“अमरावती अस्पताल आग” के NICU में भीषण आग, 3 शिशुओं की मौत;
महाराष्ट्र के अमरावती जिले से एक बेहद दर्दनाक और दुखद खबर सामने आई है। सोमवार, 24 अगस्त 2026 की तड़के अमरावती स्थित जिला महिला अस्पताल के नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में अचानक भीषण आग लग गई। इस भयानक हादसे में इलाज करा रहे 3 मासूम नवजात शिशुओं की दम घुटने और झुलसने से दर्दनाक मौत हो गई।
हादसे के वक्त वार्ड में समय से पहले जन्मे (प्री-मैच्योर) और गंभीर रूप से बीमार 39 बच्चे भर्ती थे। गनीमत यह रही कि अस्पताल कर्मचारियों और दमकल विभाग की तत्परता से 36 बच्चों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जताया गहरा दुख, 5-5 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा
इस दर्दनाक घटना पर संज्ञान लेते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गहरा दुख और संवेदना व्यक्त की है।
मुख्यमंत्री द्वारा की गई प्रमुख घोषणाएं और निर्देश:
आर्थिक सहायता: राज्य सरकार की ओर से प्रत्येक मृतक नवजात शिशु के पीड़ित परिवार को 5-5 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
निःशुल्क इलाज: दुर्घटना में बचाए गए और झुलसे अन्य बच्चों के संपूर्ण इलाज का खर्च महाराष्ट्र सरकार उठाएगी।
उच्च-स्तरीय जांच: मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को घटना के कारणों की परत-दर-परत जांच करने के लिए उच्च-स्तरीय जांच (High-Level Inquiry) के आदेश दिए हैं और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
स्थिति का जायजा लेने और प्रशासनिक कार्रवाई की निगरानी के लिए राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाशराव अबितकर तुरंत अमरावती पहुंचे।
इसे भी पढ़े : “मोदी ट्रंप मुलाकात” अमेरिकी दूत सर्जियो गोर के दावे पर MEA की सफाई
अस्पतालों की सुरक्षा पर गरमाई राजनीति: विपक्ष ने घेरा
अमरावती की इस दुखद आगजनी ने राज्य भर के सरकारी अस्पतालों में फायर और इलेक्ट्रिकल सेफ्टी को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। घटना के बाद विपक्षी नेताओं ने अस्पताल का दौरा किया और सरकार पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए।
वेंटिलेटर धमाके के दावे पर उठे सवाल
कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री यशोमती ठाकुर ने अस्पताल का दौरा करने के बाद प्रशासन के उस दावे को कटघरे में खड़ा किया, जिसमें कहा गया था कि आग वेंटिलेटर में हुए ब्लास्ट की वजह से लगी। उन्होंने वेंटिलेटर सप्लाई करने वाली कंपनी और उपकरणों की गुणवत्ता की जांच की मांग की और कहा कि अस्पताल में सुरक्षा ऑडिट को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।
‘भंडारा हादसे की रिपोर्ट धूल फांक रही है’: अनिल देशमुख
एनसीपी (एसपी) नेता और पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि साल 2021 में भंडारा के सरकारी अस्पताल में लगी आग (जिसमें 10 बच्चों की जान गई थी) के बाद एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई थी।
“उस समिति की सिफारिशें सरकारी दफ्तरों में धूल फांक रही हैं। अगर भंडारा हादसे के बाद बनी समिति के सुरक्षा सुझावों को लागू किया गया होता, तो आज अमरावती में 3 मासूमों की जान नहीं जाती।”
सत्ता पक्ष के अपनों ने भी उठाए सवाल
सत्ताधारी बीजेपी की सहयोगी पार्टी के स्थानीय विधायक रवि राणा ने भी सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लगभग तीन साल पहले भी इसी अस्पताल में आग लगी थी। नई इमारत में शिफ्ट होने के बावजूद दोबारा ऐसा हादसा होना डॉक्टरों और प्रशासनिक कर्मचारियों की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
इसे भी पढ़े : “रेवंत रेड्डी US यात्रा” यात्रा रोकने पर घमासान,
स्वास्थ्य मंत्री ने किया बचाव: ‘कर्मचारियों ने बच्चों को बचाने में झोंकी ताकत’
विपक्ष की चौतरफा घेरेबंदी के बीच महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाशराव अबितकर ने मेडिकल स्टाफ और अस्पताल कर्मचारियों की कोशिशों का बचाव किया।
कर्मचारियों का प्रयास: स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आग लगने के तुरंत बाद अस्पताल स्टाफ ने वेंटिलेटर सपोर्ट पर मौजूद बच्चों को सुरक्षित निकालने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली।
36 मासूमों की बची जान: कर्मचारियों और रेस्क्यू टीम के त्वरित कदम की बदौलत ही 36 बच्चों को सुरक्षित बचाना संभव हो सका।
इस बीच शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे और राज्य मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने भी इस हादसे पर दुख व्यक्त किया। चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए महाराष्ट्र के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों का फायर एंड इलेक्ट्रिकल सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य रूप से कराया जाएगा।
इसे भी पढ़े : “मणिपुर हिंसा समाचार” दो घरों में आगजनी के बाद गोलीबारी,
जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी
अमरावती जिला अस्पताल की इस त्रासदी ने एक बार फिर हमारे सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा ढांचे (Healthcare Infrastructure) की सुरक्षा पोल खोल कर रख दी है। वेंटिलेटर धमाका हो या शॉर्ट सर्किट, सबसे बड़ा सवाल यही है कि नवजात शिशुओं के सुरक्षा वार्डों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी क्यों की गई?
अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री के आदेश के बाद जांच टीम कितनी जल्दी दोषियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई करती है। शॉर्ट सर्किट की आशंका, राहत-बचाव कार्य और जांच टीम के गठन के बीच जानें अमरावती अस्पताल आग की पूरी इनसाइड स्टोरी मरीजों की सुरक्षा और दमकल विभाग की कार्रवाई के बीच फिर चर्चा में आया अमरावती अस्पताल आग मामला
इसे भी पढ़े : “अजीत डोभाल चीन दौरा” चीनी विदेश मंत्री वांग यी से करेंगे 25वें दौर की चर्चा



Post Comment