“लालबाग कब्बन पार्क” से जुड़ा ‘पार्क एक्ट संशोधन बिल’ वापस लिया;
लालबाग कब्बन पार्क नागरिकों, पर्यावरणविदों और विपक्षी दलों के जबरदस्त विरोध और जनआक्रोश के सामने कर्नाटक सरकार को आखिरकार कदम पीछे खींचने पड़े हैं। राज्य सरकार ने बहुचर्चित और विवादित ‘कर्नाटक सरकारी पार्क (संरक्षण) (संशोधन) विधेयक’ को वापस लेने का आधिकारिक फैसला किया है।
इस विधेयक का सबसे अधिक विरोध इसलिए हो रहा था क्योंकि इसके लागू होने से बेंगलुरु के मशहूर लालबाग, कब्बन पार्क और शहर के अन्य ऐतिहासिक हरे-भरे क्षेत्रों के अस्तित्व पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही थी।
कैबिनेट बैठक के बाद सरकार ने स्पष्ट किया कि विधेयक को फिलहाल वापस लिया जा रहा है और जनता तथा हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद इसे आगामी विधानसभा सत्र में नए सिरे से पेश किया जाएगा।
क्या था पार्क एक्ट संशोधन बिल और क्यों हुआ विरोध?
यह संशोधन विधेयक 24 अगस्त को विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान बिना किसी गंभीर बहस के जल्दबाजी में पारित कर दिया गया था और बाद में मंजूरी के लिए राज्यपाल को भेजा गया था।
5 प्रतिशत जमीन का इस्तेमाल: इस विधेयक का सबसे विवादास्पद प्रावधान यह था कि सरकार को सुरक्षित सरकारी पार्कों की कुल जमीन के 5 प्रतिशत हिस्से का इस्तेमाल सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और यूटिलिटी प्रोजेक्ट्स के लिए करने की कानूनी अनुमति मिल जाती।
पिछली तारीख से मंजूरी (Retrospective Approval): बिल के प्रावधानों के तहत अतीत में किए गए कुछ सार्वजनिक निर्माण कार्यों को भी पिछली तारीख से कानूनी वैधता प्रदान करने की योजना थी।
पर्यावरण समूहों और बेंगलुरु के निवासियों का तर्क था कि 5 प्रतिशत की छूट मिलने से धीरे-धीरे शहर के फेफड़े कहे जाने वाले पार्कों का कंक्रीटीकरण हो जाएगा और लालबाग तथा कब्बन पार्क जैसी ऐतिहासिक धरोहरों का क्षेत्रफल घटने लगेगा।
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विवादित टनल रोड प्रोजेक्ट से कनेक्शन
आलोचकों और विपक्षी दलों का स्पष्ट आरोप था कि इस विधेयक को मुख्य रूप से बेंगलुरु के बहुचर्चित और महत्वाकांक्षी ‘टनल रोड प्रोजेक्ट’ (Tunnel Road Project) की राह में आने वाली कानूनी अड़चनों को दूर करने के लिए लाया गया था।
मार्ग और प्रस्ताव: यह टनल रोड प्रोजेक्ट उत्तरी बेंगलुरु के हेब्बल को दक्षिण-पूर्व के सेंट्रल सिल्क बोर्ड से जोड़ने के लिए प्रस्तावित है।
लालबाग पर प्रभाव: जियोटेक्निकल रिपोर्टों और परियोजना प्रस्तावों के अनुसार, इस टनल प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए ऐतिहासिक लालबाग की लगभग छह एकड़ जमीन की अस्थायी रूप से और एक एकड़ जमीन की स्थायी रूप से आवश्यकता होगी।
सरकार का रुख: “पार्कों की सुरक्षा का ध्यान रखेंगे” – डी.के. शिवकुमार
कैबिनेट के फैसले के बाद उपमुख्यमंत्री एवं बेंगलुरु विकास मंत्री डी.के. शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि सरकार का मकसद किसी भी प्रकार का भ्रम या डर पैदा करना नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्क की जमीन से जुड़े सवालों पर किसी को भी घबराने की जरूरत नहीं है और वे अच्छी तरह जानते हैं कि पार्कों की सुरक्षा कैसे की जाती है।
पुरानी फाइलों की जांच: उन्होंने कहा कि सरकार इस बात की गहन समीक्षा करेगी कि पार्क की 5 प्रतिशत जमीन का उपयोग करने का प्रस्ताव क्यों लाया गया था, पिछली सरकारों के दौरान किस-किस प्रोजेक्ट को पार्क की जमीन दी गई थी और मेट्रो आदि के लिए कितनी जमीन हस्तांतरित हुई थी।
विपक्ष पर साधा निशाना: शिवकुमार ने विधानसभा सत्र के दौरान बहस में हिस्सा न लेने के लिए विपक्ष (भाजपा-जदएस) की आलोचना की और कहा कि वे केवल विरोध प्रदर्शन में व्यस्त थे। उन्होंने कहा, “मैं अड़ियल नहीं हूं। यदि विपक्ष के पास कोई बेहतर सुझाव है, तो हम उस पर विचार करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।”
चार नए लालबाग बनाने का दावा: मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि राज्य सरकार बेंगलुरु के चारों कोनों में लालबाग की तर्ज पर चार नए विशाल पार्क विकसित करने की योजना बना रही है।
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अगले विधानसभा सत्र में फिर से होगा पेश
प्रस्तावित संशोधनों पर उठे विवाद और कैबिनेट के फैसले के बाद, सरकार जल्द ही एक विशेष विधायी सत्र या आगामी नियमित सत्र में इस विधेयक को नए सिरे से पेश करेगी। इससे पहले नागरिकों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं, नागरिक निकायों और राजनीतिक दलों से सुझाव मांगे जाएंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जनहित और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बना रहे।
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कर्नाटक सरकार द्वारा ‘पार्क संरक्षण संशोधन विधेयक’ को वापस लेने का फैसला बेंगलुरु के पर्यावरण और सार्वजनिक स्थलों को बचाने की दिशा में नागरिक एकजुटता की एक बड़ी जीत माना जा रहा है। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि शहरी विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की योजना बनाते समय पर्यावरण के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा को अनदेखा नहीं किया जा सकता।
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