करना होगा कि एक भी वैध और गरीब नागरिक कागजी उलझनों या अधिकारियों की लापरवाही के कारण सूची से बाहर न हो।
राजनीतिक दलों को केवल बयानबाजी करने के बजाय अपने ‘बूथ स्तर के एजेंटों’ (BLAs) को प्रशिक्षित करना चाहिए ताकि वे घर-घर जाने वाले सरकारी अमले के साथ मिलकर काम कर सकें और इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। ऑनलाइन घर बैठे करें महाराष्ट्र वोटर लिस्ट संशोधन । शुरू हुआ महाराष्ट्र वोटर लिस्ट संशोधन ।
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