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जम्मू-कश्मीर में शिक्षा: जमात-ए-इस्लामी स्कूलों के अधिग्रहण पर बवाल

जम्मू-कश्मीर में शिक्षा

जम्मू-कश्मीर में शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए, सरकार ने प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी (जेईआई) और उसके सहयोगी संगठन फलाह-ए-आम ट्रस्ट (FAT) से संबद्ध 215 स्कूलों का संचालन अपने हाथ में ले लिया है। यह प्रक्रिया स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश के बाद शुरू हुई, जिसका उद्देश्य 51,000 से अधिक छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करना है। 23 अगस्त, 2025 को, पुलिस कर्मियों सहित अधिकारियों की एक टीम ने इन स्कूलों के “अस्थायी अधिग्रहण” की प्रक्रिया पूरी की, जिसकी वीडियोग्राफी भी की गई और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए। हालांकि, इस कदम ने छात्रों के अभिभावकों और सैकड़ों शिक्षकों के बीच अनिश्चितता और चिंता पैदा कर दी है। बडगाम की एक शिक्षिका ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि स्कूलों के भविष्य को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है – प्रबंध समिति का नामांकन कौन करेगा और छात्र फीस कहाँ जमा करेंगे, इन सवालों का जवाब नहीं है।

सरकार का रुख: अस्थायी अधिग्रहण और सुरक्षा रिपोर्ट

जम्मू-कश्मीर की शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने स्पष्ट किया कि यह अधिग्रहण “अस्थायी” है और इन स्कूलों को उपायुक्तों या जिला मजिस्ट्रेटों के अधीन नहीं लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह कदम पिछले छह वर्षों में आपराधिक जाँच विभाग (सीआईडी) द्वारा दी गई नकारात्मक सत्यापन रिपोर्ट के बाद उठाया गया है, जिसमें स्कूलों के प्रबंधन के खिलाफ गंभीर आरोप थे। सुश्री इट्टू ने कहा, “हमारा इरादा आस-पास के सरकारी स्कूलों के प्रधानाचार्यों द्वारा अस्थायी रूप से कार्यभार संभालने का है। इन स्कूलों में कर्मचारी यथावत रहेंगे। सीआईडी सत्यापन के बाद नई प्रबंधन समितियों का गठन किया जाएगा और तीन महीने बाद इस प्रक्रिया की समीक्षा होगी।” उन्होंने स्कूल शिक्षा सचिव द्वारा जारी पहले के आदेश का भी खंडन किया, जिसमें जिला आयुक्तों को स्कूलों का कामकाज संभालने का निर्देश दिया गया था। सुश्री इट्टू ने कहा कि यह सरकार का प्रस्ताव नहीं था।

विपक्षी दलों की तीखी आलोचना और राजनीतिक प्रतिक्रिया

सरकार के इस फैसले पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने इसे “जम्मू-कश्मीर की पहचान पर हमला” बताया और कहा कि यह क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान पर सीधा हमला है। उन्होंने एफएटी स्कूलों की भूमिका का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने न्यूनतम शुल्क पर गरीब बच्चों को शिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और आधुनिक व इस्लामी शिक्षा का अच्छा संतुलन बनाया है। उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस पर इस फैसले पर चुप रहने का भी आरोप लगाया। जस्टिस एंड डेवलपमेंट फ्रंट (जेडीएफ) जे-के, जो जमात-ए-इस्लामी से अलग हुआ एक गुट है, ने भी इस आदेश की निंदा करते हुए इसे “प्रशासनिक अतिक्रमण” और “न्याय पर गहरा आघात” बताया। जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के प्रमुख अल्ताफ बुखारी ने कहा कि सरकार ने इन स्कूलों का सीधा नियंत्रण लेकर गलती की है, जबकि वह स्पष्ट नियम बनाकर भी अपने अधिकार का प्रयोग कर सकती थी।

सरकार के फैसले का समर्थन और भविष्य की दिशा

जहां एक ओर विपक्ष इस कदम की आलोचना कर रहा है, वहीं भाजपा ने इसका स्वागत किया है। भाजपा प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि “मंत्री ने अलगाववाद के स्रोत के खिलाफ एक साहसिक कदम उठाया है।” उन्होंने आरोप लगाया कि इन स्कूलों ने “बड़े आतंकवादी पैदा किए और पाकिस्तानी झंडे फहराए।” उन्होंने इसे “एकीकरण की दिशा में एक कदम” बताया।

यह अधिग्रहण 2010 के जम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा नियमों के तहत हुआ है, जिन्हें बाद में 2018 और 2022 में संशोधित किया गया था। इस अधिग्रहण के पीछे का मुख्य कारण खुफिया एजेंसियों की प्रतिकूल रिपोर्ट है, जिसमें इन स्कूलों की प्रबंध समितियों की वैधता समाप्त होने की बात कही गई थी। सरकार का मानना है कि इन स्कूलों में जम्मू-कश्मीर में शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने की जरूरत है।

अधिकारियों के अनुसार, पूरी प्रक्रिया छात्रों की शिक्षा में बाधा डाले बिना शांतिपूर्ण ढंग से हुई। अनंतनाग के एक शिक्षक मोहम्मद इशाक ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि पहले उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें लगता है कि सब कुछ सुचारू हो जाएगा। एक छात्रा आलिया इरशाद ने भी उम्मीद जताई कि इससे स्कूल में सुधार होगा और वह समृद्ध होगा। उसने कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि की भी मांग की।

सरकार का कहना है कि इस कदम से हजारों बच्चों की शिक्षा सुरक्षित रहेगी, शैक्षिक स्थिरता सुनिश्चित होगी और निगरानी में सुधार होगा। यह देखना बाकी है कि जम्मू-कश्मीर में शिक्षा के इस महत्वपूर्ण कदम से क्या परिणाम सामने आते हैं और क्या यह वास्तव में छात्रों के भविष्य को सुरक्षित कर पाएगा।

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