बीजेपी सांसद अनंत महाराज से वापस लिया गया सर्वोच्च सम्मान ‘बंगा विभूषण’
पश्चिम बंगाल सरकार ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद नागेंद्र नाथ रॉय, जिन्हें लोकप्रिय रूप से अनंत महाराज के नाम से जाना जाता है, को दिया गया राज्य का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘बंगा विभूषण’ वापस ले लिया है।
यह कठोर कदम स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस, उनके नेतृत्व और आज़ाद हिंद फ़ौज की ऐतिहासिक भूमिका पर सांसद द्वारा की गई अपमानजनक और विवादित टिप्पणियों के बाद उठाया गया है।
राज्य के सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग ने इस संबंध में एक आधिकारिक आदेश जारी करते हुए सम्मान को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। सरकार का कहना है कि नेताजी जैसे राष्ट्रीय नायक पर ऐसी आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद सांसद के पास यह सम्मान बना रहना पुरस्कार की गरिमा, प्रतिष्ठा और मूल उद्देश्यों के विपरीत है।
राज्य सरकार का आदेश और निर्णय का प्रभाव
पश्चिम बंगाल सरकार के सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि ‘बंगा विभूषण’ राज्य का एक अत्यंत प्रतिष्ठित और विशिष्ट नागरिक सम्मान है, जो समाज में अनुकरणीय योगदान देने वाली हस्तियों को प्रदान किया जाता है।
तत्काल प्रभाव से रद्दीकरण: आदेश के अनुसार, सक्षम प्राधिकारी इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि हालिया घटनाक्रम और बयानों के बाद अनंत महाराज के पास इस सम्मान का रहना उचित नहीं है। इसलिए ‘बंगा विभूषण’ को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाता है।
विशेषाधिकारों पर रोक: इस फैसले के बाद अनंत महाराज अब खुद को इस पुरस्कार का प्राप्तकर्ता बताने, इसके नाम का उपयोग करने या इससे जुड़े किसी भी प्रकार के विशेषाधिकार व लाभ का दावा करने के हकदार नहीं होंगे।
सरकारी रिकॉर्ड से नाम हटाने के निर्देश: राज्य सरकार ने संबंधित अधिकारियों और सभी विभागों को निर्देश दिया है कि ‘बंगा विभूषण’ से सम्मानित हस्तियों की आधिकारिक सूची और रिकॉर्ड से नागेंद्र नाथ रॉय (अनंत महाराज) का नाम तुरंत हटा दिया जाए।
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विवाद की मुख्य वजह: नेताजी और आज़ाद हिंद फ़ौज पर विवादित बयान
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब बीजेपी सांसद अनंत महाराज ने एक सार्वजनिक मंच पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस को लेकर बेहद विवादित बयान दिया।
आपत्तिजनक टिप्पणियां: अनंत महाराज ने अपनी टिप्पणियों में नेताजी को “युद्ध अपराधी” करार दिया। इसके साथ ही उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में नेताजी के नेतृत्व और आजाद हिंद फौज (INA) के ऐतिहासिक योगदान पर भी सवाल खड़े किए।
व्यापक जन आक्रोश: इस बयान के सामने आते ही पूरे पश्चिम बंगाल में तीखी राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। नेताजी के प्रति राज्य और देशवासियों की गहरी आस्था के कारण इस टिप्पणी की चौतरफा निंदा हुई। स्थिति को देखते हुए राज्य के कई स्थानीय बीजेपी नेताओं ने भी सांसद के इस बयान से खुद को अलग कर लिया और इसे उनकी व्यक्तिगत राय बताया।
21 फरवरी 2026 को मिला था यह सम्मान
अनंत महाराज को यह नागरिक सम्मान इसी वर्ष 21 फरवरी, 2026 को कोलकाता में अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर आयोजित एक भव्य राज्यस्तरीय समारोह में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार द्वारा प्रदान किया गया था।
सम्मान का आधार: उत्तरी बंगाल के कूचबिहार क्षेत्र से आने वाले अनंत महाराज राजबंशी समुदाय के एक प्रभावशाली सामाजिक और राजनीतिक नेता हैं। उन्हें राजबंशी समुदाय की भाषा, संस्कृति और लोक-परंपराओं के प्रचार-प्रसार में योगदान के लिए यह पुरस्कार दिया गया था।
राजनीतिक पृष्ठभूमि: वर्ष 2023 में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें पश्चिम बंगाल से राज्यसभा के लिए नामित किया था। राजबंशी समुदाय के बीच उनके व्यापक जनाधार को देखते हुए उन्हें यह सम्मान दिया जाना राजनीतिक रूप से काफी चर्चा में रहा था।
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साइबर सेल एक्टिव, सोशल मीडिया पर फर्जीवाड़े और अपमान पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
इस विवाद के बीच राज्य सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के खिलाफ सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने और अपमानजनक सामग्री पोस्ट करने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ में बोलते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि नेताजी का अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कानूनी कार्रवाई की चेतावनी: मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि साइबर सेल सोशल मीडिया पर नेताजी के खिलाफ आपत्तिजनक मीम्स बनाने, भ्रामक तथ्य फैलाने या अपमानजनक पोस्ट करने वालों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करे।
गिरफ्तारी का प्रावधान: सरकार ने चेतावनी दी है कि ऐसे मामलों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी भी की जा सकती है।
सबके लिए एक समान कानून: मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि कानून के समक्ष सभी समान हैं—चाहे वह कोई आम नागरिक हो, सांसद, विधायक, किसी राजनीतिक दल का नेता हो या कोई सरकारी अधिकारी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से संपर्क: राज्य सरकार ने आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने के लिए मेटा (Meta) जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से भी संपर्क किया है। जिन लोगों ने ऐसी टिप्पणियां पोस्ट की हैं, उन्हें तुरंत सामग्री हटाने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के निर्देश दिए गए हैं।
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ऐतिहासिक संदर्भ
नेताजी सुभाष चंद्र बोस न केवल पश्चिम बंगाल बल्कि पूरे भारत की आजादी की लड़ाई के सबसे प्रमुख और आदरणीय नायकों में से एक हैं। उनके और आजाद हिंद फौज के बारे में की गई टिप्पणी को राज्य सरकार ने एक गंभीर अपराध माना है।
‘बंगा विभूषण’ वापस लेने का यह फैसला यह संदेश देता है कि राष्ट्रीय प्रतीकों और स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान से समझौता किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
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