मुंबई पुलिस कॉप वायरल वीडियो CJP समर्थकों को धमकी देने वाला निलंबित
मुंबई पुलिस कॉप वायरल वीडियो राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ नीट (NEET-UG 2026) परीक्षा विवाद और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का छात्र आंदोलन जब देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पहुंचा, तो खाकी वर्दी का एक ऐसा भयावह चेहरा सामने आया जिसने पूरे प्रशासनिक अमले को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल होने के बाद, जिसमें एक पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारी छात्रों को उनकी जेब में झूठा ड्रग्स (पाउडर) रखकर करियर तबाह करने की धमकी दे रहा है, मुंबई पुलिस ने सख्त एक्शन लेते हुए संबंधित कॉन्स्टेबल को निलंबित (Suspend) कर दिया है।
इस घटना के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आ गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP) सांसद सुप्रिया सुले और कांग्रेस पार्टी ने राज्य के गृह विभाग और पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल दागे हैं।
वायरल वीडियो का खौफनाक सच: “मेरे जैसा बेकार आदमी कोई नहीं”
वायरल हुआ वीडियो मुंबई के शिवाजी पार्क और दादर इलाके में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस वैन के भीतर का है। दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में मुंबई के शिवाजी पार्क, चैत्यभूमि, चेंबूर और शिवसेना भवन के बाहर युवाओं ने बिना औपचारिक अनुमति के शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था। पुलिस ने कई युवाओं को हिरासत में लेकर गाड़ी में बैठाया था।
गाड़ी चला रहे पुलिसकर्मी—जिसकी पहचान मुंबई पुलिस के मोटर ट्रांसपोर्ट (MT) विभाग के ड्राइवर पवन सांगले (वर्तमान में सायन पुलिस स्टेशन में तैनात) के रूप में हुई है—को गाड़ी के पिछले हिस्से में बैठे युवाओं को खुलेआम धमकाते हुए सुना जा सकता है:
“अगर तुम मुझे इस इलाके में दोबारा प्रदर्शन करते मिले, तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा। मैं सीधे तुम्हारी जेब में 50-50 ग्राम पाउडर (ड्रग्स) डाल दूंगा। फिर एनडीपीएस (NDPS) एक्ट में जाओगे, कोई जमानत नहीं मिलेगी और पूरी जिंदगी जेल में सड़ोगे। तुम्हारे चक्कर में हमको परेशानी होती है।”
हैरानी की बात यह रही कि वैन के पीछे बैठे छात्र पुलिस वाले की इस बर्बर धमकी के बावजूद शांत रहे और उसमें से एक छात्र ने पूरी घटना अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर ली।
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त्वरित कार्रवाई: जांच होने तक कंट्रोल रूम में अटैच व सस्पेंड
वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही जनता और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच के आदेश दिए।
मुंबई पुलिस के आधिकारिक प्रवक्ता ने पुष्टि की कि प्राथमिक जांच के आधार पर पुलिस ड्राइवर पवन सांगले को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है और उसे पुलिस मुख्यालय (कंट्रोल रूम) से अटैच कर दिया गया है।
अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Inquiry) शुरू कर दी गई है। उल्लेखनीय है कि 18 से 22 जुलाई के बीच मुंबई में बिना अनुमति प्रदर्शन करने के आरोप में पुलिस ने 13 अलग-अलग प्राथमिकी (FIR) दर्ज की हैं और 400 से अधिक लोगों को नामजद किया है।
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राजनीतिक गलियारों में मचा हड़कंप; राज ठाकरे और सुप्रिया सुले का हमला
पुलिसकर्मी के इस बयान के बाद विपक्ष ने राज्य सरकार और गृह मंत्रालय को आड़े हाथों लिया है:
राज ठाकरे (MNS प्रमुख): राज ठाकरे ने मामले पर बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए सवाल उठाया कि एक आम पुलिसकर्मी के पास यह दावा करने की हिम्मत कहाँ से आई कि उसके पास नागरिकों पर प्लांट करने के लिए ड्रग्स उपलब्ध हैं?
उन्होंने कहा: “यह जांच का विषय है कि क्या वह पुलिसकर्मी खुद नारकोटिक्स और ड्रग्स रैकेट में शामिल है? या फिर वह निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए अपनी ताकत का दुरुपयोग कर रहा है? ऐसे अधिकारियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”
सुप्रिया सुले (NCP-SP सांसद): लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने इस घटना को मुंबई पुलिस की वैश्विक प्रतिष्ठा पर ‘काला धब्बा’ करार दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री से जवाब मांगते हुए कहा: “छात्र अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं। क्या गृह विभाग छात्रों पर फर्जी मुकदमे दर्ज करने की इस गुंडागर्दी का समर्थन करता है? सरकार को तुरंत अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।”
हर्षवर्धन सपकाल (महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष): कांग्रेस ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार हर नागरिक को है। पुलिस का इस्तेमाल छात्रों में डर पैदा करने और उनका करियर तबाह करने के लिए नहीं किया जा सकता। आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी इस घटना को लेकर सत्ताधारी गठबंधन पर निशाना साधा।
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संपादकीय दृष्टिकोण:
कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का प्राथमिक कर्तव्य है, लेकिन अधिकार का दुरुपयोग कर किसी नागरिक या छात्र को फर्जी एनडीपीएस (NDPS) केस में फंसाने की धमकी देना सीधे तौर पर गुंडागर्दी और आपराधिक मानसिकता का प्रतीक है।
जिस प्रकार से पुलिसकर्मी ने 50 ग्राम ड्रग्स जेब में डालने की बात कही, वह पुलिसिया व्यवस्था के भीतर मौजूद गंभीर खामियों की ओर इशारा करती है। महज निलंबन इस मामले का अंतिम हल नहीं हो सकता; मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपी पुलिसकर्मी पर आपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए ताकि खाकी पर से जनता का भरोसा न उठे। मुंबई पुलिस कॉप वायरल: इंटरनेट पर छाया नया वीडियो, खूब पसंद किया जा रहा सोशल मीडिया पर अचानक क्यों चर्चा में आया मुंबई पुलिस कॉप वायरल
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