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दिल्ली: प्रदूषण का संकट, AQI बेहद खराब के करीब

AQI बेहद खराब

दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र (Delhi-NCR) इस दिवाली प्रदूषण के एक नए संकट के मुहाने पर खड़ा है, जहाँ वायु गुणवत्ता में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 296 है, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी के बेहद करीब है।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली के दौरान हरित पटाखों के इस्तेमाल की सशर्त अनुमति दी है। पिछले साल के मुकाबले इस बार पटाखों के उपयोग में 40% की वृद्धि की आशंका है, जिससे प्रदूषण के स्तर में खतरनाक बढ़ोतरी का डर सता रहा है।

दिल्ली में वायु गुणवत्ता का बिगड़ता ग्राफ चिंताजनक है। रविवार को लगातार छठे दिन AQI ‘खराब’ श्रेणी में रहा, जबकि मौसम संबंधी प्रतिकूल कारकों और पटाखों की बारिश के बीच यह स्तर ‘गंभीर’ होने की आशंका है। शनिवार को राजधानी का AQI 268 था, जो पिछले दो दिनों में दर्ज किए गए 254 और 245 के स्तर से भी अधिक खराब है।

एनसीआर में हाल और भी बुरा: ‘बेहद खराब’ हवा की मार

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के अन्य शहरों का प्रदर्शन और भी खराब रहा है, जहाँ कई स्थानों पर वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में लगातार तीसरे दिन हवा “बेहद खराब” रही। गाजियाबाद में 24 घंटे का औसत AQI शनिवार को 324 (“बेहद खराब”) था, जबकि शुक्रवार को यह 306 और गुरुवार को 307 दर्ज किया गया था।

इस बीच, नोएडा और गाजियाबाद में प्रदूषण का स्तर ‘बेहद खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया। गुरुग्राम में AQI 258 (खराब) और ग्रेटर नोएडा में 248 (खराब) दर्ज किया गया, जबकि फरीदाबाद का AQI “मध्यम” स्तर पर रहा, जो थोड़ी राहत की बात है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला और ‘हरित पटाखों’ पर उम्मीद

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में 18 से 20 अक्टूबर तक दो समय स्लॉट के दौरान CSIR-NEERI (वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद – राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान) प्रमाणित हरे पटाखों की बिक्री और फोड़ने की अनुमति दी है। इन पटाखों को फोड़ने की अनुमति केवल दो समय स्लॉट के दौरान दी गई है: सुबह 6 बजे से 7 बजे तक और रात 8 बजे से 10 बजे तक।

न्यायालय के इस आदेश ने हर साल दिवाली के आसपास दिल्ली-एनसीआर में बढ़ने वाली प्रदूषण की समस्या के प्रबंधन के दृष्टिकोण में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाया है। ‘लोकल सर्किल्स’ के एक अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि इस आदेश से पिछले साल की तुलना में पटाखे जलाने वाले परिवारों की संख्या में 40 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है, जिससे ‘नियमित आतिशबाजी’ की वापसी की आशंका बढ़ गई है।

दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद के 38,000 से अधिक निवासियों के सर्वेक्षण में पाया गया कि इस दिवाली 34 प्रतिशत परिवार पटाखे जलाएँगे, जिनमें से आधे परिवार हरित पटाखों के अलावा नियमित पटाखे भी जला सकते हैं।

अपोलो अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. एस चटर्जी के अनुसार, ग्रीन पटाखे पारंपरिक पटाखों की तुलना में 30% कम प्रदूषण फैलाते हैं। रिपोर्टों से पता चलता है कि ये ग्रीन पटाखे पारंपरिक पटाखों की तुलना में 30-40 प्रतिशत कम कणिका तत्व और सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जित करते हैं।

हालाँकि, प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण, डॉ. चटर्जी ने सलाह दी है कि सांस की समस्या वाले मरीजों के लिए ग्रीन पटाखे भी स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं और पटाखों का इस्तेमाल न करना ही बेहतर है।

अंधेरे में कानून का राज: नियमों को लागू करने की चुनौती

सबसे चिंताजनक बात यह है कि पटाखों को नियंत्रित करने के दिल्ली के पिछले प्रयास बुरी तरह विफल रहे हैं। वर्षों के प्रतिबंध के बावजूद, शहर का आसमान हर दिवाली की रात धूसर हो गया है, क्योंकि बाजारों में AQI बेहद खराब करने वाले अवैध पटाखों की बाढ़ आ गई है।

अधिकारी ग्रीन पटाखा नियमों को कैसे लागू करेंगे?

दिल्ली पुलिस सहित कई एजेंसियों की गश्ती टीमें यह सुनिश्चित करेंगी कि निर्दिष्ट दिनों और समय के दौरान केवल नीरी और पेसो (Petroleum and Explosives Safety Organisation) द्वारा अनुमोदित क्यूआर कोड वाले हरित पटाखे ही जलाए जाएँ।

सभी पुलिस थानों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं, खासकर उन इलाकों में जहाँ नियमों का उल्लंघन होता रहा है। इन नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, और गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए आवासीय और बाज़ार क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल और प्रवर्तन दल तैनात किए जाएँगे।

बाजारों में अवैध पटाखों की भरमार:

टीओआई के पत्रकारों द्वारा एनसीआर में किए गए एक जमीनी जाँच में पाया गया कि प्रमाणित हरित पटाखे—जिनमें लाइसेंस विवरण वाले क्यूआर कोड हैं—मुख्य बाजारों में उपलब्ध हैं। लेकिन प्रतिबंधित पारंपरिक पटाखे भी खुलेआम बेचे जा रहे थे, जिन पर अक्सर हरे रंग के लेबल और नकली क्यूआर कोड लगे होते हैं।

दिल्ली के पुराने लाजपत राय मार्केट, भागीरथ पैलेस, दरीबा कलां और सदर बाजार में, विक्रेताओं ने पटाखों को छिपाने के लिए अस्थायी कवर का इस्तेमाल किया और हरे तथा पारंपरिक पटाखों के बीच अंतर करने के लिए “बच्चों का” और “बड़ा” जैसे कोड शब्दों का इस्तेमाल किया।

नोएडा के आटा मार्केट में, एक विक्रेता ने स्वीकार किया कि ज़्यादातर “ग्रीन” पटाखे नकली थे, जिस पर ‘CSIR-NEERI-India’ का लोगो तो लगा था, लेकिन कोई क्यूआर कोड नहीं था।

गाजियाबाद के इंदिरापुरम में भी सड़क किनारे की दुकानें खुलेआम पारंपरिक पटाखे बेच रही थीं। कई खरीदार, हरित प्रमाणन की परवाह न करते हुए, केवल किस्म और कीमत पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे।

पटाखों का अर्थशास्त्र: शिवकाशी पर प्रतिबंध का असर

भारत की आतिशबाजी अर्थव्यवस्था में पिछले कुछ वर्षों में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है, जो कड़े प्रदूषण नियमों के कारण हुआ है। पारंपरिक पटाखे पार्टिकुलेट मैटर ($\text{PM }2.5$), सल्फर डाइऑक्साइड, और अन्य हानिकारक उत्सर्जन का एक प्रमुख स्रोत रहे हैं।

देश की आतिशबाजी राजधानी के रूप में प्रसिद्ध तमिलनाडु का शिवकाशी, देश भर में बिकने वाले लगभग 90 प्रतिशत पटाखों का निर्माण करता है। भारत में पटाखा उद्योग ₹6,000 करोड़ का है और इसमें 8,000 से ज़्यादा पंजीकृत कारखाने हैं, जो 3,00,000 से ज़्यादा लोगों को सीधे तौर पर रोज़गार देते हैं, जबकि अप्रत्यक्ष रोज़गार 5,00,000 तक फैला हुआ है।

2017 में, सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों में एंटीमनी, लिथियम, पारा, आर्सेनिक, सीसा और स्ट्रोंटियम नाइट्रेट के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया था। 2018 में बेरियम नाइट्रेट जैसे रसायनों पर प्रतिबंध ने पारंपरिक पटाखों के उत्पादन को काफी कम कर दिया, जिससे शिवकाशी के कई उत्पादकों को अपना व्यवसाय बंद करना पड़ा और 2022 में लगभग 1,50,000 लोगों की नौकरियाँ चली गईं।

हरित पटाखों का उदय:

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ‘हरित पटाखों’ के उपयोग की अनुमति दिए जाने के बाद, शिवकाशी के निर्माताओं ने 2018 में विरोध किया, लेकिन बाद में उन्होंने हरित पटाखे बनाने का प्रशिक्षण लिया और उत्पादन फिर से शुरू कर दिया। तमिलनाडु फायरवर्क्स अमोरसेस मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (TANFAMA) के अध्यक्ष पी गणेशन ने दिल्ली-एनसीआर में हरित पटाखों की अनुमति देने के फैसले की सराहना की और कहा कि इससे निर्माताओं को बढ़ावा मिलेगा और लाखों श्रमिकों के लिए अतिरिक्त रोजगार सृजित होंगे, क्योंकि अकेले एनसीआर में भारत के पटाखा बाजार का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा है।

अयोध्या दीपोत्सव 2025 के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की जानकारी भी इस लेख में है, जो दिवाली के दौरान उत्सव और रिकॉर्ड बनाने की भावना को दर्शाती है, भले ही राजधानी में AQI बेहद खराब होने का खतरा हो।

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