“एयर इंडिया पायलट टेस्ट” में AAIB की रिपोर्ट पर सख्त कार्रवाई
एविएशन सेक्टर में सुरक्षा मानकों और क्रू की फिटनेस को लेकर एयर इंडिया ने एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। एयर इंडिया ने फुकेत से दिल्ली आ रही फ़्लाइट AI 2379 के पायलट-इन-कमांड (PIC) को साइकोएक्टिव पदार्थ (नशीले पदार्थ) के टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद तुरंत प्रभाव से नौकरी से निकाल दिया है।
यह कार्रवाई 4 अगस्त को हुई उस गंभीर घटना के ठीक एक महीने बाद की गई है, जिसमें विमान हवा में अचानक 300 फीट नीचे गिर गया था और 24 लोग घायल हो गए थे।
एयरलाइन ने स्पष्ट किया कि यात्रियों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता और ‘ज़ीरो-टॉलरेंस‘ नीति के तहत संबंधित 34 वर्षीय कैप्टन की सेवाएं तत्काल समाप्त कर दी गई हैं।
4 अगस्त की घटना: हवा में 300 फीट नीचे गिरा था विमान
4 अगस्त को फुकेत (थाईलैंड) से दिल्ली आ रहा एयरबस A320-251N विमान (रजिस्ट्रेशन VT-EXO) क्रूज़ के दौरान अचानक उथल-पुथल (Turbulence) की चपेट में आ गया। विमान में 137 यात्री (तीन शिशुओं सहित) और 8 क्रू मेंबर (दो पायलट और छह केबिन क्रू) सवार थे।
अचानक ऊंचाई में गिरावट: उड़ान के दौरान विमान की ऊंचाई में लगभग 300 फीट की अचानक गिरावट दर्ज की गई।
24 लोग हुए घायल: विमान जब दिल्ली हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतरा, तो 20 यात्रियों और 4 केबिन क्रू सदस्यों सहित कुल 24 लोगों को चिकित्सा सहायता दी गई। इनमें से चार लोगों को गंभीर चोटें आई थीं।
गंभीर हादसा माना गया: इकट्ठा किए गए साक्ष्यों और यात्रियों को लगी चोटों के आधार पर विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) ने इसे आधिकारिक रूप से एक ‘दुर्घटना’ श्रेणी में दर्ज किया।
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कन्फर्मेटरी टेस्ट में मारिजुआना (गांजा) के इस्तेमाल की पुष्टि
घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय एविएशन नियमों के तहत दोनों पायलटों का अनिवार्य साइकोएक्टिव पदार्थ स्क्रीनिंग टेस्ट किया गया।
लैबोरेटरी जांच का नतीजा: शुरुआत में पायलट-इन-कमांड के सैंपल की और अधिक जांच की आवश्यकता महसूस हुई। इसके बाद जब सैंपल को अधिकृत प्रयोगशाला में भेजा गया, तो कन्फर्मेटरी टेस्ट में मारिजुआना (गांजे) के इस्तेमाल की पुष्टि हुई।
AAIB की सख्त सिफारिश: जांच एजेंसी AAIB ने अपनी 10 पन्नों की शुरुआती रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि किसी कमर्शियल फ़्लाइट के पायलट द्वारा नशीले पदार्थों का सेवन बेहद “गंभीर चिंता का विषय” है। एजेंसी ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से प्राथमिकता के आधार पर सख्त कदम उठाने की सिफारिश की।
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उड़ान के दौरान तकनीकी खराबी और को-पायलट की सूझबूझ
जांच में यह भी सामने आया है कि उड़ान के दौरान केवल नशीले पदार्थ का सेवन ही एकमात्र मुद्दा नहीं था, बल्कि कई तकनीकी गड़बड़ियां भी दर्ज की गईं:
ऑटोपायलट का बंद होना: उड़ान के दौरान अचानक ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट हो गया और विमान के तीन हाइड्रोलिक सिस्टम फेल हो गए। इसके साथ ही फ़्लाइट-कंट्रोल स्टॉल की चेतावनी भी जारी हुई।
को-पायलट ने संभाली कमान: सिस्टम फेल होने के बाद जब विमान पर से नियंत्रण खोने की स्थिति बनी, तब को-पायलट ने तुरंत मैन्युअल कंट्रोल संभालकर विमान को स्थिर किया और दिल्ली में सुरक्षित लैंड कराया।
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की मदद: फ्रांस की विमान दुर्घटना जांच एजेंसी BEA और एयरबस के तकनीकी प्रतिनिधि इस पूरी घटना की डिजाइन और तकनीकी पहलुओं से जांच करने में AAIB की मदद कर रहे हैं।
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एयर इंडिया का आधिकारिक रुख: सुरक्षा ही सर्वोच्च प्राथमिकता
घटनाक्रम के बाद एयर इंडिया ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल (X) पर पोस्ट करते हुए अपनी नीति साफ की:
“सुरक्षा एयर इंडिया की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। फुकेत-दिल्ली फ़्लाइट का पायलट-इन-कमांड साइकोएक्टिव पदार्थ के टेस्ट में पॉजिटिव पाया गया। सुरक्षा, फिटनेस या नियमों के उल्लंघन पर एयर इंडिया के ज़ीरो-टॉलरेंस रुख के अनुसार, पायलट की नौकरी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है।”
उड्डयन क्षेत्र में इस प्रकार का घटनाक्रम पायलटों की शारीरिक और मानसिक फिटनेस के कड़े परीक्षणों की आवश्यकता को रेखांकित करता है। सैकड़ों यात्रियों की जान जोखिम में डालने वाले इस मामले में एयर इंडिया और AAIB द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई से भारतीय एविएशन सेक्टर में सुरक्षा नियमों का पालन कराने का एक कड़ा संदेश गया है।
फिटनेस मूल्यांकन, सिम्युलेटर जांच और क्रू ट्रेनिंग शेड्यूलिंग के बीच जानें एयर इंडिया पायलट टेस्ट की पूरी इनसाइड स्टोरी अनिवार्य है।
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