ग़ज़वा-ए-हिंद पर योगी की चेतावनी, ‘आई लव मुहम्मद’ विवाद गरमाया
योगी की चेतावनी इस बार सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उन तत्वों के लिए सीधा और कड़ा संदेश है जो राज्य में शांति और सद्भाव को भंग करने का दुस्साहस कर रहे हैं। बरेली में ‘आई लव मुहम्मद‘ के पोस्टर लिए भीड़ और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़प की पृष्ठभूमि में आई मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी, यह स्पष्ट करती है कि उनकी सरकार अराजकता फैलाने वालों के प्रति ‘शून्य सहिष्णुता’ की नीति पर कायम है।
मुख्यमंत्री ने बलरामपुर में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए ‘ग़ज़वा-ए-हिंद‘ की विवादास्पद और देश विरोधी अवधारणा पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, “हिंदुस्तान की धरती पर ग़ज़वा-ए-हिंद नहीं होगा।” मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि ‘गज़वा-ए-हिंद’ की कल्पना या उसका सपना देखने पर भी संबंधित व्यक्ति को “नर्क का टिकट” मिलेगा।
उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि भारत में रहने वाले कुछ लोग ‘गज़वा-ए-हिंद’ का नारा लगाकर देश के अंदर राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं, लेकिन भारत की धरती पर यह सपना कभी साकार नहीं होगा।
आखिर क्या है ‘ग़ज़वा-ए-हिंद’ की अवधारणा?
‘ग़ज़वा-ए-हिंद’ एक इस्लामी कथानक है जो कुछ हदीसों (पैगंबर मुहम्मद के आख्यानों/परंपराओं) पर आधारित है। यह अवधारणा ‘अंत काल’ (End Times) से पहले भारतीय उपमहाद्वीप में एक इस्लामी सैन्य अभियान या विजय की भविष्यवाणी करती है, जिसका अंतिम लक्ष्य उपमहाद्वीप को जीतना है।
हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कई इस्लामी विद्वानों द्वारा इन कथाओं की प्रामाणिकता (विश्वसनीयता) पर संदेह व्यक्त किया गया है, लेकिन इसके बावजूद, आतंकवादी समूहों द्वारा इन कथाओं का दुरुपयोग भारत विरोधी भावनाओं को भड़काने और हिंसा को उचित ठहराने के लिए किया जाता रहा है, खासकर कश्मीर में। ग़ज़वा-ए-हिंद का हवाला देकर, चरमपंथी युवा भर्तीकर्ताओं को धार्मिक भक्ति के रूप में उग्रवाद अपनाने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं।
पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और अन्य आतंकवादी समूह कथित तौर पर इस अवधारणा को हदीस के रूप में इस्तेमाल करके, भारत के खिलाफ एक धार्मिक पवित्र युद्ध के रूप में अपने दुस्साहसिक आतंकवादी हमलों को अंजाम देने, वित्तपोषित करने और बचाव करने का प्रयास कर रहे हैं।
यह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री ने ऐसी कड़ी योगी की चेतावनी दी हो। इससे पहले, उन्होंने एएनआई से बातचीत में ग़ज़वा-ए-हिंद का सपना देखने वालों को चेताते हुए कहा था, “यह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नया भारत है। नया भारत सबके विकास के लिए है, लेकिन किसी का तुष्टिकरण नहीं। यह संविधान के अनुसार चलेगा, शरीयत के अनुसार नहीं। ग़ज़वा-ए-हिंद का सपना, क़यामत के दिन तक साकार नहीं होगा।”
उपद्रवियों को योगी की चेतावनी: अराजकता पर सख्त प्रहार
मुख्यमंत्री ने बरेली में हुई हिंसा का सीधा हवाला दिया और स्पष्ट कर दिया कि उपद्रवियों से इसी तरह निपटा जाएगा। उन्होंने कहा, “कुछ लोगों को माहौल खराब करने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए।” उन्होंने उन लोगों को आड़े हाथों लिया, जिन्होंने “भ्रष्ट सरकारों के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश में पहचान का संकट पैदा किया” और जिनकी वजह से राज्य में न तो कोई निवेश हुआ न ही कोई विकास।
उन्होंने आगे कहा, “अब वे नए हथकंडे अपना रहे हैं। लेकिन उन्हें याद रखना चाहिए कि हम उनकी सोच से कहीं ज़्यादा तैयार हैं। उन्हें भी बरेली की तरह ही पीटा जाएगा।”
बलरामपुर में ‘आई लव मुहम्मद’ पोस्टरों की निंदा करते हुए, सीएम योगी ने कहा कि “मूर्ख” बच्चों की ज़िंदगी बर्बाद कर रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया, “ये मूर्ख यह भी नहीं जानते कि आस्था के प्रतीकों का सम्मान किया जाता है, प्यार नहीं। आस्था कोई चौराहे पर दिखाने की चीज़ नहीं है; यह ज़मीर का मामला है।”
उन्होंने कहा कि कुछ लोग छोटे बच्चों को ‘आई लव मुहम्मद’ के पोस्टर देकर समाज में अराजकता फैला रहे हैं, जबकि उन्हें यह भी एहसास नहीं है कि उनकी अपनी ज़िंदगी पहले ही बर्बाद हो चुकी है, लेकिन वे इन बच्चों की ज़िंदगी भी बर्बाद करने पर तुले हुए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, “सरकार इस तरह की अराजकता को कभी स्वीकार नहीं करेगी। जो कोई भी कानून अपने हाथ में लेने की कोशिश करेगा, उसे पहले ही बता दिया जाए कि हम बिना पूछे उसे नरक का टिकट दे देंगे।”
‘आई लव मुहम्मद’ विवाद: कानपुर से बरेली तक हिंसा और कार्रवाई
यह पूरा विवाद 4 सितंबर कानपुर को में तब शुरू हुआ जब पैगंबर मुहम्मद के जन्म के उपलक्ष्य में निकाले गए बारावफात के जुलूस के रास्ते में “आई लव मुहम्मद” वाक्यांश वाला एक बैनर/लाइटबोर्ड प्रदर्शित किया गया। स्थानीय हिंदू समूहों ने इसे “नई परंपरा” बताते हुए आपत्ति जताई।
यह विवाद जल्द ही कानपुर से आगे बढ़कर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, तेलंगाना और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में रैलियों और विरोध प्रदर्शनों में बदल गया। उत्तर प्रदेश में यह अभियान बरेली, बाराबंकी, भदोही, पीलीभीत, कौशांबी, लखनऊ और उन्नाव जिलों में फैल गया, जिससे हिंसा और अशांति फैल गई।
बरेली में 26 सितंबर को शुक्रवार की नमाज के बाद सबसे गंभीर हिंसा देखी गई, जब 1,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ झड़प हुई। आला हज़रत मस्जिद में शुरू हुआ संघर्ष जल्द ही नौमहला मस्जिद, सिटी कोतवाली, नॉवेल्टी स्क्वायर, आज़मनगर, ज़िला अस्पताल रोड, श्यामगंज मार्केट और बिहारीपुर तक फैल गया, जिससे पूरा बाज़ार बंद हो गया और अनौपचारिक कर्फ्यू जैसे हालात हो गए।
पथराव और फायरिंग में 22 पुलिसकर्मी घायल हुए। कोतवाली में पाँच, बारादरी में दो और किला, कैंट व प्रेमनगर थानों में एक-एक एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें 125 लोगों को नामजद और 3,000 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है।
साजिशकर्ताओं पर पुलिस का कड़ा शिकंजा
पुलिस ने दंगा मास्टरमाइंड मौलाना तौकीर रजा खान को शुक्रवार को दंगे के करीब छह घंटे बाद रात 12 बजे गिरफ्तार कर लिया। उन्हें उसी रात बारादरी थाने लाकर, सुबह मेडिकल के बाद रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, और फिर फतेहगढ़ सेंट्रल जेल भेज दिया गया। अब तक, बरेली पुलिस ने मौलाना तौकीर रज़ा समेत 34 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार लोगों में तौकीर रज़ा का करीबी सहयोगी नदीम भी शामिल है, जिसे शाहजहाँपुर के कटरा से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों में वे दो संदिग्ध, मोइन उर्फ चोटीकटवा और फैजुल भी शामिल हैं, जिन्होंने श्यामगंज चौराहे के पास भीड़ के साथ मिलकर पुलिस अधिकारियों पर तेजाब फेंका था।
पुलिस की कार्रवाई यहीं नहीं रुकी; अधिकारियों ने आरोपियों से जुड़ी संपत्तियों को भी सील कर दिया। मौलाना तौकीर रज़ा को शरण देने वाले उनके दोस्त फहम के स्वामित्व वाले होटल स्काईलार्क को बंद कर दिया गया है। इसी तरह, अतीक अहमद के भाई अशरफ के साले सद्दाम को शरण देने वाले आरिफ के स्वामित्व वाले फहम लॉन और फ्लोरा गार्डन और मोहम्मद आरिफ के जलसा ग्रीन मैरिज हॉल को भी सील कर दिया गया है, क्योंकि उनमें अतिरिक्त निर्माण स्वीकृत मानचित्र की शर्तों का उल्लंघन पाया गया।
पुलिस ने वीडियो फुटेज और घटनास्थल पर मौजूद पुलिस टीमों की रिपोर्ट के आधार पर उपद्रवियों की पहचान की। एक पार्षद को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और भीड़ को खलील स्कूल चौराहे की ओर भेजने में पाँच पार्षदों की भूमिका पर पुलिस की नजर है।
जांच में पता चला है कि पूर्व आईएमसी जिलाध्यक्ष ने व्हाट्सएप कॉल करके करीब 1600 पत्थरबाजों को इकट्ठा किया था और नाबालिगों को भीड़ में आगे धकेलकर पुलिस से भिड़ने की साज़िश रची गई थी। जब पुलिस ने दंगा आरोपियों को मीडिया के सामने पेश किया तो वे हाथ जोड़कर रोते हुए नजर आए।
राजनीतिक मोर्चे पर अखिलेश यादव बैकफुट पर
विश्लेषकों का कहना है कि यह मुद्दा, जो शुरू में स्थानीय था, अब एक व्यापक वैचारिक बहस में बदल गया है, जिससे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को नवरात्रि के दौरान हिंदुत्व के मंच पर समर्थन जुटाने का अवसर मिला है। यह विवाद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को काफी हद तक चुप और बैकफुट पर रखने का एक शक्तिशाली राजनीतिक हथियार बन गया है। यह विवाद अखिलेश यादव की महीनों से चल रही पीडीए गुट – पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक तक पहुँचने की योजना को बाधित कर सकता है।
पार्टी की मुश्किलें तब और बढ़ गईं जब कानपुर दंगों के मुख्य आरोपी जुबैर अहमद खान, जो हाल ही में समाजवादी पार्टी में शामिल हुए थे, को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इसके अलावा, समाजवादी पार्टी की प्रवक्ता और दिवंगत शायर मुनव्वर राना की बेटी सुमैया राना ने लखनऊ में बड़े पैमाने पर लामबंदी की चेतावनी दी, जिस पर सपा को तुरंत उनसे स्पष्टीकरण माँगना पड़ा। योगी ने इस बहस को हिंदुत्व बनाम धार्मिक अतिवाद के रूप में बदल दिया है, जिससे स्थानीय विरोध एक व्यापक वैचारिक संघर्ष में बदल गया है।
योगी इस मुद्दे पर तब तक ध्यान केंद्रित रखेंगे जब तक उन्हें कोई निर्णायक राजनीतिक बढ़त हासिल नहीं हो जाती, जबकि अखिलेश उम्मीद कर रहे होंगे कि यह विवाद जल्द ही ख़त्म हो जाए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग़ज़वा-ए-हिंद पर सख्त चेतावनी जारी की है। हाल ही में ‘आई लव मुहम्मद’ विवाद ने ग़ज़वा-ए-हिंद चर्चा को और उभारा है।



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