“मराठी भाषा RTO नोटिस” ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों पर गिरी गाज,
मराठी भाषा RTO नोटिस महाराष्ट्र में रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (RTO) ने उन ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के खिलाफ सख्त राज्यव्यापी चेकिंग अभियान शुरू किया है, जिन्हें मराठी भाषा का कामकाजी ज्ञान नहीं है।
चेकिंग के पहले ही दिन राज्य भर में बुनियादी मराठी न बोल पाने वाले 1,268 कमर्शियल ड्राइवरों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने बताया कि राज्य भर में कुल 8,217 वाहनों की जांच की गई, जिनमें से मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) के 604 और राज्य के अन्य हिस्सों के 664 ड्राइवर नियमों का पालन करने में विफल पाए गए।
कैसे ली जा रही है परीक्षा और क्या हैं सवाल?
RTO अधिकारी सड़कों पर ही ड्राइवरों का मौखिक परीक्षण (Oral Test) ले रहे हैं। इसके लिए 16 व्यावहारिक सवालों की एक प्रश्नावली तैयार की गई है, जो कोंकण साहित्य परिषद द्वारा दिए गए भाषा प्रशिक्षण पर आधारित है।
टेस्ट में पूछे जाने वाले व्यावहारिक सवाल:
“मला CNG भरायचे आहे, थोडे थांबावे लागेल” (मुझे सीएनजी भरवानी है, थोड़ा रुकना होगा)।
“माझी रिक्शा/टॅक्सी शेअरिंगची आहे” (मेरी ऑटो/टैक्सी शेयरिंग वाली है)।
“मीटर चालू केले आहे” (मीटर चालू कर दिया है)।
जांच की प्रक्रिया: RTO इंस्पेक्टर चेकिंग की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे हैं ताकि निष्पक्षता बनी रहे।
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1 महीने की मोहलत, वरना 3 महीने के लिए सस्पेंड होगा बैज
परिवहन मंत्री ने स्पष्ट किया है कि सरकार का मकसद किसी का रोजगार छीनना नहीं है, बल्कि राज्य की भाषा और संस्कृति का सम्मान सुनिश्चित करना है।
एक महीने का समय: नोटिस पाने वाले ड्राइवरों को मराठी भाषा सीखने और दक्षता हासिल करने के लिए 1 महीने का वक्त दिया गया है।
सस्पेंशन की चेतावनी: यदि एक महीने बाद भी ड्राइवर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाते हैं, तो उनका ड्राइविंग बैज 3 महीने के लिए निलंबित कर दिया जाएगा।
परमिट रद्द: लगातार नियमों का उल्लंघन करने पर ऑपरेटिंग परमिट और बैज दोनों को हमेशा के लिए रद्द किया जा सकता है।
सरकार के अनुसार, 105 दिनों के विशेष अभियान के तहत अब तक 1.65 लाख से अधिक ड्राइवर मराठी भाषा की ट्रेनिंग पूरी कर सर्टिफिकेट हासिल कर चुके हैं।
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यूनियनों और पूर्व अधिकारियों ने उठाए सवाल
जहां एक तरफ सरकार इसे यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा से जोड़कर देख रही है, वहीं टैक्सी यूनियनों और पूर्व RTO अधिकारियों ने नियमों में “कामकाजी ज्ञान” (Working Knowledge) की स्पष्ट परिभाषा न होने पर सवाल उठाए हैं।
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यूनियन नेताओं का कहना है कि स्पष्ट मापदंड न होने से RTO स्तर पर मनमानी और भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ सकती है। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि यह नियम ‘महाराष्ट्र मोटर वाहन नियम, 1989’ का ही हिस्सा है, जिसे अब सख्ती से लागू किया जा रहा है। यह अभियान 30 सितंबर तक लगातार जारी रहेगा। परिवहन विभाग की सख्त चेतावनी और जुर्माने के प्रावधानों के बाद मराठी भाषा RTO नोटिस पर आई बड़ी खबर
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