“शाही मस्जिद विवाद उज्जैन” MP हाईकोर्ट ने याचिकाओं का किया निपटारा,
मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ मेला 2028 की तैयारियों के तहत चलाए जा रहे सड़क चौड़ीकरण अभियान को लेकर बना विवाद अब शांत हो गया है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने शाही मस्जिद के कुछ हिस्सों को हटाने से जुड़ी दो अलग-अलग याचिकाओं को खारिज कर उनका निपटारा कर दिया है।
यह फैसला तब आया जब याचिकाकर्ताओं ने अदालत को सूचित किया कि उनके और उज्जैन नगर निगम (Ujjain Municipal Corporation) के बीच इस मुद्दे पर सहमति और समझौता बन गया है।
न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि समझौता हो जाने के कारण अब इस मामले में आगे सुनवाई की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नगर निगम अपने दिए गए आश्वासनों का कड़ाई से पालन करेगा।
सड़क चौड़ीकरण प्रोजेक्ट और विवाद का पृष्ठभूमि
उज्जैन के कंठल क्रॉसिंग से गोपाल मंदिर तक करीब 900 मीटर लंबे मार्ग को 15 मीटर तक चौड़ा किया जा रहा है। सिंहस्थ कुंभ मेले के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए यह प्रोजेक्ट बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
272 संरचनाएं प्रभावित: इस परियोजना के तहत लगभग 100 साल पुरानी शाही मस्जिद सहित कुल 272 इमारतें और धार्मिक संरचनाएं प्रभावित हो रही हैं।
बजट और योजना: मध्य प्रदेश सरकार ने इस इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए लगभग 9.8 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है।
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विरोध, प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई
सोमवार को मस्जिद के प्रस्तावित हिस्से को हटाने की प्रक्रिया के दौरान कुछ उपद्रवियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जो देखते ही देखते हिंसक हो गया।
पत्थरबाजी और आंसू गैस: असामाजिक तत्वों द्वारा सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी के बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हल्के बल का प्रयोग किया और आंसू गैस के गोले दागे।
कानूनी कार्रवाई: उज्जैन पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा के अनुसार, माहौल खराब करने की कोशिश करने वाले 15 लोगों को हिरासत में लिया गया है तथा 7 लोगों पर एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है। इनमें भड़काऊ बयानबाजी करने वाले सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स भी शामिल हैं। पूरे इलाके में ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है।
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आपसी सहमति से निकाला गया समाधान
विवाद के बीच शहर काज़ी खलील-उर-रहमान और उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह ने स्पष्ट किया कि मामला पूरी तरह से आपसी सहमति से सुलझा लिया गया है।
स्वैच्छिक योगदान: शहर काज़ी ने आम जनता से किसी भी प्रकार की अफ़वाह पर ध्यान न देने की अपील की है। उन्होंने पुष्टि की कि मस्जिद समिति और समुदाय के लोग स्वयं आगे बढ़कर सड़क के अलाइनमेंट में आ रहे छत्री चौक स्थित शाही मस्जिद के हिस्से को हटा रहे हैं।
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मुख्यमंत्री ने कायम की मिसाल: इस विकास कार्य के प्रति जनता का विश्वास बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्वयं अपने पुश्तैनी मकान के उस हिस्से पर कुल्हाड़ी चलाई जो सड़क चौड़ीकरण के दायरे में आ रहा था। उन्होंने संदेश दिया कि शहर के विकास में सभी को अपना योगदान देना चाहिए।
हाल ही में स्थानीय अदालत में दायर नई याचिका के बाद तूल पकड़ा शाही मस्जिद विवाद उज्जैन प्रशासनिक और कानूनी हलकों में गंभीर समीक्षा का विषय बन गया है, जहाँ दोनों पक्षों की ओर से ऐतिहासिक साक्ष्य प्रस्तुत किए जा रहे हैं।
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