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 “भारत नॉर्डिक शिखर सम्मेलन” ओस्लो में कूटनीति का नया अध्याय,

भारत नॉर्डिक शिखर सम्मेलन

उत्तरी यूरोप के सबसे शक्तिशाली और तकनीक-संपन्न देशों के संगठन ‘नॉर्डिक ब्लॉक’ और भारत के बीच रणनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में तीसरे ‘भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन’ में हिस्सा लिया।

वर्ष 2018 में स्टॉकहोम और 2022 में कोपेनहेगन में हुए सफल सम्मेलनों के बाद आयोजित यह तीसरी उच्च-स्तरीय बैठक भारत और इस क्षेत्र के बीच आर्थिक व भू-राजनीतिक जुड़ाव के एक नए युग का सूत्रपात है।

तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 1983 की यात्रा के 43 वर्ष बाद किसी भारतीय राष्ट्रप्रमुख की इस नॉर्डिक धरती पर यह पहली उपस्थिति है, जो वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक प्रासंगिकता को दर्शाती है।

इस शिखर सम्मेलन में भारत के साथ पांच नॉर्डिक देशों के प्रधानमंत्रियों—आइसलैंड की क्रिस्ट्रुन फ्रॉस्टाडॉटिर, नॉर्वे के जोनास गहर स्टोर, स्वीडन के उल्फ क्रिस्टर्सन, फिनलैंड के पेटेरी ओर्पो और डेनमार्क की मेटे फ्रेडरिकसेन ने हिस्सा लिया।

सस्टेनेबिलिटी, स्वच्छ ऊर्जा, उभरती प्रौद्योगिकियों और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों जैसे गंभीर विषयों पर केंद्रित इस बैठक में भविष्य के टिकाऊ विकास के लिए एक व्यापक बहुपक्षीय रोडमैप तैयार किया गया।

आतंकवाद पर दोटूक: ‘नो कॉम्प्रोमाइज, नो डबल स्टैंडर्ड’

शिखर सम्मेलन के सबसे महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक मोड़ पर प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद और वैश्विक युद्धों को लेकर भारत के सैद्धांतिक और कड़े रुख को दुनिया के सामने रखा।

रूस-यूक्रेन संकट और इजरायल-हमास संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया में उपजे गंभीर भू-राजनीतिक तनावों के बीच पीएम मोदी ने नॉर्डिक नेताओं को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि भारत हमेशा शांति और कूटनीति का पक्षधर रहा है।

वैश्विक सुरक्षा के मोर्चे पर आतंकवाद की पुरजोर भर्त्सना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा:

“आतंकवाद पर भारत का दृष्टिकोण पूरी तरह स्पष्ट, अडिग और एक जैसा है—इसमें किसी भी तरह का कोई समझौता नहीं हो सकता और न ही वैश्विक समुदाय इसमें किसी दोहरे मापदंड (Double Standards) को अपना सकता है।

चाहे यूक्रेन का मैदान हो या पश्चिम एशिया के अशांत इलाके, भारत हर उस प्रयास का समर्थन करता है जो संवाद के जरिए शांति स्थापित करने और सैन्य संघर्षों को जल्द से जल्द समाप्त करने की दिशा में उठाया जाए।”

नॉर्डिक देशों ने, जो पारंपरिक रूप से मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय नियमों पर आधारित व्यवस्था की वकालत करते हैं, वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ भारत के इस सैद्धांतिक विरोध और कूटनीतिक स्वायत्तता की सराहना की।

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ब्लू इकोनॉमी और हरित तकनीक: आइसलैंड और डेनमार्क के साथ रणनीतिक साझेदारी

मुख्य शिखर सम्मेलन की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने नॉर्डिक देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ बेहद सघन द्विपक्षीय वार्ताओं का दौर पूरा किया। सबसे पहले उन्होंने आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्ट्रुन फ्रॉस्टाडॉटिर से मुलाकात की। इस बैठक का मुख्य एजेंडा कार्बन प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा और ‘ब्लू इकोनॉमी’ (समुद्री संसाधन विकास) के क्षेत्र में कूटनीतिक सहयोग बढ़ाना था।

पीएम मोदी ने आइसलैंड की अद्वितीय आर्थिक क्षमताओं की सराहना करते हुए कहा कि ऐतिहासिक भारत-EFTA (यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ) और व्यापार व आर्थिक साझेदारी समझौता (TEPA) दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को एक अभूतपूर्व गति प्रदान करेगा।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच बंद दरवाजों के पीछे हुई बातचीत में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्कटिक सहयोग, क्रिएटिव इकोनॉमी और दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी संपर्क (People-to-People ties) बढ़ाने पर विशेष सहमति बनी।

इसके बाद पीएम मोदी ने डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन के साथ भी बैठक की, जिसमें दोनों देशों के बीच पहले से जारी ‘ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप’ के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई।

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अगली पीढ़ी का डिजिटल ढांचा: फिनलैंड के साथ 5G, 6G और AI पर करार

प्रौद्योगिकी और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में भारत की क्षमता का लोहा मनवाते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो के साथ एक विशेष तकनीकी और आर्थिक बैठक की। इस मुलाकात का मुख्य ध्येय अगली पीढ़ी के डिजिटल आर्किटेक्चर (Next-Gen Digital Architecture) में दोनों देशों के तकनीकी उद्योगों को एक साथ लाना था।

दोनों देशों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), 5G और आगामी 6G नेटवर्क प्रौद्योगिकियों, क्वांटम कंप्यूटिंग और ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ मॉडलों में आपसी साझेदारी को गहरा करने पर सहमति बनी।

रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस बातचीत में दोनों नेताओं ने ‘भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते’ (India-EU FTA) की वार्ताओं को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने और इसे लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि भारत और यूरोप के बीच लचीली तथा भरोसेमंद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं (Resilient Supply Chains) स्थापित की जा सकें।

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संपादकीय दृष्टिकोण:

1.9 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की सामूहिक आर्थिक क्षमता रखने वाले पांच नॉर्डिक देशों के साथ भारत का यह गठबंधन वैश्विक कूटनीति का एक मास्टरस्ट्रोक है। ‘ग्रीन ट्रांजिशन मॉडल’ और अत्याधुनिक तकनीकी नवाचारों में दुनिया का नेतृत्व करने वाले इन देशों को भारत की विशाल विकास यात्रा और कुशल कार्यबल की सख्त जरूरत है।

प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा ने न केवल भारत-EFTA और भारत-EU व्यापार वार्ताओं को एक नई कूटनीतिक संजीवनी दी है, बल्कि ओस्लो के मंच से आतंकवाद और वैश्विक युद्धों पर दिया गया उनका संदेश यह साबित करता है कि भारत अब किसी एक गुट का हिस्सा बनने के बजाय वैश्विक शांति और न्यायसंगत विकास का एक मजबूत और स्वतंत्र ध्रुव बन चुका है। ऐतिहासिक होगा अगला भारत नॉर्डिक शिखर सम्मेलन

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