“JSSC CGL रद्द विवाद” : JLKM नेता देवेंद्र महतो ने खत्म की भूख हड़ताल,
JSSC CGL रद्द विवाद झारखंड में सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में कथित धांधली और पेपर लीक विवाद के बीच बड़ा मोड़ आया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा JSSC-CGL और साल 2014 से आउटसोर्स एजेंसी TSR डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द किए जाने के बाद छात्र नेता और JLKM नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपनी 16 दिनों से जारी भूख हड़ताल खत्म कर दी है।
हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए देवेंद्र महतो ने स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल अनशन खत्म किया है, आंदोलन नहीं। वे जल्द ही JPSC और JSSC द्वारा भ्रष्टाचार-मुक्त भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए अपने आंदोलन के दूसरे चरण की शुरुआत करेंगे।
‘जब तक ठोस गारंटी नहीं, आंदोलन जारी रहेगा’: देवेंद्र महतो
‘JPSC-JSSC अभ्यर्थी सुधार मंच’ के बैनर तले प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए देवेंद्र महतो ने कहा कि जब तक राज्य सरकार भविष्य में भर्ती परीक्षाओं को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की कानूनी गारंटी नहीं देती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
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एक्शन में सीआईडी: SSC सचिव सुधीर गुप्ता से घंटों पूछताछ
सरकार द्वारा परीक्षाएं रद्द किए जाने के बाद अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने मामले की जांच तेज कर दी है।
कार्यालय पर छापेमारी: CID टीम ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के कार्यालय पर छापेमारी की।
सचिव से पूछताछ: छापेमारी के दौरान मिले महत्वपूर्ण दस्तावेजों और सबूतों के आधार पर CID ने मंगलवार को JSSC के सचिव सुधीर गुप्ता से कई घंटों तक गहन पूछताछ की।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जानकारी दी कि वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक परीक्षा सुधार समिति का गठन किया गया है, जो पूरी चयन प्रक्रिया को मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए सिफारिशें सौंपेगी।
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परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों में आक्रोश, किया विरोध प्रदर्शन
एक तरफ जहां अनशन पर बैठे छात्र संगठन इस फैसले को अपनी जीत बता रहे हैं, वहीं JSSC-CGL परीक्षा में सफल घोषित हुए उम्मीदवारों ने सरकार के इस कदम का कड़ा विरोध किया है।
रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन के बाहर विरोध प्रदर्शन करते हुए सफल अभ्यर्थियों ने कहा कि पूरी परीक्षा रद्द करने से निर्दोष और मेहनती छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। अभ्यर्थियों ने मांग की कि सरकार केवल दोषियों और धांधली में शामिल लोगों पर कार्रवाई करे, न कि पूरी परीक्षा रद्द कर योग्य उम्मीदवारों का अवसर छीने। सफल छात्रों ने फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने का भी ऐलान किया है।
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झारखंड में भर्ती परीक्षाओं के रद्द होने से एक ओर जहां अनशनकारी छात्रों ने राहत की सांस ली है, वहीं दूसरी ओर सफल अभ्यर्थियों के सामने अनिश्चितता का संकट खड़ा हो गया है। CID की जारी जांच और अमिताभ कौशल समिति की सिफारिशों पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं।
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