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CJP के ‘चलो संसद’ मार्च में संग्राम; दिल्ली पुलिस का लाठीचार्ज,

CJP चलो संसद मार्च

CJP चलो संसद मार्च संसद के मॉनसून सत्र के पहले ही दिन सोमवार, 20 जुलाई 2026 को देश की राजधानी नई दिल्ली में जबरदस्त राजनीतिक और प्रशासनिक उथल-पुथल देखने को मिली। नीट (NEET-UG) परीक्षा में कथित धांधली, पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) द्वारा आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान मध्य दिल्ली की सड़कें रणक्षेत्र में तब्दील हो गईं।

संसद मार्ग, पटेल चौक और रेल भवन के पास जब हजारों की संख्या में छात्र और प्रदर्शनकारी मल्टी-लेयर बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ने लगे, तो स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्सेस को भारी लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों का सहारा लेना पड़ा। इस झड़प में 50 से अधिक पुलिसकर्मी और दर्जनों प्रदर्शनकारी घायल हो गए हैं।

संसद के दोनों सदनों में हंगामा; खड़गे ने उठाया लाठीचार्ज का मुद्दा

सड़कों पर मची अफरातफरी की गूंज संसद भवन के भीतर भी सुनाई दी। मॉनसून सत्र के पहले ही दिन विपक्ष ने नीट पेपर लीक और अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट में हुई कथित चंदा चोरी के मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार को चौतरफा घेरा।

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन की कार्यवाही शुरू होते ही छात्रों के साथ हुई बर्बरता का मुद्दा उठाते हुए कहा:

“देश के लाखों नौजवानों का भविष्य अंधकार में लटक रहा है। हजारों छात्र दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी जायज मांगों को लेकर जमा हुए हैं। लेकिन सरकार संवाद करने के बजाय उन पर लाठियां चला रही है, आंसू गैस के गोले दाग रही है और बल प्रयोग करके उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।”

लगातार बढ़ते हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही को दिन भर के लिए बार-बार स्थगित करना पड़ा।

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लाठीचार्ज और आंसू गैस के बीच ‘चलो संसद’ मार्च; मेट्रो स्टेशन बंद

सुबह से ही हो रही हल्की बारिश के बावजूद पूरे देश से रात भर का सफर तय करके आए हजारों युवा पीठ पर बैग लादे और हाथों में तख्तियां लिए जंतर-मंतर पर एकत्र हुए थे। इस आंदोलन को अस्पताल में भर्ती जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, नागरिक समाज समूहों और शबाना आजमी, प्रकाश राज व मनोज झा जैसी प्रमुख हस्तियों का समर्थन मिला।

सुबह 11:00 बजे जैसे ही प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर रुख किया, पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर पूरे नई दिल्ली जिले में ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी और 5 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के एंट्री व एग्जिट गेट बंद कर दिए।

बैरिकेड्स पर चढ़े छात्रों को खदेड़ने के लिए आंसू गैस छोड़ी गई, जिससे पूरे इलाके में भगदड़ मच गई। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि सुरक्षा एजेंसियों को जंतर-मंतर के आसपास मोबाइल इंटरनेट सेवाएं तक बंद करनी पड़ीं।

जे.पी. नड्डा के आवास पर 4 घंटे मैराथन बैठक; CJP ने रखीं 3 प्रमुख मांगें

सड़कों पर बढ़ते तनाव के बीच, सरकार की ओर से बातचीत का दौर शुरू हुआ। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने अपने आधिकारिक आवास पर CJP के दो वरिष्ठ प्रतिनिधियों—सौरव दास और आशुतोष रंका—को वार्ता के लिए आमंत्रित किया।

लगभग चार घंटे चली इस विस्तृत और सौहार्दपूर्ण बैठक में CJP प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के सामने तीन मुख्य मांगें रखीं:

सफदरजंग अस्पताल से एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को तुरंत सम्मानपूर्वक रिहा किया जाए।कथित नीट पेपर लीक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें या उन्हें बर्खास्त किया जाए।परीक्षा धांधली से हताश होकर आत्महत्या करने वाले 20 से अधिक नीट अभ्यर्थियों के परिवारों को ₹1-1 करोड़ का आर्थिक मुआवजा दिया जाए।

    बैठक के बाद जे.पी. नड्डा ने एक्स (X) पर कहा कि सरकार ने सौहार्दपूर्ण माहौल में प्रदर्शनकारियों का ज्ञापन प्राप्त कर लिया है और उनसे आंदोलन समाप्त कर शांति बहाल करने की अपील की है। हालांकि, CJP नेता सौरव दास ने स्पष्ट किया कि मंत्री ने इन मांगों को उच्च स्तर पर उठाने का आश्वासन तो दिया है, लेकिन कोई ठोस वादा नहीं किया है।

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    “नेपाल या बांग्लादेश जैसे बन सकते थे हालात”: अभिजीत दिपके

    शाम 6:00 बजे तक दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर के मुख्य मंच को जबरन खाली करा लिया और 70 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। हालांकि, इसके बावजूद CJP नेताओं का हौसला कम नहीं हुआ।

    पार्टी संस्थापक अभिजीत दिपके, सौरव दास, आशुतोष रंका और सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो जंतर-मंतर से कुछ मीटर दूर ‘केरल हाउस’ के सामने एक ट्रक पर चढ़ गए और अपना धरना जारी रखा।

    भीड़ को संबोधित करते हुए CJP प्रमुख अभिजीत दिपके ने कहा:

    “सरकार लाठी और बंदूकों के दम पर छात्रों का मनोबल तोड़ना चाहती है। आज हमारे पास संसद में घुसने के लिए पर्याप्त संख्या बल था। अगर हम चाहते तो भारत के हालात नेपाल या बांग्लादेश जैसे हो सकते थे, लेकिन हमने छात्रों की सुरक्षा और देश की मर्यादा के लिए जानबूझकर संयम बरता। यह एक लंबी वैचारिक लड़ाई है और जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, हम पीछे नहीं हटेंगे।”

    दूसरी ओर, सफदरजंग अस्पताल से सोनम वांगचुक ने हाथ से लिखा एक पत्र जारी कर अपने अनशन के 23वें दिन भी उपवास जारी रखने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि जब तक युवा नेताओं को संसद भवन के भीतर सांसदों से मिलने की अनुमति नहीं दी जाती, वे अपना अनशन समाप्त नहीं करेंगे।

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    संपादकीय दृष्टिकोण:

    देश के मुख्य प्रशासनिक केंद्र में हजारों छात्रों पर आंसू गैस के गोले दागे जाना और लाठियां बरसाना इस बात का प्रमाण है कि युवाओं में अपनी प्रणाली को लेकर अविश्वास कितना गहरा चुका है। NEET जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में बार-बार उठने वाले धांधली के सवाल सीधे देश के भविष्य से जुड़े हैं।

    हालांकि, गृह मंत्रालय और जे.पी. नड्डा द्वारा CJP के प्रतिनिधियों को वार्ता की मेज पर लाना एक सकारात्मक और स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन केवल आश्वासनों से भड़के छात्रों को शांत नहीं किया जा सकता। सरकार को चाहिए कि वह हठधर्मिता छोड़कर कड़े सुधारात्मक कदम उठाए और परीक्षा की शुचिता स्थापित करने के लिए ठोस समय-सीमा तय करे, ताकि सड़कों पर उपजा यह जनाक्रोश शांत हो सके। नागरिक अधिकारों की आवाज बुलंद करने दिल्ली में शुरू हुआ CJP चलो संसद मार्च

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