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भारत की तरक्की $3.9T अर्थव्यवस्था से लेकर 24,000 करोड़ UPI तक,

भारत की तरक्की

भारत की तरक्की 15 अगस्त 1947 की आधी रात को जब दुनिया सो रही थी, तब भारत ने एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में जीवन और स्वतंत्रता की नई भोर में कदम रखा। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने अपने ऐतिहासिक भाषण ‘ट्रिस्ट विद डेस्टिनी’ (किस्मत से मिलन) में जिस नए भारत का खाका खींचा था, उस समय देश के सामने गरीबी, भुखमरी, निरक्षरता और बदहाल बुनियादी ढांचे जैसी भयावह चुनौतियां थीं।

आज़ादी के आठ दशकों (79 वर्षों) के सफर में भारत ने न केवल अपनी लोकतांत्रिक जड़ों को सींचा है, बल्कि विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं और डिजिटल महाशक्तियों में अपनी जगह बनाई है। आंकड़ों के जरिए जानिए कि 1947 का भारत आज 2026 में कितना बदल चुका है:

$3.92 ट्रिलियन GDP: दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

1947 में भारत की अनुमानित सकल घरेलू उत्पाद (GDP) महज ₹2.7 लाख करोड़ (लगभग $20-27 बिलियन) थी, जो मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर थी। आज अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की नॉमिनल GDP बढ़कर $3.92 ट्रिलियन (लगभग ₹325 लाख करोड़) तक पहुंच गई है।

भारत अब कृषि-आधारित देश से निकलकर आईटी, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स और सर्विस सेक्टर का वैश्विक हब बन गया है। प्रति व्यक्ति आय भी बढ़कर $2,813 हो गई है।

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₹53.5 लाख करोड़ का सालाना बजट

देश का पहला अंतरिम बजट 26 नवंबर 1947 को तत्कालीन वित्त मंत्री आर.के. षणमुखम चेट्टी ने पेश किया था, जो साढ़े सात महीने के लिए ₹197.39 करोड़ का था। इसके विपरीत, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया 2026-27 का बजट ₹53.5 लाख करोड़ का है, जो बुनियादी ढांचे, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के व्यापक विस्तार को दर्शाता है।

साक्षरता दर 18% से बढ़कर 80.9% हुई

आज़ादी के समय भारत का हर पांचवां में से केवल एक नागरिक ही पढ़ा-लिखा था (1951 में साक्षरता दर मात्र 18% थी)। हालिया पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के अनुसार, आज देश की साक्षरता दर बढ़कर 80.9% हो चुकी है, जिसमें शहरी साक्षरता दर लगभग 90% और ग्रामीण साक्षरता दर 77% के करीब पहुंच गई है।

औसत जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) 31 वर्ष से बढ़कर 72 वर्ष

1947 में अकाल, कुपोषण और संक्रामक बीमारियों के कारण औसतन एक भारतीय की जीवन प्रत्याशा केवल 31 से 32 वर्ष थी। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, सार्वभौमिक टीकाकरण और शिशु मृत्यु दर में भारी कमी (1990 में प्रति हजार 127 मौतों से घटकर 2024 में 27) के चलते आज औसतन जीवन प्रत्याशा बढ़कर 72 वर्ष हो गई है।

99.5% आबादी तक बिजली की पहुंच

1947 में देश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता केवल 1,362 MW थी और 1% से भी कम गांवों तक बिजली पहुंची थी। संयुक्त राष्ट्र और वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, आज भारत की 99.5% से अधिक आबादी और गांव राष्ट्रीय पावर ग्रिड से जुड़ चुके हैं।

1.09 अरब इंटरनेट यूजर्स और डिजिटल क्रांति

भारत का डिजिटल परिवर्तन 21वीं सदी की सबसे बड़ी उपलब्धि है। वर्ल्ड बैंक डेटा के अनुसार, देश की लगभग 70% आबादी इंटरनेट का उपयोग करती है। भारत में कुल 1.09 अरब इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं, जिनमें से लगभग 548 मिलियन (57%) उपयोगकर्ता ग्रामीण भारत से हैं। इसके अलावा, 85.5% से अधिक भारतीय घरों में कम से कम एक स्मार्टफोन मौजूद है।

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98 करोड़ मतदाताओं के साथ दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र

1951 के पहले आम चुनाव में 17.32 करोड़ पंजीकृत मतदाता थे। 2024 के आम चुनाव तक यह संख्या बढ़कर 98 करोड़ से अधिक हो गई। मतपत्रों (Paper Ballots) से शुरू हुआ चुनावी सफर आज VVPAT-युक्त EVM मशीनों तक पहुंच चुका है। 1989 में मतदान की न्यूनतम आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष की गई थी, जिसके चलते आज युवा मतदाता लोकतांत्रिक निर्णय लेने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

23 IIT, 21 IIM और 2 लाख से अधिक स्टार्ट-अप्स

1951 में खड़गपुर में स्थापित पहले IIT और 1961 में बने IIM से शुरू हुआ उच्च शिक्षा का सफर आज 23 IIT और 21 IIM तक विस्तृत हो चुका है। ‘स्टार्टअप इंडिया’ अभियान के तहत देश में 2,00,000 से अधिक DPIIT-मान्य प्राप्त स्टार्टअप्स हैं, जिनमें से 53% टियर-II और टियर-III शहरों से उभर रहे हैं।

पांचवीं सबसे बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था और 24,161 करोड़ UPI लेन-देन

भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था देश की कुल GDP में 12-14% का योगदान देती है, जिससे भारत दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी डिजिटल इकोनॉमी बन गया है। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा 2016 में शुरू किए गए UPI ने वित्तीय लेन-देन का चेहरा बदल दिया है।

वित्त वर्ष 2025-26 में UPI ने ₹314.23 लाख करोड़ मूल्य के कुल 24,161 करोड़ से अधिक ट्रांजेक्शन प्रोसेस किए हैं। UPI अब फ्रांस, सिंगापुर, UAE और मॉरीशस जैसे 11 देशों में स्वीकार किया जाता है।

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10. 147 करोड़ जनसांख्यिकी: चुनौती से ‘मानव पूंजी’ बनने का सफर

1951 की जनगणना में भारत की जनसंख्या 36.1 करोड़ थी, जो आज बढ़कर लगभग 1.47 अरब (1.47 Billion) हो गई है। भारत अब विश्व का सबसे अधिक आबादी वाला देश है।

यद्यपि जनसांख्यिकी दबाव एक चुनौती है, लेकिन सही कौशल, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार के अवसरों के माध्यम से यह विशाल युवा आबादी भारत के आर्थिक विकास का सबसे बड़ा जरिया (‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’) साबित हो रही है।

विकसित भारत की ओर बढ़ते कदम

पूर्व कैबिनेट सचिव के.एम. चंद्रशेखर के अनुसार, भारत का लोकतांत्रिक ढांचा और उसके नागरिकों की जागरूक चेतना देश की सबसे बड़ी ताकत रही है। 1956 के भाषाई पुनर्गठन, 1975 के आपातकाल से उबरने और गठबंधनों के दौर से गुजरते हुए भारतीय लोकतंत्र परिपक्व हुआ है।

आज नागरिक पारंपरिक वादों से इतर बेरोजगारी, नागरिक प्रशासन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे ठोस सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित होकर भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की ओर अग्रसर हैं। वैश्विक मंच पर मजबूत अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्रांति के दम पर आगे बढ़ती भारत की तरक्की इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और नए मैन्युफैक्चरिंग हब बनने के साथ जानें भारत की तरक्की की पूरी इनसाइड स्टोरी आत्मनिर्भर भारत मिशन और युवाओं के नवाचार से रफ्तार पकड़ती भारत की तरक्की का पूरा विश्लेषण

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