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पशु कल्याण पर राजनीति: राहुल गांधी ने SC के आदेश को बताया ‘क्रूर’

पशु कल्याण पर राजनीति

आवारा कुत्तों को हटाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पशु कल्याण पर राजनीति गरमा गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस निर्देश को दशकों से चली आ रही मानवीय और विज्ञान-समर्थित नीति से एक कदम पीछे बताया है। उन्होंने कहा कि ये बेजुबान जीव कोई “समस्या” नहीं हैं, जिन्हें खत्म कर दिया जाए।

  • राहुल गांधी ने कहा, ‘कंबल हटाना क्रूर, अदूरदर्शी है।’
  • उन्होंने अधिकारियों से नसबंदी और टीकाकरण की नीति अपनाने का आग्रह किया।
  • राहुल गांधी के अनुसार, जन सुरक्षा और पशु कल्याण साथ-साथ चल सकते हैं।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस फैसले को मानवीय दृष्टिकोण के विपरीत बताते हुए, एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि आश्रय स्थल, नसबंदी, टीकाकरण और सामुदायिक देखभाल से सड़कों को बिना क्रूरता के सुरक्षित रखा जा सकता है।

मुख्य बिंदु :

  1. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर से आठ हफ्तों में सभी आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया।
  2. राहुल गांधी ने फैसले को मानवीय और विज्ञान-समर्थित नीति से एक कदम पीछे बताया।
  3. राहुल गांधी ने नसबंदी, टीकाकरण और सामुदायिक देखभाल को समाधान बताया।
  4. दिल्ली की मुख्यमंत्री और महापौर ने आदेश का स्वागत कर इसे “राहत” करार दिया।
  5. पेटा इंडिया और मेनका गांधी ने आदेश को अव्यावहारिक और अवैध बताया।
  6. पिछले छह महीनों में दिल्ली-एनसीआर में 35,000 से अधिक कुत्तों के काटने के मामले आए।
  7. सुप्रीम कोर्ट ने कुत्तों को गोद लेने पर रोक लगाकर केंद्र सरकार से राय मांगी।

क्या है सुप्रीम कोर्ट का आदेश और उस पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ?

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर से सभी आवारा कुत्तों को आठ हफ़्तों के भीतर हटाकर आश्रय स्थलों में रखने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह आदेश आवारा कुत्तों के हमलों और रेबीज के बढ़ते मामलों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए दिया था। आदेश में यह भी कहा गया कि कुत्तों को पकड़ने में बाधा डालने वालों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई होगी। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस फैसले का समर्थन किया और इसे “राहत” बताया। उन्होंने कहा कि आवारा कुत्तों का खतरा “विशाल” स्तर पर पहुंच गया है। दिल्ली के महापौर इकबाल सिंह ने भी इस आदेश का स्वागत किया और इसे 6 हफ्तों में लागू करने का वादा किया।

आदेश के विरोध में राहुल गांधी और पशु अधिकार संगठन

राहुल गांधी के बयान से यह साफ़ होता है कि पशु कल्याण पर राजनीति अब एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश पर पशु अधिकार संगठनों ने भी कड़ा विरोध जताया है। पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) की भारत शाखा ने इस आदेश को “अव्यावहारिक, अतार्किक और अवैध” बताया है।

  • पेटा ने चेतावनी दी कि इससे जानवरों और निवासियों दोनों के लिए “अराजकता और पीड़ा” पैदा होगी।
  • मेनका गांधी ने भी आदेश पर सवाल उठाए और इसे “अव्यवहारिक” बताया।
  • मेनका गांधी के अनुसार, इस फैसले को लागू करने की लागत ₹15,000 करोड़ होगी।

इस फैसले पर पशु कल्याण पर राजनीति में उबाल आ गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ-साथ कई पशु अधिकार कार्यकर्ता भी इस फैसले को अमानवीय मानते हैं और इसका विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि यह समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।

विपक्ष का रुख और सुप्रीम कोर्ट की राय

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार की दलीलें सुनने की बात कही। अदालत ने कहा कि वह जनहित के लिए ऐसा कर रही है। कोर्ट ने कहा कि नियमों को भूल जाइए, हमें सड़कों को आवारा कुत्तों से पूरी तरह मुक्त करना होगा। इस मुद्दे ने एक बार फिर पशु कल्याण पर राजनीति को सुर्खियों में ला दिया है।

  • जस्टिस पारदीवाला ने कहा, “हम यह जनहित के लिए कर रहे हैं।”
  • कोर्ट ने कुत्तों को गोद लेने पर भी रोक लगा दी है।
  • पिछले 6 महीनों में दिल्ली-एनसीआर में जानवरों के काटने के 35,000 से अधिक मामले आए हैं।

विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस फैसले को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि मानवीय और विज्ञान-समर्थित समाधान, न कि पूरी तरह से हटाना, बिना क्रूरता के जन सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस मामले पर क्या कदम उठाती है।

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