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NALSAR BCI एनरोलमेंट विवाद बैन पर ABVP और पूर्व छात्रों का फूटा गुस्सा:

NALSAR BCI एनरोलमेंट विवाद

नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR) यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद के 2026 बैच के छात्रों पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा एनरोलमेंट रोक लगाने के फैसले (जिसे बाद में वापस ले लिया गया) पर विवाद गहरा गया है।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और विश्वविद्यालय के 440 से अधिक पूर्व छात्रों (Alumni) ने बीसीआई की इस शुरुआती कार्रवाई की कड़ी निंदा की है और इसे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करार दिया है।

ABVP की कड़ी प्रतिक्रिया: “व्यक्तिगत भूमिका के बिना पूरे बैच पर सामूहिक कार्रवाई अनुचित”

छात्र संगठन ABVP ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के फैसले को “गैर-जरूरी और चिंताजनक” बताया। ABVP के वरिष्ठ पदाधिकारियों का कहना है कि किसी भी कथित घटना के आधार पर पूरे पासिंग आउट बैच के करियर को खतरे में डालना न्यायसंगत नहीं है।

उचित प्रक्रिया का पालन हो: ABVP के वरिष्ठ पदाधिकारी अभिनव मिश्रा ने कहा, “अगर कुछ व्यक्तियों पर आरोप हैं, तो निष्पक्ष जांच के आधार पर केवल उन्हीं के खिलाफ व्यक्तिगत कार्रवाई होनी चाहिए। पूरे बैच को सजा देना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।”

फैसला वापस लेना सही कदम: ABVP के राष्ट्रीय महामंत्री वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि BCI द्वारा एनरोलमेंट पर लगाई गई रोक को तुरंत वापस लेना यह दर्शाता है कि छात्रों के भविष्य से जुड़ा कोई भी निर्देश देने से पहले तथ्यों और परिणामों की सतर्क जांच आवश्यक है।

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पूर्व छात्रों का BCI को खुला पत्र: “विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन”

BCI द्वारा निर्देश वापस लिए जाने और जांच रद्द करने के बावजूद, NALSAR के 441 पूर्व छात्रों ने BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा को एक तीखा खुला पत्र लिखा।

अधिकार क्षेत्र से बाहर का कदम: पूर्व छात्रों ने तर्क दिया कि विश्वविद्यालय परिसर के भीतर वैचारिक अभिव्यक्ति या आंतरिक असहमति के मामलों को नियंत्रित करना BCI के कानूनी अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) में नहीं आता। BCI का काम केवल कानूनी शिक्षा के मानक तय करना है।

मानसिक स्वास्थ्य और स्वतंत्रता की अनदेखी: पत्र में कहा गया कि BCI की भाषा और तरीका छात्रों में डर का माहौल पैदा करने वाला था, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य और अभिव्यक्ति की मौलिक स्वतंत्रता के अधिकार की अनदेखी करता है।

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    क्या है पूरा विवाद?

    यह पूरा विवाद NALSAR के 2026 बैच के दीक्षांत समारोह से शुरू हुआ:

    CJI की उपस्थिति का विरोध: विश्वविद्यालय के लगभग 450 छात्रों ने दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किए जाने का विरोध किया था। छात्रों का विरोध NEET प्रदर्शनकारियों से जुड़े एक मामले में CJI की हालिया टिप्पणियों को लेकर था।

    BCI का कड़ा रुख और यू-टर्न: इस विरोध के सामने आने के बाद, 13 अगस्त को BCI ने राज्य बार काउंसिलों को आदेश जारी कर NALSAR के 2026 बैच के सभी स्नातकों के वकील के रूप में नामांकन पर अस्थायी रोक लगा दी थी।

    व्यापक विरोध के बाद वापसी: कानूनी बिरादरी, पूर्व छात्रों और छात्र संगठनों के चौतरफा दबाव के बाद, BCI ने कुछ ही घंटों के भीतर इस निर्देश को वापस ले लिया और बाद में स्पष्ट किया कि छात्रों या फैकल्टी के खिलाफ कोई जांच नहीं की जाएगी।

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    विधिक विशेषज्ञों और पूर्व छात्रों का मानना है कि कानूनी शिक्षा देने वाले संस्थानों में छात्रों को सत्ता, व्यवस्था और निर्णयों पर सवाल उठाने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। ABVP और पूर्व छात्रों की इस संयुक्त आलोचना ने स्पष्ट कर दिया है कि नियामक संस्थाओं को छात्रों के करियर को प्रभावित करने वाले सख्त कदम उठाने के बजाय बातचीत और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का मार्ग अपनाना चाहिए। लॉ छात्रों के विरोध और बार काउंसिल के कड़े फैसलों के बीच गरमाया NALSAR BCI एनरोलमेंट विवाद

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