गुजरात से असम तक आतंकी नेटवर्क भारत में आतंकी साजिशों का पर्दाफाश
गुजरात से लेकर असम आतंकी नेटवर्क तक फैले अलकायदा मॉड्यूल के खुलासे ने भारत की आंतरिक सुरक्षा को लेकर एक नई चिंता खड़ी कर दी है। गुजरात आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) ने 23 जुलाई को चार संदिग्धों को गिरफ्तार कर इस नेटवर्क की जड़ें उजागर कीं। इन पर अलकायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) से जुड़े होने और सोशल मीडिया के ज़रिए कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने का आरोप है।
सोशल मीडिया बना जिहादी हथियार
गिरफ्तार किए गए आरोपी – मोहम्मद फैक (दिल्ली), जीशान अली (नोएडा), सेफुल्लाह कुरैशी (गुजरात) और मोहम्मद फरदीन (अहमदाबाद) – इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर AQIS के वीडियो, साहित्य और हिंसात्मक फतवे शेयर कर रहे थे।
- “sharyat_ya_shahadat”, “_mujahideen1” जैसे इंस्टाग्राम अकाउंट से प्रचार
- भारत में लोकतंत्र के खिलाफ ‘शरिया राज्य’ की वकालत
- युवाओं को ‘ग़ज़वा-ए-हिंद’ की ओर आकर्षित करने की कोशिश
- पाकिस्तानी यूज़र्स से तालमेल, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर टिप्पणी
गुजरात असम आतंकी नेटवर्क की डिजिटल रणनीति यह दर्शाती है कि अलकायदा अब पारंपरिक तरीके छोड़कर ऑनलाइन कट्टरपंथीकरण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी आतंकी हलचल
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम हमले के बाद भारत द्वारा किए गए ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान समर्थित संगठनों को झकझोर दिया। जांच एजेंसियों का मानना है कि इसके बाद ISI ने AQIS को फिर सक्रिय करने की योजना बनाई।
- ISI द्वारा जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा की जगह AQIS पर ज़ोर
- AQIS की पत्रिका ‘नवाज़-ए-ग़ज़वा-ए-हिंद’ में भारत पर विशेष ज़ोर
- पाकिस्तान में तैयार हो रहे ‘डिजिटल जिहाद’ के नए एजेंडे
पूर्वोत्तर राज्यों में भी सक्रियता
गुजरात के अलावा असम पुलिस ने भी इसी दौरान अलकायदा से जुड़ा मॉड्यूल पकड़ा। जानकारी मिली कि ये लोग बांग्लादेशी आतंकी संगठन ‘अंसारुल्लाह बांग्ला टीम’ से संपर्क में थे। यह नेटवर्क भारत-बांग्लादेश सीमा के ज़रिए भारत में ग़ैरकानूनी घुसपैठ और कट्टरपंथी नेटवर्क को बढ़ा रहा था।
इतिहास से जुड़े तार
- AQIS की जड़ें 2014 में अयमान अल-जवाहिरी द्वारा भारत के लिए विशेष इकाई के रूप में डाली गई थीं।
- AQIS का पहला प्रमुख भारतीय मूल का असीम उमर था।
- डेविड हेडली और इलियास कश्मीरी के संपर्क से 26/11 की साजिश और गुजरात-मुंबई-यूपी के टारगेट तय हुए।
- तहव्वुर राणा की यात्राएं भी AQIS की दीर्घकालिक योजनाओं की पुष्टि करती हैं।
एजेंसियों की सख्ती, फिर भी जोखिम बरकरार
गुजरात ATS के अनुसार:
- चारों आरोपियों ने इंस्टाग्राम के ज़रिए आतंकी विचारधारा फैलाई
- ऑटो-डिलीट चैट ऐप्स से ट्रैकिंग से बचने की कोशिश
- फरदीन के घर से तलवार और AQIS साहित्य बरामद
- मोबाइल से ‘भारत के खिलाफ जिहाद’ वाले वीडियो और फतवे
यूएपीए और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत चारों पर षड्यंत्र, आतंकी संगठन की सदस्यता और विद्रोह भड़काने का केस दर्ज हुआ है।
बांग्लादेश की भूमिका और ISI की चालें
बांग्लादेश में:
- जमात-ए-इस्लामी, हिज़्ब-उत-तहरीर जैसे संगठन AQIS से जुड़े
- आईएसआई इन्हें एकजुट कर भारत के खिलाफ इस्तेमाल कर रहा
- बांग्लादेश सरकार की निष्क्रियता ने समस्या को और बढ़ाया
सरकार की प्रतिक्रिया और भविष्य की रणनीति
भारत सरकार ने AQIS के बढ़ते नेटवर्क को राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर खतरा बताया है। गृह मंत्रालय, NIA और ATS मिलकर इस नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने में जुटे हैं। गृह मंत्री अमित शाह के मुताबिक:
“भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली और संप्रभुता को कोई चुनौती नहीं दे सकता। जो भी सोशल मीडिया के माध्यम से कट्टरपंथ फैलाएगा, उसे दंडित किया जाएगा।”
नया खतरा सतर्कता आवश्यक
गुजरात असम आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश यह दर्शाता है कि अलकायदा की विचारधारा भले ही कमज़ोर हुई हो, पर उसका डिजिटल और वैचारिक प्रभाव अब भी ज़िंदा है। भारत को केवल सीमाओं पर ही नहीं, डिजिटल सीमाओं पर भी युद्ध स्तर पर चौकसी बढ़ानी होगी।



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