“केरल मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण” वी. डी. सतीशन ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ
केरल मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण दक्षिण भारत के राजनीतिक परिदृश्य में आज एक नया इतिहास रच गया। केरल में पिछले दस साल से काबिज वामपंथी लोकतांत्रिक मोर्चे (LDF) को उखाड़ फेंकने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कुशल रणनीतिकार वी. डी. सतीशन (61) ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के तौर पर कमान संभाल ली है।
तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में आयोजित एक भव्य और हाई-प्रोफाइल समारोह में केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने सतीशन और उनके साथ 20 मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
केरल के संसदीय इतिहास में पिछले 60 वर्षों (छह दशकों) में यह पहला मौका है जब पूरी की पूरी कैबिनेट एक ही दिन और एक ही समय पर शपथ ग्रहण के मंच पर उतरी। इस ऐतिहासिक जीत और सत्ता परिवर्तन को देखने के लिए पूरे राज्य से हजारों की संख्या में यूडीएफ समर्थक राजधानी पहुंचे, जिससे सेंट्रल स्टेडियम और आस-पास के इलाके कांग्रेस के झंडों से पट गए।
सतीशन का उदय: विपक्ष के नेता से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक
61 वर्षीय वी. डी. सतीशन साल 2001 से परावुर विधानसभा सीट से लगातार विधायक चुने जा रहे हैं, लेकिन यह पहली बार है जब वे कोई सरकारी या कैबिनेट पद संभाल रहे हैं और सीधे राज्य के सर्वोच्च पद पर आसीन हुए हैं। पिछले पांच वर्षों के दौरान केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) के रूप में उनके आक्रामक और तथ्य-आधारित प्रदर्शन ने पिनाराई विजयन सरकार को बैकफुट पर धकेल दिया था।
सतीशन ने विजयन सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान लगे भ्रष्टाचार के आरोपों, चरमराती कानून-व्यवस्था और राज्य के गहरे आर्थिक संकट को जनता के बीच इस तरह उठाया कि वामपंथ का अभेद्य किला ढह गया। कांग्रेस आलाकमान ने जमीनी स्तर पर संगठन को पुनर्जीवित करने के उनके इसी योगदान को देखते हुए मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे चल रहे पूर्व मंत्री रमेश चेन्निथला पर सतीशन को प्राथमिकता दी।
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सोशल इंजीनियरिंग पर टिकी यूडीएफ कैबिनेट: गुटबाजी से साफ इनकार
मंत्रिमंडल के गठन के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने कहा कि नई कैबिनेट का ढांचा सामाजिक वास्तविकताओं और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने माना कि चूंकि पार्टी और सहयोगियों के पास कैबिनेट में केवल 21 सीटें (1 मुख्यमंत्री + 20 मंत्री) थीं, इसलिए कई बेहद योग्य और अनुभवी विधायकों को इस बार मौका नहीं दिया जा सका।
कैबिनेट के सामाजिक समीकरणों की बात करें तो इसमें दो महिला मंत्रियों को शामिल किया गया है, जबकि शनिमोल उस्मान को विधानसभा का डिप्टी स्पीकर मनोनीत किया गया है। इसके अलावा, अनुसूचित जाति (SC) समुदाय से दो सदस्यों को कैबिनेट रैंक दी गई है। जब सतीशन से यह पूछा गया कि क्या मंत्रियों का चयन कांग्रेस के पारंपरिक गुटों (A और I ग्रुप) के दबाव में हुआ है, तो उन्होंने स्पष्ट किया:
“यह सूची महज 10 मिनट के भीतर आम सहमति से तैयार की गई थी। कांग्रेस में अब कोई गुटबाजी नहीं है। शिवगिरी मठ के संत हमें आशीर्वाद देने जरूर आए थे, लेकिन उन्होंने पिछड़े या एझावा समुदाय के लिए मंत्रियों की कोई सूची नहीं सौंपी। इस बार कैबिनेट में एझावा समुदाय का प्रतिनिधित्व पहले से बेहतर है। वैसे भी, स्वयं मुख्यमंत्री से बड़ा श्री नारायण गुरु का अनुयायी और कौन हो सकता है?”
दिग्गजों और नए चेहरों का अनूठा संतुलन: 14 मंत्री पहली बार
रविवार को लोक भवन में राज्यपाल को सौंपी गई 20 मंत्रियों की सूची में अनुभव और युवा जोश का एक बेहतरीन तालमेल देखने को मिल रहा है। इस मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री सतीशन सहित 14 नए चेहरों को जगह मिली है। पुराने और अनुभवी चेहरों में पूर्व गृह मंत्री रमेश चेन्निथला, के. मुरलीधरन, ए. पी. अनिल कुमार और केपीसीसी (KPCC) प्रमुख सन्नी जोसेफ शामिल हैं।
सहयोगी दलों में से इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के कद्दावर नेता पी. के. कुन्हालीकुट्टी, आरएसपी (RSP) के शिबू बेबी जॉन, केरल कांग्रेस के मॉन्स जोसेफ और केरल कांग्रेस (जैकब) के अनूप जैकब जैसे पुराने दिग्गजों को फिर से मंत्री पद मिला है।
वहीं, पहली बार मंत्री बनने वाले नए चेहरों में सी. पी. जॉन, आईयूएमएल के एन. शमसुद्दीन, के. एम. शाजी, पी. सी. विष्णुनाथ, रोजी एम. जॉन, बिंदु कृष्णा और टी. सिद्दीकी प्रमुख हैं। मुख्य सचेतक (Chief Whip) का पद केरल कांग्रेस के लिए आरक्षित रखा गया है, जिसके नाम का एलान पी. जे. जोसेफ करेंगे।
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शपथ ग्रहण में उमड़ा विपक्षी कुनबा: दक्षिण में मजबूत हुई कांग्रेस
इस मेगा इवेंट को कांग्रेस ने एक बड़े राष्ट्रीय शक्ति प्रदर्शन में बदल दिया। समारोह में हिस्सा लेने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा विशेष तौर पर तिरुवनंतपुरम पहुंचे।
इनके अलावा पड़ोसी राज्यों के मुख्यमंत्रियों—कर्नाटक के सिद्धारमैया, तेलंगाना के रेवंत रेड्डी, हिमाचल प्रदेश के सुखविंदर सिंह सुक्खू और कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने भी मंच की शोभा बढ़ाई।
कर्नाटक और तेलंगाना के बाद अब केरल में मिली इस बंपर जीत के साथ ही कांग्रेस ने दक्षिण भारत के तीन प्रमुख राज्यों में अपना झंडा गाड़ दिया है। गरिमा की मिसाल पेश करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और माकपा (CPI-M) के दिग्गज नेता पिनाराई विजयन, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर और भाकपा (CPI) के प्रदेश सचिव बिनॉय विश्वम भी इस समारोह के साक्षी बने।
जनादेश का गणित और कैबिनेट के सामने ‘पांच गारंटियों’ की चुनौती
बता दें कि 140 सदस्यों वाली केरल विधानसभा के लिए 9 अप्रैल को मतदान हुआ था, जिसके परिणाम 4 मई को घोषित किए गए। इस चुनाव में यूडीएफ (UDF) ने 102 सीटों पर बंपर जीत दर्ज की (जिसमें अकेले कांग्रेस ने 63 और आईयूएमएल ने 22 सीटें जीतीं)। वहीं सत्ताधारी एलडीएफ महज 35 सीटों पर सिमट गया, जबकि भाजपा को 3 सीटें मिलीं। युवाओं और आम जनता ने बदलाव के लिए एकतरफा वोट किया।
शपथ ग्रहण के ठीक बाद ‘लोक भवन’ में नवनिवुक्त कैबिनेट की पहली बैठक बुलाई गई है, जिसमें आगामी विधानसभा सत्र (जो 21 मई से शुरू होने की संभावना है) की रूपरेखा तय होगी। हालांकि, इस नई सरकार के सामने सबसे बड़ी परीक्षा चुनाव के दौरान दी गई ‘5 मुख्य गारंटियों‘ को लागू करने की है, जिसमें शामिल हैं:
महिलाओं के लिए केएसआरटीसी (KSRTC) बसों में मुफ्त सफर।कॉलेज जाने वाली छात्राओं को हर महीने 1,000 रुपये का वजीफा।सामाजिक कल्याण पेंशन को बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति माह करना।हर परिवार के लिए 25 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा।युवा उद्यमियों को व्यवसाय शुरू करने के लिए 5 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण।
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संपादकीय दृष्टिकोण:
केरल की जनता ने यूडीएफ को ऐतिहासिक और स्पष्ट बहुमत देकर सत्ता की चाबी सौंपी है, जो यह दर्शाती है कि लोग वामपंथी सरकार की नीतियों से ऊब चुके थे। वी. डी. सतीशन के रूप में राज्य को एक पढ़ा-लिखा, साफ-सुथरी छवि वाला और आक्रामक विजन रखने वाला मुख्यमंत्री मिला है।
लेकिन सतीशन की राह कांटों भरी है; केरल इस समय भीषण कर्ज और वित्तीय संकट से जूझ रहा है। ऐसे खाली खजाने के बीच अपनी पांच लोक-लुभावन गारंटियों को आर्थिक संतुलन बिगाड़े बिना लागू करना नए मुख्यमंत्री के लिए सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा होगी। केरल मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण: जानें कौन-कौन होंगे केरल मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण में शामिल
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