“कॉकरोच जनता पार्टी बंटवारा” मनीष ब्रह्मभट्ट ने CJP-D लॉन्च की।
कॉकरोच जनता पार्टी बंटवारा भारतीय राजनीति में राजनीतिक दलों का विभाजन कोई नई बात नहीं है, लेकिन व्यंग्यात्मक और छात्र आंदोलनों के इतिहास में एक अनोखा मोड़ देखने को मिला है। हाल ही में पेपर लीक के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों से चर्चा में आई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) दो हिस्सों में बंट गई है।
गुरुवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष ब्रह्मभट्ट ने मौजूदा नेतृत्व से असंतोष जताते हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी-डेमोक्रेटिक’ (CJP-D) के गठन की औपचारिक घोषणा की।
ब्रह्मभट्ट ने CJP के मुख्य चेहरा अभिजीत दिपके और उनकी टीम पर आंदोलन की अभूतपूर्व सफलता के बाद उसे “बेच देने” और इसका राजनीतिकरण करने का सीधा आरोप लगाया है।
“CJP अब ‘टीम केजरीवाल’ बन चुकी है”: मनीष ब्रह्मभट्ट का हमला
नया गुट लॉन्च करते हुए मनीष ब्रह्मभट्ट ने मीडिया के सामने तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिस आंदोलन को देश के हजारों छात्रों और वॉलंटियर्स ने अपने खून-पसीने से सींचा था, उसे मुख्य नेतृत्व ने अपने निजी व राजनीतिक स्वार्थों के लिए भुना लिया है।
12 सदस्यीय टीम पर विवाद: ब्रह्मभट्ट ने CJP की 12 सदस्यीय नई कार्यकारी समिति के गठन की प्रक्रिया पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस टीम को बनाते समय जमीनी स्तर पर प्रदर्शन करने वाले छात्रों, वॉलंटियर्स या सोशल मीडिया समर्थकों से कोई सलाह नहीं ली गई।
आम आदमी पार्टी से जुड़ाव का दावा: उन्होंने आरोप लगाया कि नई गठित 12 सदस्यीय टीम में से आठ सदस्य सीधे तौर पर आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़े हुए हैं, जबकि बाकी सदस्य मुख्य नेतृत्व की महिला मित्र और कॉलेज के दोस्त हैं।
अरविंद केजरीवाल पर साधा निशाना: ब्रह्मभट्ट ने इस पूरी चयन प्रक्रिया के पीछे दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का हाथ होने का दावा किया। उन्होंने कहा, “इस तरह की मनमानी टीम बनाने का विचार अरविंद केजरीवाल का ही था। वे अन्ना आंदोलन के समय से ही धोखेबाजी की राजनीति करते आए हैं और अब CJP को भी ‘टीम केजरीवाल’ में बदल दिया गया है।”
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‘CJP-डेमोक्रेटिक’ की क्या है मांग और कार्ययोजना?
मनीष ब्रह्मभट्ट ने कहा कि उनकी नई पार्टी ‘CJP-D’ आंदोलन के मूल सिद्धांतों और लोकतांत्रिक मूल्यों को वापस लाने के लिए काम करेगी।
राष्ट्रीय स्तर का प्रतिनिधित्व: ब्रह्मभट्ट का कहना है कि CJP का ढांचा किसी बंद कमरे या मनमाने ‘हाई कमान’ से तय नहीं होना चाहिए। वे चाहते थे कि हर राज्य से कम से कम पांच जमीनी वॉलंटियर्स और प्रदर्शनकारियों को मिलाकर एक पारदर्शी राष्ट्रीय टीम बनाई जाए।
वॉलंटियर्स का सम्मान: उन्होंने जोर देकर कहा कि जिन क्षेत्रों में पेपर लीक के खिलाफ सबसे उग्र प्रदर्शन हुए, वहां के युवाओं को संगठन में प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी, न कि राजनीतिक रसूखदारों को।
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पेपर लीक आंदोलन और CJP का राजनीतिक प्रभाव
यह राजनीतिक फूट ऐसे समय में आई है जब CJP के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी थी।
शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: CJP द्वारा पेपर लीक के खिलाफ चलाए गए आक्रामक अभियान और जनसमर्थन के दबाव के कारण ही धर्मेंद्र प्रधान को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला: CJP ने 5 सितंबर को प्रस्तावित अपना राष्ट्रव्यापी मार्च तब रद्द कर दिया था, जब सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर (FIR) को रद्द करने का ऐतिहासिक आदेश दिया था।
आंदोलन की बड़ी सफलताओं के तुरंत बाद CJP के भीतर पैदा हुआ यह विवाद यह दर्शाता है कि किसी भी गैर-राजनीतिक या व्यंग्यात्मक आंदोलन को राजनीतिक रूप से संगठित करना कितना चुनौतीपूर्ण होता है।
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एक तरफ जहां अभिजीत दिपके का मुख्य गुट अपनी रणनीति पर आगे बढ़ रहा है, वहीं मनीष ब्रह्मभट्ट का ‘CJP-डेमोक्रेटिक’ गुट आंदोलन के वास्तविक वॉलंटियर्स के अधिकारों की लड़ाई लड़ने का दावा कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि देश के युवा और छात्र किस गुट को अपना असली प्रतिनिधि मानते हैं। चुनाव आयोग में दावों, दोनों धड़ों की बैठकों और नए पार्टी दफ्तरों के ऐलान के बीच जानें कॉकरोच जनता पार्टी बंटवारा की पूरी इनसाइड स्टोरी
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