उमर अब्दुल्ला का स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का दौरा, कश्मीर-केवड़िया की एकता
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हाल ही में गुजरात का दो दिवसीय दौरा किया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य राज्य में पर्यटन को फिर से स्थापित करना था, जो 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले से बुरी तरह प्रभावित हुआ था। उन्होंने कहा कि अमरनाथ और वैष्णो देवी जैसी यात्राओं का सफल आयोजन घाटी में सामान्य स्थिति का सबसे बड़ा प्रमाण है।
- गुजरात, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल से पर्यटक सबसे अधिक आते हैं।
- आतंकी हमले के बाद सभी पर्यटन स्थलों की सुरक्षा जाँच की गई है।
- जाँच में सफल रहे स्थलों को ही पर्यटकों के लिए खोला गया है।
उन्होंने अहमदाबाद में पत्रकारों से बात करते हुए घाटी आने वाले पर्यटकों को सुरक्षा का पूर्ण आश्वासन भी दिया। मुख्यमंत्री ने इन राज्यों में कश्मीर पर्यटन को सक्रिय रूप से बढ़ावा देने की बात कही।
मुख्य बिंदुओं :
1. उमर अब्दुल्ला ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का दौरा कर कश्मीर पर्यटन को फिर से स्थापित करने की पहल की।
2. प्रधानमंत्री मोदी ने उमर अब्दुल्ला की एकता की यात्रा की सराहना करते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया।
3. अमरनाथ और वैष्णो देवी यात्राओं को सफल बताकर घाटी में सामान्य स्थिति का दावा किया गया।
4. सरदार सरोवर बांध की प्रशंसा कर जम्मू-कश्मीर में जल-विद्युत परियोजनाओं की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
5. पहलगाम आतंकी हमले के बाद सुरक्षा खामियों पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की जवाबदेही की मांग की।
6. साबरमती रिवरफ्रंट पर दौड़ लगाकर अब्दुल्ला ने शहरी बुनियादी ढांचे को सुखद और प्रेरणादायक बताया।
7. स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को उमर अब्दुल्ला ने ‘नए भारत’ की पहचान और एकता का प्रतीक बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के दौरे की सराहना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का दौरा करने की सराहना की। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर पोस्ट करके कहा, “कश्मीर से केवड़िया! श्री उमर अब्दुल्ला जी को साबरमती रिवरफ्रंट पर दौड़ते और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का दौरा करते देखकर अच्छा लगा।” उन्होंने कहा कि यह यात्रा एकता का महत्वपूर्ण संदेश देती है।
- यह दौरा अन्य भारतीयों को देश के विभिन्न हिस्सों की यात्रा के लिए प्रेरित करेगा।
- उमर अब्दुल्ला की यह यात्रा सामान्य राजनीतिक बयानबाजी से एक महत्वपूर्ण बदलाव है।
- राष्ट्रीय स्मारक वैचारिक विभाजन को पाटने का काम कर सकते हैं।
इस दौरे को इस संदर्भ में भी दिलचस्प माना गया क्योंकि अधिकांश विपक्षी नेताओं ने स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी के उद्घाटन के बाद से इसका दौरा नहीं किया है।
जम्मू-कश्मीर के विकास पर भी हुई चर्चा
अपनी यात्रा के दौरान, मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने सरदार सरोवर बांध का भी दौरा किया और इसकी प्रशंसा की। उन्होंने उम्मीद जताई कि सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद जम्मू-कश्मीर में भी बिजली और पानी की कमी को दूर करने के लिए ऐसी ही परियोजनाएँ शुरू हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से भी उन्होंने शिष्टाचार मुलाकात की, जिसमें अंतर-राज्य सहयोग पर चर्चा हुई।
- सरदार सरोवर बांध परियोजना सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पानी पहुँचाने का एक बड़ा उदाहरण है।
- सिंधु जल संधि के बाद जम्मू-कश्मीर में पानी रोकना संभव नहीं था।
- अब इस संधि के निलंबन के बाद नई परियोजनाओं की संभावना है।
यह यात्रा पर्यटन के साथ-साथ विकास और बुनियादी ढांचे पर सहयोग का एक महत्वपूर्ण संकेत देती है।
सुरक्षा खामियों पर तीखी आलोचना
पहलगाम हमले के बाद खुफिया और सुरक्षा विफलता को लेकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी इन खामियों को स्वीकार किया है, तो इसके लिए किसी को जवाबदेह ठहराना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि हालाँकि पहलगाम के आतंकवादी मारे गए हैं, पर हमले के लिए ज़िम्मेदार सुरक्षा तंत्र पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
- अनुच्छेद 370 हटने के छह साल बाद भी आतंकवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
- अब्दुल्ला ने गुजरात के दौरे पर आने वाले टूर ऑपरेटरों से भी बात की।
- उनका लक्ष्य घरेलू पर्यटन बाज़ार से फिर से जुड़ना था।
उन्होंने इस यात्रा का उपयोग पर्यटकों में विश्वास बहाल करने के लिए किया, साथ ही अधिकारियों की जवाबदेही पर भी ज़ोर दिया।
साबरमती रिवरफ्रंट की सुंदरता से प्रभावित हुए अब्दुल्ला
आधिकारिक कार्यक्रमों के बीच, उमर अब्दुल्ला ने अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट पर सुबह की दौड़ लगाई। उन्होंने अटल फुट ब्रिज की भी प्रशंसा की और रिवरफ्रंट को “उन सबसे अच्छी जगहों में से एक” बताया जहाँ उन्होंने कभी दौड़ लगाई थी। उन्होंने कहा कि इस तरह के शहरी बुनियादी ढांचे का विकास प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व को दर्शाता है।
- साबरमती रिवरफ्रंट को देखकर अब्दुल्ला ने इसे एक सुखद अनुभव बताया।
- उन्होंने एक्स पर तस्वीरें साझा कर रिवरफ्रंट की जीवंतता का उल्लेख किया।
यह व्यक्तिगत अनुभव बताता है कि कैसे शहरी विकास और पर्यटन एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को बताया नए भारत की पहचान
उमर अब्दुल्ला ने दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा के प्रति अपनी प्रशंसा व्यक्त की। उन्होंने कहा, “मैंने स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी के बारे में बहुत कुछ सुना था, लेकिन जब तक मैंने इसे खुद नहीं देखा, तब तक मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह इतनी भव्य होगी।” उन्होंने आगे कहा कि यह प्रतिमा सरदार वल्लभभाई पटेल को सच्ची श्रद्धांजलि और ‘नए भारत’ की एक महान पहचान है।अब्दुल्ला ने इस दौरे को एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा, जो भारत की एकता और अखंडता को प्रदर्शित करता है।
- यह दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा है, जो 182 मीटर ऊँची है।
- इसका उद्घाटन 31 अक्टूबर 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।



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