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 “मणिपुर हिंसा समाचार” दो घरों में आगजनी के बाद गोलीबारी,

मणिपुर हिंसा समाचार

मणिपुर हिंसा समाचार पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में शांति स्थापित करने के प्रयासों के बीच सोमवार तड़के हिंसा की एक नई वारदात सामने आई है। राज्य के कांगपोकपी और सेनापति जिलों के सीमावर्ती इलाकों में अज्ञात उपद्रवियों ने दो अलग-अलग समुदायों के घरों को आग के हवाले कर दिया। आगजनी की इस घटना के बाद शुरू हुई गोलीबारी में सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) का एक जवान पैर में गोली लगने से घायल हो गया है।

इस घटना के विरोध में स्थानीय निवासियों और युवाओं ने सेनापति गेट के पास नेशनल हाईवे-2 (इम्फाल-दीमापुर रोड) पर टायर और लकड़ी के लट्ठे जलाकर यातायात पूरी तरह ठप कर दिया।

तड़के शुरू हुआ आगजनी का तांडव, पोउमाई नागा और कुकी परिवार के घर फूंके

सुरक्षा बलों से मिली जानकारी के अनुसार, हिंसा का दौर सोमवार सुबह तड़के शुरू हुआ जब अज्ञात हथियारबंद लोगों के एक समूह ने कांगपोकपी जिले के तापहोउ कुकी गांव में स्थित एक मकान को आग लगा दी।

इस घटना के कुछ ही समय बाद, पास ही स्थित सेनापति जिले के तापहोउ नागा गांव में भी एक दूसरे मकान को निशाना बनाते हुए आगजनी की गई।

पहला घर: कुकी समुदाय से जुड़े परिवार का था।

दूसरा घर: पोउमाई समुदाय (नागा समुदाय की एक उप-जाति) का था।

अलग-अलग समुदायों के घरों में हुई आगजनी की खबर फैलते ही इलाके में भारी तनाव व्याप्त हो गया और देखते ही देखते दो गुटों के बीच सुबह करीब 9 बजे भीषण गोलीबारी शुरू हो गई।

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गोलीबारी के दौरान CRPF जवान घायल; सुरक्षा बल तैनात

घटनास्थल पर स्थिति को नियंत्रित करने पहुंची सुरक्षा बलों की टुकड़ियों पर भी उपद्रवियों ने फायरिंग की। इस दौरान ड्यूटी पर तैनात एक CRPF जवान के पैर में गोली लग गई।

इलाज की स्थिति: घायल जवान को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार, जवान की स्थिति फिलहाल खतरे से बाहर है और उसका इलाज जारी है।

अतिरिक्त बल तैनात: इलाके में और ज्यादा हिंसा न भड़के, इसके लिए असम राइफल्स, सीआरपीएफ और मणिपुर पुलिस की अतिरिक्त टुकड़ियों को फ्लैग मार्च के लिए तैनात कर दिया गया है।

’24 घंटे में स्वीकार करें जिम्मेदारी’: तापहोउ कुकी विलेज अथॉरिटी की चेतावनी

तापहोउ कुकी विलेज अथॉरिटी ने अपने गांव में हुई आगजनी की घटना पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए एक कड़ा बयान जारी किया है। संगठन ने इस हमले को “बेहद निंदनीय, अमानवीय और पूरी तरह अस्वीकार्य” करार दिया।

विलेज अथॉरिटी ने जिला प्रशासन और राज्य पुलिस से मांग की है कि:

पूरे मामले की निष्पक्ष जांच तुरंत शुरू की जाए।

आगजनी और हमले में शामिल दोषियों की तुरंत पहचान की जाए।

24 घंटे का अल्टीमेटम: विलेज अथॉरिटी ने घटना में शामिल उपद्रवियों को 24 घंटे की समय-सीमा देते हुए कहा है कि वे अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करें, अन्यथा सामुदायिक कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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    नेशनल हाईवे 2 पर प्रदर्शन और यात्री वाहनों की आवाजाही

    हिंसा की घटना के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने सेनापति मुख्यालय के पास इम्फाल-दीमापुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-2) को अवरुद्ध कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर टायर जलाकर और मलबा डालकर गाड़ियों की आवाजाही रोक दी।

    सरकार के दखल से बहाल हुआ ट्रैफिक

    मणिपुर सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने तुरंत हस्तक्षेप किया।

    वार्ता के बाद स्थानीय लोग हाईवे से हटने पर सहमत हुए और दोपहर करीब 1 बजे के आसपास वाहनों का आवागमन फिर शुरू कराया जा सका।

    250 यात्रियों का काफिला रवाना: भारी सुरक्षा घेरे और रोड-ओपनिंग पार्टियों (ROP) की मौजूदगी में 5 बसों और 7 विंगर गाड़ियों के काफिले को लगभग 250 यात्रियों (जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल थे) के साथ इंफाल से दीमापुर और गुवाहाटी के लिए रवाना किया गया।

    रविवार को गुवाहाटी से चले 100 से अधिक यात्री भी सोमवार दोपहर सुरक्षित इंफाल पहुंच गए।

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    नागा और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच पहले से जारी है तनाव

    उल्लेखनीय है कि 13 मई को नोनी और कांगपोकपी जिलों में हुए दो अलग-अलग हमलों के बाद से ही क्षेत्र में नागा और कुकी समुदायों के बीच तनाव बना हुआ है। उस दौरान तीन चर्च नेताओं और एक नागा नागरिक सहित चार लोगों की जान चली गई थी।

    एनआईए (NIA) कर रही जांच: इसके बाद भड़की हिंसा में दोनों पक्षों ने दर्जनों लोगों को बंधक बना लिया था। बाद में कांगपोकपी जिले के खराम वाइफेई गांव के पास छह नागा पुरुषों के शव बरामद हुए थे।

    गिरफ्तारियां: इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही है, जिसने जुलाई महीने में एक दंपत्ति समेत चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

    फिलहाल, प्रशासन का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है और संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी तरह की अफवाह या अप्रिय घटना को रोका जा सके। सुरक्षा बलों की गश्त, शांति बहाली की कोशिशों और प्रशासनिक निगरानी के बीच फिर गरमाया मणिपुर हिंसा समाचार विस्थापितों के पुनर्वास, राहत शिविरों की स्थिति और कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच जानें मणिपुर हिंसा समाचार की पूरी इनसाइड स्टोरी

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