Loading Now

न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा महाभियोग: 3 सदस्यीय पैनल करेगा आरोपों की जांच

न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा महाभियोग

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा महाभियोग आरोपों की जांच के लिए मंगलवार को तीन सदस्यीय समिति का गठन किया। यह कदम 146 सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित एक प्रस्ताव को स्वीकार करने के बाद उठाया गया है, जिसमें उन पर महाभियोग चलाने की मांग की गई है। इस समिति का गठन न्यायाधीश जांच अधिनियम, 1968 की धारा 3 के तहत किया गया है।

  • न्यायमूर्ति वर्मा पर भ्रष्टाचार और कदाचार के आरोप लगाए गए हैं।
  • यह आरोप उनके दिल्ली स्थित सरकारी आवास से जली हुई नकदी मिलने के बाद लगे।
  • उन्हें पहले ही दिल्ली से इलाहाबाद उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया है।

यह मामला सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों को एक मंच पर ले आया है।

जांच समिति के सदस्य: कौन हैं ये तीन दिग्गज?

इस तीन सदस्यीय पैनल में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और वरिष्ठ अधिवक्ता बी. वी. आचार्य शामिल हैं। समिति का उद्देश्य आरोपों की गहन जांच करना है।

  • न्यायमूर्ति कुमार 13 फरवरी, 2023 से सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश हैं।
  • न्यायमूर्ति श्रीवास्तव मद्रास उच्च न्यायालय के 54वें मुख्य न्यायाधीश हैं।
  • वरिष्ठ अधिवक्ता बी. वी. आचार्य कर्नाटक के पूर्व महाधिवक्ता रह चुके हैं।

समिति को गवाहों से जिरह करने और साक्ष्य प्रस्तुत करने का अधिकार है।

न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा महाभियोग की प्रक्रिया और पृष्ठभूमि

महाभियोग की यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 124(4) के तहत निर्धारित है। लोकसभा अध्यक्ष को यह प्रस्ताव 21 जुलाई को 145 सांसदों द्वारा सौंपा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में जस्टिस वर्मा की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने आंतरिक जांच रिपोर्ट को चुनौती दी थी।

  • 14 मार्च को दिल्ली में उनके आवास पर जली हुई नकदी बरामद हुई थी।
  • उस समय वह दिल्ली उच्च न्यायालय में सेवारत थे।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें सभी न्यायिक कार्यों से भी मुक्त कर दिया है।

प्रस्ताव में कहा गया है कि न्यायाधीश के कदाचार की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

संवैधानिक और कानूनी प्रावधान

न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत, किसी न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश करने के लिए लोकसभा में 100 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक हैं। यदि पैनल न्यायाधीश को दोषी पाता है, तो रिपोर्ट को सदन में स्वीकार किया जाएगा और मतदान होगा।

  • यह प्रक्रिया न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा करती है।
  • महाभियोग के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है।
  • न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा महाभियोग प्रक्रिया संसद को न्यायपालिका पर जवाबदेही तय करने का अधिकार देती है।

यह मामला न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के प्रति शून्य-सहिष्णुता का एक मजबूत संदेश देता है।

न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा महाभियोग का भविष्य

लोकसभा अध्यक्ष ने घोषणा की है कि समिति जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। रिपोर्ट आने तक महाभियोग का प्रस्ताव लंबित रहेगा। यदि समिति आरोपों को सही पाती है, तो संसद में मतदान होगा, जिसमें दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी।

  • इस मामले में सत्तारूढ़ और विपक्ष एकमत हैं।
  • इसलिए प्रक्रिया के सुचारू रूप से चलने की उम्मीद है।

यह मामला न्यायपालिका की शुचिता और जवाबदेही के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करेगा।

Spread the love

Post Comment

You May Have Missed