ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट: खूनी संघर्ष के बीच प्रदर्शनों में मारे गए 2000 लोग
ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट और संचार पाबंदियों के बीच एक दहला देने वाली खबर सामने आई है। पहली बार ईरानी अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि देशव्यापी सरकार विरोधी प्रदर्शनों में सुरक्षाकर्मियों सहित लगभग 2,000 लोग मारे गए हैं। यह स्वीकारोक्ति रॉयटर्स के साथ बातचीत में एक गुमनाम अधिकारी ने की है, जिन्होंने बताया कि इन मौतों के पीछे “आतंकवादी” थे। पिछले दो हफ्तों से जारी यह अशांति ईरान के धार्मिक नेतृत्व और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के लिए पिछले तीन सालों की सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। यह संकट ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय दबाव और आर्थिक तबाही ने इस्लामिक रिपब्लिक को पूरी तरह घेर लिया है।
आर्थिक बदहाली और गिरती मुद्रा ने सुलगाई विद्रोह की आग
ईरान में यह वर्तमान अशांति 28 दिसंबर को स्थानीय मुद्रा रियाल के मूल्य में भारी गिरावट के कारण शुरू हुई थी। रियाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1.4 मिलियन के स्तर तक गिर गया है, जिससे आम जनता की क्रय शक्ति खत्म हो गई है। मांस, चावल और बुनियादी खाद्य पदार्थों की कीमतें आसमान छू रही हैं, जबकि वार्षिक महंगाई दर 40% के पार है। सरकार द्वारा सब्सिडाइज्ड ईंधन की कीमतों में वृद्धि और सेंट्रल बैंक द्वारा आयात के लिए प्रेफरेंशियल एक्सचेंज रेट खत्म करने के फैसले ने आग में घी का काम किया। तेहरान के व्यापारियों से शुरू हुआ यह गुस्सा अब सभी 31 प्रांतों में फैल चुका है, जहाँ प्रदर्शनकारी अब सीधे मौलवी शासन के अंत की मांग कर रहे हैं।
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डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी और 25% आयात शुल्क का ऐलान
अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर दबाव और बढ़ा दिया है। ट्रंप ने सोमवार को ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश के उत्पादों पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने की घोषणा की। उन्होंने साफ किया कि ईरान को उसकी कार्रवाई के लिए दंडित करने हेतु सैन्य विकल्प भी मेज पर हैं। ट्रंप ने कहा, “हम तैयार हैं” और वाशिंगटन इस स्थिति पर बहुत करीब से नज़र रख रहा है। हालांकि व्हाइट हाउस ने कूटनीति को प्राथमिकता दी है, लेकिन यह भी स्पष्ट किया है कि ट्रंप सैन्य बल के इस्तेमाल से नहीं डरते। इस बीच चीन ने ट्रंप के टैरिफ वाले फैसले की कड़ी आलोचना की है, क्योंकि वह ईरानी तेल का मुख्य खरीदार है।
जर्मन चांसलर की भविष्यवाणी: क्या गिरने वाली है ईरानी सरकार?
ईरान के भविष्य को लेकर अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता के बीच जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि ईरानी सरकार पतन के करीब है और हम शासन के अंतिम दिन देख रहे हैं। मर्ज़ के अनुसार, “अगर शासन को हिंसा के माध्यम से सत्ता बचानी पड़ रही है, तो वह अपने अंत पर है।” ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने इन टिप्पणियों को खारिज करते हुए जर्मनी पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाया। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि शासन के सुरक्षा तंत्र में अभी तक दरार नहीं दिखी है, लेकिन आर्थिक दबाव और क्षेत्रीय गठबंधनों की कमजोरी ने इसे पहले से कहीं अधिक असुरक्षित बना दिया है।
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ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट और सूचनाओं पर कड़ा पहरा
ईरानी प्रशासन ने सूचना के प्रवाह को रोकने के लिए पिछले कई दिनों से ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट का सहारा लिया है। संचार प्रतिबंधों के कारण ज़मीनी सच्चाई और मौतों के असली आंकड़ों को सत्यापित करना बेहद मुश्किल हो गया है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने बताया कि हालांकि फोन सेवाएं बहाल कर दी गई हैं, लेकिन इंटरनेट अभी भी अस्थिर है। मानवाधिकार समूह HRANA और अन्य संगठनों का दावा है कि मारे गए लोगों की संख्या सरकारी आंकड़े से कहीं अधिक हो सकती है। ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट के बावजूद कुछ वीडियो सामने आए हैं जिनमें सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच भीषण गोलीबारी और जलती हुई कारें दिखाई दे रही हैं, जो हिंसा की भयावहता को बयां करती हैं।
गिरफ्तारियों का आंकड़ा 10,000 के पार और मानवाधिकारों का हनन
मानवाधिकार समूहों के अनुसार, सोमवार देर रात तक 10,721 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। नॉर्वे स्थित एनजीओ ‘ईरान ह्यूमन राइट्स’ (IHR) ने चेतावनी दी है कि मरने वालों की संख्या कुछ अनुमानों के अनुसार 6,000 से भी ज्यादा हो सकती है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर ‘हैरानी’ जताई है। ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट की आड़ में सुरक्षा बलों पर प्रदर्शनकारियों को सीधे गोली मारने के आरोप लगे हैं। विपक्षी समूहों का दावा है कि तेहरान के बेहेश्ट ज़हरा कब्रिस्तान में पीड़ितों के परिवारों ने इकट्ठा होकर विरोध के नारे लगाए, जो शासन के खिलाफ गहरे गुस्से को दर्शाता है।
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निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी की दुनिया से अपील
ईरान के आखिरी शाह के बेटे, निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से जल्द से जल्द दखल देने की अपील की है। उन्होंने कहा, “हमें कार्रवाई की ज़रूरत है।” पहलवी ने दावा किया कि वह ट्रंप प्रशासन के संपर्क में हैं। वहीं, ईरान इंटरनेशनल के संपादकीय बोर्ड ने दावा किया है कि असली मौतों का आंकड़ा 12,000 तक हो सकता है। उनके अनुसार, सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने खुद इन हत्याओं का सीधा आदेश दिया था, जिसे शासन की तीनों शाखाओं ने मंजूरी दी थी। ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट की वजह से इन भयावह रिपोर्टों की स्वतंत्र पुष्टि करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
कूटनीति बनाम सैन्य विकल्प: आगे का रास्ता क्या है?
इस तनावपूर्ण माहौल के बीच ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि वे वाशिंगटन के साथ संचार चैनल खुले रख रहे हैं। सरकारी प्रवक्ता फातिमा मोहजेरानी ने कहा कि बातचीत करना हमारा कर्तव्य है। वहीं, विदेश मंत्री अराक्ची ने कहा कि तेहरान अमेरिकी प्रस्तावों का अध्ययन कर रहा है, हालांकि उन्होंने यूरोपीय संसद द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का जवाब देने की चेतावनी भी दी। अयातुल्ला खामेनेई ने सरकार समर्थक रैलियों को अमेरिका के लिए एक “चेतावनी” बताया है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति इस खूनी संघर्ष को रोक पाएगी या ईरान एक नए क्रांतिकारी बदलाव की ओर बढ़ रहा है।
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