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रांची छात्र प्रदर्शन लाठीचार्ज से भड़का बवाल, ED की एंट्री

रांची छात्र प्रदर्शन लाठीचार्ज

रांची छात्र प्रदर्शन लाठीचार्ज दिल्ली में परीक्षा धांधली और पेपर लीक के खिलाफ हुए विरोध-प्रदर्शनों की गूंज अभी शांत भी नहीं हुई थी कि अब झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर स्थिति भयावह हो गई है।

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली, भ्रष्टाचार और पेपर लीक के आरोपों को लेकर पिछले 18 दिनों से जारी छात्रों का आंदोलन 11 अगस्त 2026 को एक बड़े राजनीतिक और विधायी संकट में तब्दील हो गया।

रांची में विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस द्वारा अभ्यर्थियों पर किए गए बल प्रयोग, वॉटर कैनन और आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्यव्यापी 16 घंटे के बंद का आह्वान किया, जिससे पूरे राज्य में सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया।

25 जुलाई से शुरू हुआ आंदोलन कैसे बना ‘जन-आंदोलन’?

25 जुलाई 2026 को स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ युवाओं का यह विरोध-प्रदर्शन JPSC-JSSC यूथ मंच के बैनर तले एक राज्यव्यापी आंदोलन बन गया।

विधानसभा मार्च और लाठीचार्ज: 10 अगस्त को हजारों की संख्या में अभ्यर्थी रांची स्थित नए विधानसभा परिसर की ओर बढ़े। जगन्नाथपुर मंदिर के पास जब प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बैरिकेड्स तोड़े, तो पुलिस ने उन्हें खदेड़ने के लिए वॉटर कैनन और आंसू गैस के गोले छोड़े।

दर्जनों छात्र घायल, भूख हड़ताल जारी: परिसर के गेट नंबर 1 पर धरना दे रहे युवाओं पर दोबारा लाठीचार्ज किया गया, जिसमें दर्जनों छात्र घायल हो गए। छह छात्र प्रतिनिधि अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं, जिनमें से दो की स्थिति गंभीर होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

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केंद्रीय एजेंसियों की एंट्री और पूर्व JPSC अध्यक्ष की गिरफ्तारी

सड़कों पर मचे बवाल के बीच जांच एजेंसियों के दखल से राज्य सरकार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं:

CID की कार्रवाई: झारखंड सीआईडी (CID) ने जेपीएससी भर्ती धांधली के सिलसिले में त्वरित कार्रवाई करते हुए झारखंड लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में अब तक कुल 20 लोगों की कानूनी गिरफ्तारी हो चुकी है।

ED का PMLA के तहत केस: रांची, धनबाद, बोकारो, पलामू और हजारीबाग सहित 18 ठिकानों पर छापेमारी के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत औपचारिक मामला दर्ज कर लिया है। ED अब उन वित्तीय तंत्रों और सिंडिकेट की जांच कर रही है जिन्होंने पेपर लीक के जरिए करोड़ों रुपयों का अवैध लेन-देन किया।

परीक्षाएं रद्द: चौतरफा दबाव के बीच राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने घोषणा की कि सरकार 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा के साथ-साथ 2023 और 2025 की बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमत हो गई है।

राजनीतिक घमासान: भाजपा का बंद और मुख्यमंत्री का पलटवार

इस मुद्दे ने झारखंड की राजनीति में भूचाल ला दिया है:

भाजपा का 16 घंटे का बंद: छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में भाजपा ने मंगलवार सुबह 8 बजे से आधी रात तक 16 घंटे के राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया। पलामू, रांची और हजारीबाग में भाजपा कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर टायर जलाकर आवागमन ठप कर दिया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के भी कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।

हेमंत सोरेन का बयान: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी छात्रों की भावनाओं का इस्तेमाल कर इस संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिकरण कर रही है। सरकार नियमानुसार निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों को सजा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

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अभ्यर्थियों की मुख्य मांगें क्या हैं?

यह पूरा विवाद मुख्य रूप से 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा से शुरू हुआ था, जो बाद में JSSC की अन्य संयुक्त परीक्षाओं तक फैल गया। युवाओं की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:

भर्ती प्रक्रियाओं में पूर्ण पारदर्शिता और समयबद्धता।

पूरे पेपर लीक प्रकरण और वित्तीय अनियमितताओं की सीबीआई (CBI) से स्वतंत्र जांच।

परीक्षाओं के बार-बार टलने और रद्द होने से सालों से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद करना।

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    संपादकीय दृष्टिकोण:

    सरकारी नौकरियों की तैयारी में अपने जीवन के कई साल देने वाले युवाओं के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया किसी भी राज्य के सुशासन की पहली शर्त होती है। झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर गहराया यह विश्वास का संकट अब केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि एक गंभीर राजनीतिक गतिरोध बन चुका है।

    जहां एक ओर ED और CID की समानांतर जांच से बड़े चेहरों पर शिकंजा कस रहा है, वहीं दूसरी ओर सड़कों पर उतरते युवा और राज्यव्यापी बंद यह दर्शाते हैं कि युवाओं का असंतोष दूर करने के लिए केवल वादे नहीं, बल्कि पारदर्शी नीतियों और कठोर दंडात्मक कार्रवाइयों की सख्त जरूरत है। प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली के विरोध के बीच गरमाया रांची छात्र प्रदर्शन लाठीचार्ज मामला सड़कों पर उतरे अभ्यर्थियों और पुलिसिया कार्रवाई के बीच जानें रांची छात्र प्रदर्शन लाठीचार्ज की पूरी सच्चाई

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