“कोंडा सुरेखा रेवंत रेड्डी” मंत्री पद से हटाई गईं तेलंगाना राजनीति में भूचाल
तेलंगाना की राजनीति और सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी में अंदरूनी कलह चरम पर पहुंच गई है। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की सिफारिश के बाद राज्य की वन, पर्यावरण एवं बंदोबस्त (Endowments) मंत्री कोंडा सुरेखा को तत्काल प्रभाव से मंत्रिपरिषद से हटा दिया गया है।
सुरेखा को कैबिनेट से हटाने की सिफारिश आधिकारिक तौर पर राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला को भेज दी गई है। यह पूरी कार्रवाई सुरेखा की बेटी कोंडा सुष्मिता पटेल द्वारा मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर किए गए तीखे राजनीतिक हमलों और पार्टी के भीतर उठे विवाद के बाद हुई है।
मंत्रिमंडल से बर्खास्त किए जाने के बाद कोंडा सुरेखा ने आक्रामक रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर “पुरानी रंजिश निकालने” और कांग्रेस आलाकमान को ब्लैकमेल करने का गंभीर आरोप लगाया है।
“बेटी की व्यक्तिगत राय की सजा मुझे क्यों?”: सुरेखा का तर्क
कैबिनेट से हटाए जाने के बाद मीडिया और सोशल मीडिया (X) पर अपना पक्ष रखते हुए सुरेखा ने कहा कि एक वयस्क (बाप-बेटी या मां-बेटी) की व्यक्तिगत राजनीतिक राय के लिए उसकी मां को दंडित करना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण और साज़िश का हिस्सा है।
पार्टी आलाकमान पर दबाव का आरोप: सुरेखा ने दावा किया कि दिल्ली में कांग्रेस का आलाकमान उन्हें हटाने के पक्ष में नहीं था। उन्होंने कहा, “मुझे 100% पता है कि आलाकमान मुझे नहीं हटाना चाहता था। लेकिन मुख्यमंत्री ने ब्लैकमेल की राजनीति की और धमकी दी कि अगर मुझे नहीं हटाया गया तो वे पद छोड़ देंगे।”
अतीत के नेताओं का उदाहरण: उन्होंने तर्क दिया कि अतीत में मल्लु रवि, रोसैया और जयपाल रेड्डी जैसे कई नेताओं ने इंदिरा गांधी और राजीव गांधी जैसे शीर्ष नेतृत्व की सार्वजनिक रूप से आलोचना की थी, फिर भी उन पर इतनी कठोर कार्रवाई नहीं हुई।
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कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद? (कोंडा सुष्मिता की टिप्पणी)
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब सुरेखा की बेटी कोंडा सुष्मिता पटेल ने पार्कल विधानसभा क्षेत्र में मौजूदा विधायक रेवुरी प्रकाश रेड्डी को मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए समर्थन पर खुलकर सवाल उठाए। सुष्मिता खुद पार्कल सीट से कांग्रेस के टिकट की दावेदार थीं।
मुख्यमंत्री पर तीखे हमले: सुष्मिता ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर “घमंडी” होने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्कल “कोंडा परिवार का गढ़” है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा, “दो साल इंतजार क्यों करें? अभी इस्तीफा देकर चुनाव लड़ें, वहां से विधायक तो मैं ही बनूंगी।”
जमीन और शेल कंपनियों के आरोप: सुष्मिता ने मुख्यमंत्री और उनके भाइयों पर राज्य के संसाधनों का दुरुपयोग करने, 200 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन और शेल कंपनियों से जुड़े गंभीर आरोप लगाए। साथ ही उन्होंने कापू और पद्मशाली समुदाय के स्वाभिमान का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वे खेती और बुनाई जानते हैं, लेकिन किसी की “गुलामी” नहीं करेंगे।
इन बयानों के बाद तेलंगाना कांग्रेस के कई विधायकों ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की, जिसके बाद सुरेखा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
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आलाकमान को लिखे गोपनीय पत्र और पेन ड्राइव का खुलासा
कैबिनेट से हटाए जाने वाले दिन ही सुरेखा द्वारा 23 अगस्त को कांग्रेस के शीर्ष नेताओं—मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल—को लिखे गए पत्र सार्वजनिक हो गए।
प्रशासनिक उपेक्षा का आरोप: सुरेखा ने आरोप लगाया कि एक पिछड़ा वर्ग (BC) महिला मंत्री होने के नाते उन्हें लगातार दरकिनार किया जा रहा था। उनके विभागों (वन और बंदोबस्त) के फैसले उनसे सलाह लिए बिना सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से लिए जा रहे थे।
साक्ष्य के रूप में पेन ड्राइव: इन पत्रों के साथ सुरेखा ने कांग्रेस नेतृत्व को एक पेन ड्राइव भी भेजी थी, जिसमें उनके दावों का समर्थन करने वाले वीडियो और अन्य आवश्यक दस्तावेज मौजूद थे।
“कांग्रेस में ही रहूंगी, पार्टी छोड़ने का इरादा नहीं”
पद से हटाए जाने के बावजूद कोंडा सुरेखा ने साफ कर दिया है कि वे कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा नहीं देंगी। उन्होंने कहा कि उनका और उनके पति का पार्टी में लगभग 30 साल का लंबा सफर रहा है। वे विधायक के रूप में जनता की सेवा करती रहेंगी। जब उनसे पूछा गया कि क्या वे दिल्ली जाकर राहुल गांधी से मुलाकात करेंगी, तो उन्होंने कहा कि अब इसका कोई फायदा नहीं है।
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बोर्ड और आयोगों में बड़े स्तर पर फेरबदल
सुरेखा को हटाने के साथ ही तेलंगाना सरकार ने प्रमुख वैधानिक निकायों में भी प्रशासनिक फेरबदल किए हैं:
योजना बोर्ड: जी. चिन्ना रेड्डी को हटाकर गडवाल विजयलक्ष्मी को तेलंगाना योजना बोर्ड का नया उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
महिला आयोग: नेरेला शारदा को हैदराबाद में ‘तेलंगाना राज्य महिला आयोग’ की नई अध्यक्ष के रूप में मंजूरी दी गई है।
KUDA अध्यक्ष: राज्यसभा की पूर्व सदस्य सुधा रानी को ‘काकतीय शहरी विकास प्राधिकरण’ (KUDA) की कमान सौंपी गई है।
तेलंगाना में कोंडा सुरेखा को मंत्रिमंडल से बाहर किए जाने का यह फैसला राज्य कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी गुटबाजी और खींचतान को उजागर करता है। जहां मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने पार्टी अनुशासन का कड़ा संदेश देने की कोशिश की है, वहीं सुरेखा का यह निष्कासन आगामी दिनों में राज्य की पिछड़ा वर्ग (BC) राजनीति और कांग्रेस के आंतरिक संतुलन पर गहरा असर डाल सकता है।
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