किरेन रिजिजू का बड़ा हमला: कांग्रेस को बताया ‘माओवादी पार्टी’,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर दिए गए ‘दिमागी नक्सल’ (Dimagi Naxal) वाले बयान पर राजनीतिक घमासान जारी है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार को कांग्रेस पर बड़ा राजनीतिक हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी दल अब पूरी तरह से एक “माओवादी और नक्सलवादी संगठन” में तब्दील हो चुका है।
इसके साथ ही, रिजिजू ने दिल्ली और बिहार में नीट (NEET) और परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों को संभालने के तरीके का बचाव किया और सुरक्षा बलों के संयम की तारीफ की।
‘कांग्रेस अब माओवादी पार्टी बनने की ओर’: रिजिजू का बयान
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का बयान किसी एक विशेष पार्टी के खिलाफ नहीं था, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने खुद ही इसे अपने ऊपर ले लिया।
इतिहास और एनएसी (NAC) पर सवाल: रिजिजू ने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार के दौरान सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली नेशनल एडवाइजरी काउंसिल (NAC) पर वैचारिक रूप से नक्सल समर्थक लोगों का नियंत्रण था।
अनुच्छेद 370 और अलगाववाद: उन्होंने कहा कि अलगाववादी सोच, पूर्वोत्तर को अलग करने की मांग और अनुच्छेद 370 को बहाल करने की वकालत करना ‘वैचारिक नक्सलवाद’ का ही हिस्सा है।
पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के बयान का हवाला: रिजिजू ने याद दिलाया कि 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने भी नक्सलवाद को देश की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती बताया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को पीएम मोदी के बयान की आलोचना करने के लिए पूर्व पीएम के परिवार से माफी मांगनी चाहिए।
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‘Gen-Z’ छात्र प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई का बचाव
दिल्ली के जंतर-मंतर और बिहार में नीट (NEET) पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ हुए छात्र आंदोलनों पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने पुलिस और स्थानीय प्रशासन की भूमिका की सराहना की।
शून्य हताहत (Zero Casualty): रिजिजू ने कहा कि हजारों प्रदर्शनकारियों और राजनीतिक घुसपैठियों के बावजूद सुरक्षा बलों ने बेहद संयम से काम लिया। इस आंदोलन के दौरान किसी भी छात्र की जान नहीं गई और न ही कोई गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल पहुंचा।
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कांग्रेस के कार्यकाल से तुलना: उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में ऐसे आंदोलनों पर भारी बल प्रयोग और गोलीबारी होती थी, जैसा कि तेलंगाना आंदोलन या आपातकाल के दौरान देखा गया था।
सख्त कानून और फास्ट-ट्रैक कोर्ट: रिजिजू ने दोहराया कि केंद्र सरकार युवाओं और छात्रों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। पेपर लीक में शामिल दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन किया जा रहा है और हिंसा के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई जा रही है।
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कांग्रेस का पलटवार
दूसरी ओर, कांग्रेस नेताओं और पी. चिदंबरम ने रिजिजू के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ‘दिमागी नक्सल’ भी बीजेपी का एक ऐसा ही राजनीतिक ठप्पा (Label) है, जैसे पहले ‘अर्बन नक्सल’, ‘आंदोलनजीवी’ या ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को चुप कराने के लिए किया जाता रहा है। केंद्रीय मंत्री के तीखे आरोपों और राजनीतिक बहसों के बीच गरमाया किरेन रिजिजू कांग्रेस माओवादी मामला
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