Loading Now

सोनम वांगचुक गिरफ्तारी विरोध: NSA, छठी अनुसूची राज्य की मांग पर

सोनम वांगचुक गिरफ्तारी विरोध

नई दिल्ली के प्रतिष्ठित सोनम वांगचुक गिरफ्तारी विरोध प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में 29 सितंबर 2025 को आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता ने लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत गिरफ्तारी को लेकर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा।

यह वार्ता करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) के प्रमुख सदस्य सज्जाद कारगिली की अगुवाई में आयोजित की गई, जिसमें लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) के प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों के बुद्धिजीवियों ने भाग लिया।

वार्ता का मुख्य उद्देश्य वांगचुक की गिरफ्तारी को लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला बताते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग उठाना था। केडीए के प्रमुख सज्जाद कारगिली ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह गिरफ्तारी लद्दाख के शांतिपूर्ण आंदोलन को कुचलने की साजिश है, जो केंद्र सरकार की विफलताओं को छिपाने का प्रयास है।

इस सनसनीखेज कार्यक्रम की शुरुआत में वक्ताओं ने 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसक झड़पों का जिक्र किया, जिसमें चार नागरिकों की मौत और 80 से अधिक लोगों के घायल होने की घटना को पुलिस की क्रूरता का परिणाम बताया।

पाकिस्तान से जुड़ाव के आरोपों का खंडन और ‘विच-हंट’ का आरोप

प्रेस वार्ता के दौरान सोनम वांगचुक पर लगाए गए पाकिस्तान से जुड़े होने के आरोपों का कड़ा खंडन किया गया। लद्दाख के डीजीपी एसडी सिंह जमवाल ने दावा किया था कि वांगचुक एक पाकिस्तानी खुफिया अधिकारी के संपर्क में थे और उन्होंने ‘डान इवेंट’ में भाग लिया था।

लेकिन वक्ताओं ने इसे सिरे से खारिज करते हुए राजनीतिक साजिश करार दिया। सज्जाद कारगिली ने तर्कों की झड़ी लगाते हुए कहा कि वांगचुक का पाकिस्तान दौरा संयुक्त राष्ट्र की जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के लिए था, जहां उन्होंने हिमालयी क्षेत्रों की साझा चुनौतियों पर चर्चा की, जिसमें सीमाओं का कोई उल्लंघन नहीं था। कारगिली ने व्यंग्य भरे लहजे में पूछा, “अगर पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच खेलना अपराध नहीं है, तो जलवायु सम्मेलन में भाग लेना अपराध क्यों?”

अन्य वक्ताओं, जैसे जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के अतुल सती, ने इस पूरे मामले को ‘विच-हंट’ का उदाहरण बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार पर्यावरण कार्यकर्ताओं को बदनाम करने के लिए विदेशी लिंक के नैरेटिव का सहारा ले रही है। यह आरोप वांगचुक के खिलाफ सीबीआई द्वारा विदेशी फंडिंग (एफसीआरए) उल्लंघन की जांच से भी जुड़े हैं, लेकिन वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि यह उनकी संस्था एसईसीएमओएल की वैध गतिविधियों को निशाना बनाने की कोशिश है। लद्दाख में सोनम वांगचुक गिरफ्तारी विरोध अब सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक और पर्यावरणीय संघर्ष का प्रतीक बन गया है।

लद्दाख की मुख्य मांगें: पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची

प्रेस वार्ता में लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची के तहत संरक्षण प्रदान करने की मांग को केंद्र में रखा गया। वक्ताओं ने बताया कि 2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग होने के बाद लद्दाख को संघ राज्य क्षेत्र का दर्जा मिला, लेकिन स्थानीय निकायों की शक्तियों का ह्रास, नौकरियों में आरक्षण की कमी और सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय क्षरण ने असंतोष को जन्म दिया है। सज्जाद कारगिली ने साफ शब्दों में कहा, “राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची लद्दाख के आदिवासी समुदायों के लिए गैर-व्यापगत (Non-Negotiable) है; यह बातचीत का विषय नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार है।”

लेह और करगिल के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से केंद्र सरकार की उच्च स्तरीय समिति (एचपीसी) के साथ चल रही वार्ताओं का उल्लेख किया, जो 6 अक्टूबर को निर्धारित है, लेकिन वांगचुक की गिरफ्तारी ने इसे अनिश्चित बना दिया है।

उन्होंने मांग की कि वार्ता में सभी हितधारकों को शामिल किया जाए और लद्दाख के युवाओं के लिए गजेटेड नौकरियां तथा अलग लोकसभा सीटें सुनिश्चित की जाएं। यह मांगें लद्दाख के बौद्ध-बहुल लेह और मुस्लिम-बहुल करगिल के बीच ऐतिहासिक एकजुटता का प्रतीक बनीं।

राष्ट्रीय राजनीतिक प्रतिक्रिया और भविष्य की दिशा

सोनम वांगचुक गिरफ्तारी विरोध ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस के राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर वांगचुक का समर्थन करते हुए कहा कि लद्दाख भाजपा-आरएसएस के हमले का शिकार हो रहा है, उन्हें राज्य का दर्जा देकर उनके साथ किए गए वादों को पूरा किया जाना चाहिए।

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने भी वार्ता का आह्वान किया, जबकि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन ने इसे सरकार का ‘विच-हंट’ एजेंडा बताया।

दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने वांगचुक को हिंसा भड़काने का दोषी ठहराया है, दावा किया कि उनकी भड़काऊ भाषणों ने 24 सितंबर की हिंसा को जन्म दिया। प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने 24 सितंबर की घटना पर न्यायिक जांच की मांग की, जिसमें पुलिस की गोली से हुई चार मौतों के लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया गया। उन्होंने घायलों के लिए मुआवजा और मृतकों के परिवारों को सरकारी नौकरी सहित मुआवजे की भी अपील की।

यह प्रेस वार्ता लद्दाख आंदोलन के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई, जो केंद्र-परिधि संबंधों की जटिलताओं को उजागर करती है। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि दमनकारी कार्रवाइयां लद्दाख में अलगाव की भावना को बढ़ावा देंगी, खासकर जब सीमा क्षेत्र चीन की चुनौतियों का सामना कर रहा है।

सज्जाद कारगिली ने समापन में कहा, “लद्दाख के लोग शांति चाहते हैं, लेकिन उनकी आवाज को दबाना राष्ट्रीय हित के खिलाफ है।” यह आयोजन न केवल वांगचुक की रिहाई तक सीमित रहा, बल्कि लद्दाख की सांस्कृतिक संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए एक व्यापक संघर्ष का प्रतीक बन गया।

आगामी दिनों में केंद्र के साथ होने वाली वार्ताओं का परिणाम ही इस क्षेत्र की स्थिरता तय करेगा, लेकिन प्रेस क्लब की यह पहल ने सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी और लद्दाखी मांगों के राष्ट्रीय विमर्श को मजबूती से प्रभावित किया है।

Spread the love

Post Comment

You May Have Missed