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SBI हड़ताल टली 2026 बैंक प्रबंधन और यूनियन में बनी सहमति,

SBI हड़ताल टली 2026

SBI हड़ताल टली 2026 भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के करोड़ों खाताधारकों और ग्राहकों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर आई है। आगामी 25 और 26 मई 2026 को होने वाली ‘ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ फेडरेशन’ (AISBISF) की प्रस्तावित दो-दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को आधिकारिक तौर पर टाल दिया गया है।

बैंक प्रबंधन (Management) और कर्मचारी यूनियन के बीच मुंबई स्थित कॉर्पोरेट सेंटर में हुई मैराथन बैठक के सकारात्मक माहौल में खत्म होने के बाद यह निर्णय लिया गया।

इस समझौते के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने एक नई एडवाइजरी जारी कर साफ किया है कि सोमवार और मंगलवार को देश भर में बैंक की सभी शाखाएं सामान्य रूप से खुलेंगी और नकद जमा, निकासी, पासबुक अपडेट और चेक क्लीयरेंस जैसी सभी नियमित ऑफलाइन व ऑनलाइन बैंकिंग सेवाएं बिना किसी रुकावट के उपलब्ध रहेंगी।

इससे पहले शुक्रवार को बैंक द्वारा जारी एडवाइज़री में ग्राहकों को डिजिटल चैनल अपनाने की सलाह दी गई थी, जिससे खाताधारकों में हड़कंप मच गया था।

6 दिनों के ‘महा-ब्लॉक’ का टला खतरा

कर्मचारियों की इस दो-दिवसीय हड़ताल के टलने से देश की वित्तीय व्यवस्था एक बड़े संकट से बच गई है। दरअसल, मई के इस सप्ताह में 23 मई को महीने का चौथा शनिवार और 24 मई को रविवार होने के कारण बैंक पहले से ही बंद थे। यदि 25 और 26 मई को हड़ताल हो जाती, तो लगातार चार दिन बैंक बंद रहते। इसके तुरंत बाद 27 और 28 मई को देश के कई राज्यों में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा घोषित बकरीद (ईद-उल-अजहा) का अवकाश है।

ऐसे में यदि हड़ताल नहीं टलती, तो देश के कई हिस्सों में लगातार 6 दिनों तक बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह ठप रहने का गंभीर खतरा मंडरा रहा था, जिससे न केवल आम जनता को नकदी (Cash) का संकट झेलना पड़ता, बल्कि व्यापारिक लेन-देन और एटीएम (ATM) नेटवर्क भी पूरी तरह प्रभावित हो जाता।

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वार्ता की मेज पर बनी बात: स्टाफ फेडरेशन ने जताया संतोष

ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ फेडरेशन (AISBISF) ने शुक्रवार देर रात हैदराबाद और मुंबई से संयुक्त बयान जारी कर हड़ताल स्थगित करने की घोषणा की। फेडरेशन के पदाधिकारियों के मुताबिक, शुक्रवार को मुंबई में बैंक के शीर्ष प्रबंधन के साथ मांगों के चार्टर (Charter of Demands) पर बिंदुवार चर्चा हुई, जो बेहद “रचनात्मक और सकारात्मक” रही।

यूनियन ने कहा, “हमें अपने साथियों और ग्राहकों को यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि फेडरेशन द्वारा उठाए गए लंबे समय से लंबित द्विपक्षीय मुद्दों पर प्रबंधन ने सहानुभूतिपूर्वक विचार किया है। वार्ता में काफी प्रगति हुई है और अधिकांश तकनीकी व सेवा संबंधी मामलों पर व्यापक सहमति बन गई है।

इसलिए, 25 और 26 मई 2026 को होने वाली हमारी अखिल भारतीय हड़ताल सहित विरोध प्रदर्शन के सभी आगामी कार्यक्रमों को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाता है।” यूनियन ने एसबीआई प्रबंधन के इस “सकारात्मक दृष्टिकोण” की सराहना की और उम्मीद जताई कि यह सहमति कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही शिकायतों के स्थायी और सौहार्दपूर्ण समाधान का मार्ग प्रशस्त करेगी।

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आखिर क्यों आक्रोशित थे कर्मचारी? ये थीं 16 मुख्य मांगें

कर्मचारी यूनियन ने इससे पहले देश के सांसदों को एक खुला पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि बैंक के भीतर द्विपक्षीय वार्ता तंत्र (Bilateral Mechanism) को व्यवस्थित रूप से कमजोर किया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों में निराशा और अशांति का माहौल है। स्टाफ फेडरेशन ने मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दों को लेकर मोर्चा खोला था:

मैसेंजर और सुरक्षा गार्डों की भर्ती: पिछले लगभग तीन दशकों (30 साल) से बैंक में ‘मैसेंजर’ (संदेशवाहक) की स्थायी भर्ती नहीं की गई है, जो शाखाओं के बीच संवेदनशील दस्तावेज और नकद लाने-ले जाने का काम करते हैं। इसके अलावा, एटीएम चोरी और शाखाओं पर हमलों की बढ़ती घटनाओं के बावजूद, बैंक में आखिरी बार सशस्त्र सुरक्षा गार्डों की भर्ती वर्ष 2022 में हुई थी।

स्थायी कार्यों की आउटसोर्सिंग का विरोध: यूनियन का आरोप था कि बैंक प्रबंधन पहले हुए द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन करते हुए ट्रेड फाइनेंस ऑपरेशन, कृषि सहयोगी कार्यों, संदेशवाहक और सुरक्षा सेवाओं जैसे स्थायी और निरंतर चलने वाले कार्यों को निजी एजेंसियों को आउटसोर्स कर रहा है।

एनपीएस (NPS) और पेंशन विसंगतियां: नेशनल पेंशन सिस्टम के तहत आने वाले कर्मचारियों के लिए पेंशन प्रावधानों को लागू करने और सरकारी व नियामक दिशानिर्देशों के बावजूद कर्मचारियों को अपना पेंशन फंड मैनेजर बदलने की अनुमति देने में जानबूझकर की जा रही देरी पर भी भारी असंतोष था।

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संपादकीय दृष्टिकोण:

भारतीय स्टेट बैंक प्रबंधन और स्टाफ फेडरेशन के बीच ऐन वक्त पर बनी यह सहमति देश की अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ताओं के लिहाज से बेहद समयोचित और सराहनीय है। बैंकिंग क्षेत्र में लगातार बढ़ती तकनीकी निर्भरता और डिजिटल क्रांति (YONO, UPI, इंटरनेट बैंकिंग) के बावजूद, भारत के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में आज भी एक बहुत बड़ी आबादी पासबुक अपडेट और नकद लेन-देन के लिए भौतिक शाखाओं (Physical Branches) पर ही निर्भर है।

ऐसे में 6 दिनों का संभावित वित्तीय लॉकडाउन देश के व्यापारिक पहिए को रोक सकता था। हालांकि, बैंक प्रबंधन को यह समझना होगा कि सुरक्षा गार्डों और संदेशवाहकों जैसे संवेदनशील पदों की आउटसोर्सिंग केवल कर्मचारियों की तैनाती का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक धन की सुरक्षा और बैंक की संस्थागत विश्वसनीयता से जुड़ा एक गंभीर विषय है, जिसका एक स्थायी और पारदर्शी समाधान निकालना बेहद जरूरी है। SBI हड़ताल टली 2026, प्रबंधन और यूनियन की बैठक के बाद SBI हड़ताल टली 2026

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