Loading Now

“मोहन भागवत न्यूयॉर्क दौरा” न्यूयॉर्क और टोरंटो में RSS प्रमुख का बड़ा बयान;

मोहन भागवत न्यूयॉर्क दौरा

मोहन भागवत न्यूयॉर्क दौरा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के हालिया अमेरिका और कनाडा दौरे ने वैश्विक स्तर पर बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संदेश दिया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संघ की विचारधारा को लेकर उठ रहे सवालों और आलोचनाओं के बीच न्यूयॉर्क और टोरंटो में आयोजित कार्यक्रमों को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने स्पष्ट कहा कि भारत में मुसलमानों का पूरा हक है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत किसी देश को दबाने वाली ‘महाशक्ति’ नहीं, बल्कि निस्वार्थ सेवा और ज्ञान का प्रसार करने वाला ‘विश्वगुरु’ है।

“जो मुसलमानों को स्वीकार न करे, वह हिंदू नहीं”: न्यूयॉर्क में भागवत का स्पष्ट संदेश

न्यूयॉर्क में मैडिसन स्क्वायर गार्डन और आसपास के कार्यक्रमों के दौरान आरएसएस प्रमुख का दौरा अंतरराष्ट्रीय मीडिया की निगरानी में था। ‘यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम’ (USCIRF) और स्थानीय नेताओं द्वारा संघ की विचारधारा पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए भागवत ने ‘हिंदू राष्ट्र’ की परिभाषा को बिल्कुल साफ शब्दों में प्रस्तुत किया।

मुसलमानों के अस्तित्व पर बड़ा बयान: भागवत ने स्पष्ट किया, “अगर कोई हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह व्यक्ति हिंदू ही नहीं रह जाता।” उन्होंने जोर देकर कहा कि संघ की ‘हिंदू राष्ट्र’ की अवधारणा समावेशी है, न कि किसी को बाहर रखने वाली।

अंतरराष्ट्रीय सवालों का जवाब: इस दौरे के दौरान संघ के वैश्विक दृष्टिकोण और भारत के अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर उठ रही चिंताओं पर विराम लगाते हुए भागवत ने कहा कि विविधता को स्वीकारना और उसका सम्मान करना ही भारत की असली पहचान है।

इसे भी पढ़े  : “NLSIU दीक्षांत समारोह रद्द” बेंगलुरु ने रद्द किया 34वां सालाना दीक्षांत समारोह

“भारत महाशक्ति नहीं, विश्वगुरु है”: टोरंटो में दिया सभ्यतागत DNA का हवाला

कनाडा के टोरंटो में ‘हिंदू विश्व बंधु – दोस्ती के साथ दुनिया को अपनाएं’ विषय पर बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा कि भारत ने कभी भी किसी देश पर कब्जे या प्रभुत्व की नीयत से काम नहीं किया।

शरण देने की ऐतिहासिक परंपरा: भागवत ने कहा कि दुनिया में जब भी किसी समुदाय या धर्म पर अत्याचार हुआ, उसे भारत में बिना किसी भेदभाव के शरण मिली। उन्होंने इतिहास का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जामनगर के महाराजा ने पोलिश शरणार्थियों को आश्रय दिया था। उन्होंने कहा कि यह सिलसिला आज भी जारी है।

संकट में दुनिया की मदद: भागवत ने मध्य पूर्व में हुए युद्ध का उदाहरण देते हुए याद दिलाया कि भारत के सैन्य विमानों ने केवल भारतीय नागरिकों को ही नहीं निकाला, बल्कि संकट में फंसे अन्य सात देशों के नागरिकों को भी सुरक्षित बाहर निकाला।

साम्राज्यवाद के खिलाफ भारत का ज्ञान पथ: उन्होंने कहा कि भारतीय पूर्वज मेक्सिको से लेकर साइबेरिया तक गए, लेकिन उन्होंने हथियारों के बल पर किसी देश को नहीं जीता, बल्कि आयुर्वेद, खगोल विज्ञान, गणित और मानवीय मूल्य सिखाए।

‘वसुधैव कुटुंबकम’ और हिंदू शब्द का व्यापक अर्थ

टोरंटो में अपने संबोधन में आरएसएस प्रमुख ने ‘हिंदू’ शब्द के संकीर्ण अर्थों को खारिज करते हुए इसे एक व्यापक और सर्वसमावेशी जीवनशैली बताया।

किसी खास पूजा-पद्धति से परे: उन्होंने कहा कि ‘हिंदू’ शब्द को किसी एक भाषा, पूजा-पद्धति या खास जीवनशैली में नहीं बांधा जा सकता। हिंदू दर्शन सभी का सम्मान करता है और सभी को सहर्ष स्वीकार करता है।

विविधता में एकता: भागवत के अनुसार, प्रकृति विविधता से भरी है और यही इसकी सुंदरता है। एकता ही अंतिम सत्य है। भारत की प्राचीन सोच हमेशा से ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (पूरी पृथ्वी ही एक परिवार है) के सिद्धांत पर आधारित रही है।

इसे भी पढ़े  :बांद्रा हिट एंड रन” जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले 8 साल के मासूम में मौत;

संघ की दूसरी शताब्दी में नई दिशा का संकेत

अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे करने जा रहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख का यह बयान एक नई वैश्विक दिशा का संकेत देता है। भागवत ने साफ किया कि भारत का सभ्यतागत DNA सार्वभौमिक मित्रता, शांतिपूर्ण सहअस्तित्व और शरण देने की भावना में रचा-बसा है।

उन्होंने कहा कि विविधता का जश्न मनाना और संकट में फंसे लोगों की बिना मांगे मदद करना भारत का स्वाभाविक स्वभाव है। यही कारण है कि दुनिया आज भी भारत को एक महाशक्तिशाली सैन्यवाद के रूप में नहीं, बल्कि मार्गदर्शन देने वाले ‘विश्वगुरु’ के रूप में देखती है।

इसे भी पढ़े  :कांग्रेस बीजेपी दलित राजनीति”रामलीला मैदान में ‘शुद्धिकरण’ पर घमासान

न्यूयॉर्क से लेकर टोरंटो तक मोहन भागवत के बयानों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठ रहे विवादों और आशंकाओं का सीधा जवाब दिया है। भारत के मुसलमानों के अधिकारों की पैरवी करने से लेकर ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के विचार को मजबूत करने तक, RSS प्रमुख का यह दौरा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के सर्वसमावेशी दृष्टिकोण को स्थापित करने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

इसे भी पढ़े  :नेपाल बाढ़ जस्टिस शिवज्ञानम” बार एसोसिएशन ने CJI ने PMO को लिखा पत्र,

Spread the love

Post Comment

You May Have Missed