धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री इस्तीफा प्रह्लाद जोशी बने नए शिक्षा मंत्री;
धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री इस्तीफा नीट (NEET-UG 2026) परीक्षा धांधली और पेपर लीक विवाद के कारण महीनों से देश भर में जारी राजनीतिक व प्रशासनिक घमासान के बीच शनिवार को केंद्र सरकार में बड़ा फेरबदल देखने को मिला।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने परीक्षा प्रणाली में हुई गड़बड़ियों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तुरंत प्रभाव से स्वीकार कर लिया है।
मंत्रिमंडल में हुए इस आकस्मिक बदलाव के तहत राष्ट्रपति ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। प्रह्लाद जोशी वर्तमान में उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के साथ-साथ नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) का दायित्व संभाल रहे हैं।
नीट धांधली की जिम्मेदारी लेते हुए दिया त्यागपत्र
इस्तीफे की घोषणा करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वह लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य और देश की शैक्षणिक अखंडता को प्राथमिकता देते हुए नीट-यूजी 2026 पेपर लीक की पूर्ण जिम्मेदारी लेते हैं। उन्होंने कहा:
“मैं नहीं चाहता कि इस मुद्दे का प्रतिकूल असर देश के करोड़ों होनहार छात्रों और हमारी राष्ट्रीय एकता पर पड़े। परीक्षा प्रणाली की साख बहाल करना सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।”
धर्मेंद्र प्रधान का यह कदम उन राजनीतिक दबावों और छात्र संगठनों के लगातार उग्र होते प्रदर्शनों के बाद आया है, जो 2024 और फिर 2026 में नीट परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय नेतृत्व से जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे थे।
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CJP ने 36 दिनों का देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन समाप्त किया
धर्मेंद्र प्रधान के पद त्याग की घोषणा के कुछ ही घंटों भीतर, जंतर-मंतर पर 20 जून से डेरा डाले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपना 36 दिन लंबा ऐतिहासिक आंदोलन तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का ऐलान किया। यह घोषणा केंद्रीय मंत्रियों जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ सीजेपी प्रतिनिधिमंडल की सफल दूसरे दौर की मैराथन बैठक के बाद की गई।
एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरव दास ने कहा:
“चूंकि केंद्र सरकार ने हमारी मुख्य मांगों—शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज सभी एफआईआर (FIR) की वापसी, और नीट त्रासदी से प्रभावित मृत छात्रों के परिजनों को सम्मानजनक मुआवजा—को स्वीकार कर लिया है, इसलिए हम सद्भावना के तहत अपना आंदोलन वापस ले रहे हैं।”
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने पुष्टि की कि दिल्ली पुलिस और बीजेपी शासित राज्यों में छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामले रद्द किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा सुधारों पर सीजेपी के ‘पांच-सूत्रीय चार्टर’ पर विस्तृत चर्चा के लिए दोनों पक्ष चार सप्ताह बाद पुनः बैठक करेंगे।
प्रह्लाद जोशी के सामने चुनौतियां: NTA में बड़े बदलाव और तकनीकी सुरक्षा
शिक्षा मंत्रालय का पदभार संभालने के साथ ही प्रह्लाद जोशी के सामने देश की चरमराती परीक्षा प्रणाली में आम जनता और छात्रों का विश्वास पुनः बहाल करने की अत्यंत कठिन चुनौती है।
मंत्रालय सूत्रों के अनुसार, नीट-यूजी विवाद के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का व्यापक पुनर्गठन शुरू कर दिया गया है। एजेंसी के आउटसोर्सिंग मॉडल को समाप्त करते हुए लगभग 47 वरिष्ठ अधिकारियों को हटा दिया गया है।
सरकार का मुख्य ध्यान अब नीट-यूजी जैसी विशाल राष्ट्रीय परीक्षाओं को पारंपरिक ‘पेन-पेपर मोड’ से हटाकर अत्यधिक सुरक्षित कंप्यूटर-आधारित टेस्ट (CBT) फॉर्मेट में स्थानांतरित करने पर है।
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शीर्ष नौकरशाही में फेरबदल से प्रशासनिक ओवरहाल
राजनीतिक नेतृत्व में बदलाव के साथ-साथ केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय की नौकरशाही में भी बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है:
उच्च शिक्षा विभाग: उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी को स्थानांतरित कर पंचायती राज मंत्रालय में भेज दिया गया है। उनकी जगह नरेश पाल गंगवार (1994 बैच, राजस्थान कैडर IAS) को नया उच्च शिक्षा सचिव नियुक्त किया गया है।
स्कूल शिक्षा विभाग: टी.के. अनिल कुमार (1995 बैच, कर्नाटक कैडर IAS) ने स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के सचिव का पदभार ग्रहण किया है।
धर्मेंद्र प्रधान का कार्यकाल: NEP 2020 से लेकर विवादों के साये तक
जुलाई 2021 में रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के स्थान पर शिक्षा मंत्री बने धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) को लागू करने में तेजी आई। उनके कार्यकाल में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित करने का ऐतिहासिक प्रस्ताव आया और उच्च शिक्षण संस्थानों (IITs, IIMs) का अभूतपूर्व विस्तार हुआ।
हालांकि, उनके कार्यकाल के अंतिम दो वर्ष प्रतियोगी परीक्षाओं की विफलता से घिरे रहे। पहले 2024 में नीट-यूजी धांधली और फिर 2026 में पेपर लीक के कारण 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों को प्रभावित करने वाली नीट परीक्षा का रद्द होना उनके प्रशासनिक करियर का सबसे बड़ा संकट साबित हुआ।
हाल ही में महाराष्ट्र टीईटी (TET 2026) का पेपर लीक होना इस बात का सबूत था कि परीक्षा माफिया के नेटवर्क को तोड़ना अभी बाकी है।
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संपादकीय दृष्टिकोण:
केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और CJP आंदोलन की समाप्ति एक लंबे राजनीतिक व सामाजिक गतिरोध का अंत है। हालांकि, नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी के लिए राह आसान नहीं होगी। महज चेहरों और शीर्ष अधिकारियों के बदलने से परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता वापस नहीं आएगी।
सरकार को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रस्तावित ‘एंटी-पेपर लीक कानून’ और एनटीए (NTA) के डिजिटल सुधारों को धरातल पर इतनी सख्ती से लागू किया जाए कि भविष्य में किसी भी युवा का सपना प्रशासनिक विफलता की भेंट न चढ़े। नीट विवाद के बीच तेज हुई धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री इस्तीफा की मांग
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