संसद का मॉनसून सत्र 2026 अनिश्चित काल के लिए स्थगित: पास हुए 11 बिल,
संसद का मॉनसून सत्र 2026 लगातार विरोध-प्रदर्शनों, भारी हंगामे और तीखी राजनीतिक बयानबाजी के बीच गुरुवार, 13 अगस्त को अनिश्चित काल के लिए स्थगित (Adjourned Sine Die) कर दिया गया। 25 कैलेंडर दिनों के दौरान आयोजित 19 बैठकों वाले इस सत्र में विधायी कामकाज तो पूरा कर लिया गया, लेकिन लोकतांत्रिक चर्चा और संसदीय बहस के स्तर पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
सत्र के अंतिम दिन पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में उपस्थित हुए, लेकिन कार्यवाही शुरू होने के मात्र 3 मिनट और 40 सेकंड के भीतर ही स्पीकर ओम बिरला ने सदन के अनिश्चित काल के लिए स्थगन की घोषणा कर दी।
विपक्ष का कड़ा रुख और गतिरोध के मुख्य कारण
20 जुलाई 2026 को शुरू हुए इस सत्र के पहले ही दिन से विपक्षी दलों, मुख्य रूप से कांग्रेस, ने विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया था।
छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई: दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET परीक्षा में अनियमितताओं के खिलाफ ‘संसद चलो’ मार्च निकाल रहे छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस बर्बरता का मुद्दा छाया रहा।
अयोध्या राम मंदिर दान विवाद: अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट को मिले दान में कथित वित्तीय अनियमितताओं और चोरी के आरोपों पर विपक्ष ने सरकार से जवाबदेही की मांग की।
गृह मंत्री के बयान पर अड़े रहे: विपक्ष की मांग थी कि गृह मंत्री अमित शाह इन मुद्दों पर सदन में विस्तृत बयान दें। यद्यपि सरकार ने NEET और पेपर लीक पर बहस की बात स्वीकार की थी और गृह मंत्री ने लिखित में चर्चा की सहमति दी थी, लेकिन विपक्ष विरोध खत्म न करने पर अड़ा रहा।
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संसदीय उत्पादकता: लोकसभा में महज 19 प्रतिशत काम
हंगामे का सीधा असर दोनों सदनों की उत्पादकता (Productivity) पर पड़ा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार:
लोकसभा: निचले सदन की उत्पादकता तय समय का केवल 19 प्रतिशत रही, जहां ज्यादातर समय नारेबाजी और स्थगन में बीत गया।
राज्यसभा: उच्च सदन में लगभग 39.17 प्रतिशत क्षमता के साथ काम हुआ, जहां कुल 37 घंटे और 49 मिनट ही कार्यवाही चल सकी।
सवालों पर असर: राज्यसभा में 285 तारांकित प्रश्न लिस्ट में शामिल थे, लेकिन हंगामे के चलते सिर्फ 16 प्रश्नों पर ही चर्चा हो सकी। इसी तरह ‘शून्यकाल’ (Zero Hour) के 380 में से केवल 52 मुद्दों को ही उठाया जा सका।
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बिना बहस पास हुए 11 महत्वपूर्ण विधेयक
रुकावटों के बावजूद संसद ने दोनों सदनों से कुल 12 महत्वपूर्ण विधेयक (Bills) पारित किए। हालांकि, चिंता की बात यह रही कि लोकसभा में पारित 12 में से 11 बिलों पर कोई ठोस बहस या संसदीय जांच-पड़ताल नहीं हो सकी।
पेपर लीक विरोधी बिल रहा मुख्य आकर्षण: ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026′ ही एकमात्र ऐसा कानून था जिस पर दोनों सदनों में विस्तार से चर्चा हुई। इस बिल के तहत स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन, 2 महीने में जांच और 3 महीने में सुनवाई पूरी करने जैसे कड़े प्रावधान किए गए हैं।
पारित हुए अन्य प्रमुख कानून:
जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल, 2026
सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन बिल, 2026
खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन बिल, 2026
केरल (नाम परिवर्तन) बिल, 2026
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) बिल, 2026
ट्रिब्यूनल सुधार बिल, 2026संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजा गया बिल:
‘फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026’ का भारी विरोध होने के बाद इसे 31 सदस्यीय JPC के पास भेज दिया गया है, जो शीतकालीन सत्र 2026 के पहले सप्ताह में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। वहीं ‘इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट बिल, 2026’ लंबित रहा।
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सरकार बनाम विपक्ष: तीखे आरोप-प्रत्यारोप
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सार्थक बहस न हो पाने के लिए सीधे तौर पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा:
“सरकार हर मुद्दे पर जवाब देने के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष चर्चा से भागता रहा। इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण नए चुने गए सांसदों को संसदीय प्रक्रियाओं से सीखने का मौका नहीं मिल पाया।”
दूसरी ओर, राज्यसभा के चेयरमैन सी. पी. राधाकृष्णन ने भी लगातार हो रहे व्यवधानों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर जनता की आवाज उठाने के मिले मौके का सदन पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं कर सका, जिससे बजटीय और विधायी प्राथमिकताओं पर असर पड़ा है।
संसद के अनिश्चित काल के लिए स्थगित होने के बाद अब यह राजनीतिक खींचतान सड़कों और जनता के बीच देखने को मिलेगी, जहां सरकार अपने पारित कानूनों को भुनाएगी, वहीं विपक्ष बहस न कराने के आरोपों के साथ सरकार पर हमलावर रहेगा। दोनों सदनों में हंगामे और नए कानूनों की मंजूरी के बाद जानें संसद मॉनसून सत्र 2026 का पूरा ब्यौरा संसद मॉनसून सत्र 2026, विधायी कार्यों और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़े असर के बीच संसद मॉनसून सत्र 2026 का विस्तृत विश्लेषण
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